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पचास के बाद की पछवा हवा भाग -30

Byuser

May 22, 2021

अभी तक आपने पढा पुर्वी के बॉस का स्थानान्तरण हो जाने के बाद मार्केट से पुर्वी ने जो उधार  ले रखा था उसके मांगने वाले उनके क्वाटर पर पहुँच जाते हैं ,पुर्वी घबरा जाती है और राम को उठाती है |राम उसकी बात सुनकर एक बार को भौचक्का रह जाता है फिर स्थति की गंभीरता को समझते हुए बाहर जाकर सभी को हाथ जोड़कर एक निश्चित समय में पैसा लौटाने को कहता है | अब इससे आगे –

राम अंदर आकर पुर्वी से कहता है पुर्वी तुमने घरवालों  से अलग होकर क्या पाया मुझे शराबी बना दिया ,मेरी नौकरी छूट गई और तो और मुझे यंहा आने के बाद घर का खाना नसीब नहीं हुआ तुम्हारे ओवरटाइम की मौजमस्ती ने सब कुछ  बर्बाद कर दिया तुम्हें कुछ समझ भी आ रहा है या नहीं | पुर्वी राम के पैर पकड़ लेती है और रोते हुए अपने किये की माफी मांगती है राम कहता है मेरे माफ करने से कुछ नहीं होगा माफ तो हमें हमारे पिताजी करेंगे तब संतोष मिलेगा लेकिन उनके पास में क्या मुंह लेकर जाऊं तुमने मुझे कहीं  का नहीं छोड़ा |

राम दूसरे दिन  तैयार होकर अपने भाई से मिलने फेक्टरी जाता है |हरी अपने भाई को देखकर बहुत खुश होता है लेकिन राम का उजड़ा चेहरा देखकर अंदर से बहुत दुखी भी होता है | राम बहुत देर से खामोश है उसे समझ ही नहीं आ रहा है  वह अपने छोटे भाई को अपनी बर्बादी की कहानी कैसे बताए ,हरी बिना बताए ही समझ जाता है कि राम मुसीबत में है वह कहता है भाई कोई भी परेशानी हो तो बताओ हम मिलकर सभी समस्या का समाधान जरूर ढूंढ लेंगे |

राम आज अपने भाई को सकुचाते हुए सब कुछ बता देता है हरी अपने भाई की बात सुनकर गंभीर हो जाता है वह कहता है भाई भावी जी को यादि सचमुच में अपने किये पर पछतावा है तो घर जाकर माताजी पिताजी से माफी मांगे तुम नहीं जानते तुम्हारे जाने के बाद पिताजी बहुत दुखी रहते हैं वो तुम्हें न सिर्फ माफ करेंगे बल्कि उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा |

हरी की बात सुनकर राम ने अपने मन में ठान लिया कि वह पुर्वी को लेकर घर जाकर माताजी पिताजी से माफी मांगेगा और आगे जैसा पिताजी कहेंगे वैसा ही करेगा फिर हरी की तरफ मुखातिब होते हुए बोला  ठीक है भाई अब में चलता हूँ कल घर आऊँगा कहकर उठने लगता है तभी हरी कहता है 10 मिनट रुको में एक वार सेठ से मिलकर आता हूँ फिर चले जाना |

जब से सेठ ने राम को नौकरी से निकाला है तभी से हरी ने सेठ से बिनती करके राम की जगह किसी और को कुछ दिन ना रखने के लिए मना लिया था इसकी एवज में वह बिना अतिरिक्त सेलरी के राम का भी काम कर रहा था उसे बिस्वास था की राम एक ना एक दिन जरूर बापिस आएगा लेकिन वह इतनी जल्दी आ जाएगा उसे बिस्वास नहीं हो रहा था खैर वह कुछ सोचते हुए सेठ के कमरे में दस्तक देता है सेठ हरी को अंदर बुला लेता है हरी राम के बारे में सब कुछ बता देता है  वह कहता है सेठजी अब राम पहले की तरह घर से ही काम पर आया करेंगे आप उन्हें उनके काम पर रख लें |

सेठ जानता था की राम बहुत मेहनती है वो तो उसके रोज देर से आने और कभी ना आने के कारण परेशान होकर नौकरी से निकाला था लेकिन जब हरी ने बताया तो वो सहज ही राम को ना सिर्फ नौकरी पर रखने को तैयार हो गया बल्कि जिस दिन से  उसने नौकरी छोड़ी थी उसी दिन से वहाल कर अपॉइंटमेंट का लेटर दे दिया हरी खुश होता हुआ अपने केबिन में आया और राम को वो अपॉइंटमेंट लेटर थमा दिया राम ने उसे पढ़ा तो उठकर हरी को गले लगा लिया और बोल भाई आज तुमने छोटा होकर बड़े भाई का रोल अदा किया है में कैसे तुम्हारा आभार करूँ |हरी ने अपने भाई के मुहँ पर उंगली रखते हुए कहा ,भाई कुछ कहने की जरूरत नहीं कल संडे है हम तुम्हारा इंतजार करेंगे |माताजी पिताजी और माधवी के लिए कल सरप्राइज का दिन होगा |इससे आगे की कहानी अगले भाग में –

 

 

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