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पचास के बाद की पछवा हवा भाग -31

Byuser

May 23, 2021

अभी तक आपने पढ़ा राम अपने भाई से मिलकर सारी बात बताता है हरी सेठ से प्रार्थना करके राम की नौकरी बहाल करवा देता है और अगले दिन पुर्वी के साथ घर आने की कहकर चला  जाता है अब इससे आगे –

आज रविवार का दिन है फिर भी हरी बाकी वर्किंग दिन की तरह सुबह ही उठ लिया माधवी ने पूछा आज तो छुट्टी फिर इतनी जल्दी कियों उठ रहे हो और आज तुम कुछ ज्यादा ही खुश भी नजर आ रहे हो हरी मुस्कराते हुए बोला  आज एक सरप्राइज है तुम भी जल्दी तैयार हो लो और रसोई में कुछ बढ़िया पकवान बनाओ |माधवी बहुत जिद करती है कि  बताओ ना क्या बात है लेकिन हरी सरप्राइज कहकर टाल देता है |

हरी तैयार होकर माताजी -पिताजी  के कमरे में जाकर उनका आशीर्वाद लेता है श्याम और रमा की तो वर्षों से आदत रही है सुबह को जल्दी उठकर नहाधोकर पूजा पाठ करने की वो  दोनों तो तैयार होकर ही बैठे थे |श्याम की पारखी नजरों ने भांप लिया की आज हरी कुछ ज्यादा ही खुश है श्याम ने हरी को टोकते हुए कहा बेटा हरी अपनी खुशी में हमें शामिल नहीं करोगे ,हरी बोला ऐसी तो कोई बात नहीं है पिताजी हाँ आज आपके लिए एक सरप्राइज जरूर है श्याम ने कोई उतावलापन नहीं दिखाया उसने सोचा जो भी खुशी का कारण होगा वो शीघ्र ही सामने आ जाएगा |

इधर राम जब फेक्टरी से बापिस आया तो पुर्वी उसी का इंतजार कर रही थी उसका अनुमान था राम कहीं दोस्तों के साथ पीने चला  गया होगा वो ये सोचकर खुद से ही घृणा किये जा रही थी कि उसने अपनी मौज मस्ती की खातिर अपने उस पति को नजरअंदाज कर दिया जो उससे इतना प्यार करता था |राम सब समझ गया फिर भी उसने मुझे जरा भी हिकारत भरी नजरों से नहीं देखा उसमें कितने अच्छे संस्कार हैं और में आधुनिकता के चक्कर में उसे ही गलत रास्ते पर जाने के लिए प्रेरित करती रही पुर्वी और भी ना जाने क्या सोचती रहती कि राम ने उसे टोकते हुए कहा पुर्वी में आ गया हूँ और तुम पता नहीं किस सोच में डूबी  हुई हो ,पुर्वी उठकर राम के पैर पकड़ लेती है और कहती है मुझे माफ कर दो मैंने तुम्हें बहुत दुख पहुंचाया है |

राम ने उसे ऊपर उठाते हुए कहा पुर्वी अब अपने आपको दोष देने से कोई लाभ नहीं आगे से ख्याल रखना कल  हम घर चलेंगे और माताजी पिताजी से अपने बर्ताव के लिए क्षमा माँगेगे अभी तो तुम  रसोई में अपने हाथों  से कुछ पका लो बाहर खाते खाते मेरा पेट भी खराब होने लगा है पुर्वी तुरंत ही रसोई की तरफ बढ़ गई |

पुर्वी लगातार ये सोचे जा रही थी कि जिस राम को वह शराबी बना चुकी थी उसने परेशानी के समय में अपने आपको किस तरह संभाल लिया ये पिताजी के ही संस्कार हैं अब वह भी उन्हीं के बताए रास्ते पर चलेगी और अपने परिवार का ख्याल रखेगी उसने पहली वार आज रसोई में राम के लिए मन लगाकर खाना बनाया और थाली में परोसकर राम के कमरे की तरफ बढ़ चली| राम को शाम होते ही शराब की लत बिचलित करने लगी लेकिन उसने अपने आपको रोके रखा पुर्वी जैसे ही खाना लेकर आई उसने खाना शुरू कर दिया आज कई दिनों बाद घर का अच्छा खाना  खाने को मिला है राम खाना खाते हुए बोला पुर्वी एक अच्छी खवर ये है कि हरी  ने मेरी नौकरी भी वहाल करवा दी है पुर्वी बहुत खुश हो जाती है |इससे आगे अगले भाग में –

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