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पचास के बाद की पछवा हवा भाग -29

Byuser

May 21, 2021

अभी तक आपने पढ़ा  राम की नौकरी छूट चुकी है वह पूरी तरह से पुर्वी पर निर्भर है इधर पुर्वी ने अपने ऊपर कर्ज किया हुआ है उसके बॉस का ट्रांसफर हो गया है वह जाते हुए कुछ रकम पुर्वी को एक लिफ़ाफ़े में देकर जाता है जिसे राम झटक लेता है अब इससे आगे –

राम के लिफाफा झटकने के बाद पुर्वी बिफरती हुई राम से कहती है ये क्या मजाक है राम ये लिफाफा दो| मुझे कई काम निपटाने हैं लेकिन राम वह लिफाफा पुर्वी को नहीं देता वह बेशर्मी दिखाता हुआ कहता है जिसकी बीबी रात दिन कमाती है उसके पति को क्या  खाली हाथ होना चाहिए और फिर ये तो थोड़ी सी ही रकम है आज मुझे मेरे दोस्त को पार्टी देनी है इसलिए ये तो तुम भूल ही जाओ पुर्वी उससे छीनने का लाख प्रयास करती है लेकिन सफल नहीं हो पाती |

राम पैसों का लिफाफा लेकर घर से बाहर निकाल जाता है और देर रात नशे में धुत घर बापिस आता है आज तक जब भी राम इस तरह घर बापिस आता तो पुर्वी उसे टोकती नहीं थी लेकिन आज उसे महसूस हुआ कि उसने कितनी बड़ी गलती की है अपने खुद की अय्याशी के लिए अपने पति को ही शराबी बना दिया |आज वह राम को बहुत कुछ कहना चाहती थी मगर कोई लाभ नहीं राम  अपने बेड पर पसर चुका था |

पुर्वी के बॉस के तबादले की खबर मार्केट में आग की तरह फैल गई पुर्वी पर जो कर्जा  हो रखा था उनके लेनदार भी पुर्वी के घर के पास आ गए पुर्वी ने ऐसी स्थति पहले कभी नहीं देखी थी जब वह शामिल घर पर रहते थे तब वह खर्च तो करती थी लेकिन पैसा या तो राम के पिताजी श्याम के द्वारा मिलते थे या सभी की तनख्वा से आज सभी एक साथ उससे अपने अपने पैसों का हिसाब माँग रहे हैं पुर्वी के पास कुछ भी नहीं है वह अंदर जाकर राम को झकजोरकर उठाती है राम को सारी बात बताती है राम हैरानी से उसकी बात सुनता है वह कहता है यार पुर्वी तुम्हारी इतनी तनख्वा और ऊपर से ओवरटाइम फिर भी तुमने कर्जा किया हुआ है ये तो कमाल की बात है यंहा से ज्यादा सुखी तो हम अपने पिताजी के संरक्षण में थे जहां समय से नाश्ता समय से अन्य सभी  चीज मिल जाती थी |राम पुर्वी से एक सवाल करता है पुर्वी तुमने घर से अलग  होते हुए मुझे ख्वाब दिखाया था कि हमारे पास पैसों की कोई कमी नहीं होगी हमारे पास गाड़ी बंग्ला सब होगा लेकिन यंहा तो कर्जदारों की लाइन लगी है अब मुझे सब समझ  आ रहा है ये ओवरटाइम तुम्हारी अय्याशी थी ,पिताजी ने मुझे इशारों मे बहुत समझाने की कोशिश की लेकिन में तुम्हारी बातों में ऐसा फसा की समझ ही नहीं पाया |राम वहाँ  से उठा और बाहर आया उसने बाहर बैठे सभी सेठों से हाथजोड़कर कहा अभी हमारे पास पैसे नहीं हैं लेकिन जल्द ही आपके पास रकम लेकर में खुद आऊँगा आप धीरज रखिए उसके पिताजी इसी तरह महाजन को कहते थे और महाजन चुप लौट जाता था वही शब्द उसने यहाँ दोहराए और उसकी बातों का असर भी हुआ उन्होंने कहा भाई तुम्हारी बातों का मान  रखकर अभी तो हम जा रहे हैं लेकिन तुम ये बताओ कि कब तक हमारा पैसा बापिस कर दोगे राम एक निश्चित समय बता कर उन्हें वहाँ से रवाना  कर देता है | इससे आगे की कहानी अगले भाग में –

 

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