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पचास के बाद की पछवा हवा भाग -२२

Byuser

Apr 15, 2021

अभी तक आपने पढ़ा श्याम पुर्वी के देर रात घर आने से चिंतित है इस बिषय में वह राम से बात करता है |राम भी इस संबंध में कुछ नहीं जानता और पुर्वी से बात करने की कहता है |पुर्वी जब घर बापिस आती है और राम उससे बात करना चाहता है तो पुर्वी नींद का वहाना करके सो जाती है |अब इससे आगे –

राम ने पुर्वी से सुबह फिर बात करने की कोशिस की लेकिन ऑफिस जाने की तैयारी में उसे समय ही कहाँ मिल रहा था दूसरा देर से सोने की वजह से सुबह आँख भी जल्दी नहीं खुल पाई थी राम ने सोचा ऑफिस जाते पुर्वी से बात करेगा ,लेकिन उसकी सारी सोच तब धरी रह गई जब पुर्वी को लेने उसके ऑफिस से गाड़ी आ गई |पहले तो बो चारों पैदल ही ऑफिस के लिए निकलते थे लेकिन अब पुर्वी को लेने गाड़ी अक्सर आती रहती है |

पुर्वी के जाने के बाद माधवी भी सभी के टिफन तैयार करके राम और हरी के साथ पैदल ही ऑफिस निकल जाती है |आज राम का मन कई तरह की आशंकाओं से घिरा है इस बावत वह माधवी से कुछ पूछना चाहता है लेकिन झिजक वश पूछ नहीं पाता है इसी असमंजस में वे अपने दफ्तर के निकट पहुँच जाते हैं |

राम का आज दफ्तर में विलकुल मन नहीं लग रहा है ,रह रहकर दिमाग में यही सवाल उठ रहे हैं -आखिर पुर्वी इतनी देर तक ऑफिस में करती क्या है खुद सवाल करता है और खुद उनके उत्तर हासिल करने का प्रयत्न करता है खुद ही सर हिलाकर कहता है ऐसा होता होगा और खुद ही ना में गरदन हिलाकर कहता है नहीं एसा नहीं होता होगा |इसी उधेड़ बुन में कब छुट्टी का समय हो गया कुछ पता ही नहीं रहा |

राम को ऑफिस से घर वापिस आए लगभग दो घंटे बीत चुके हैं जबकि उनके ऑफिस का टाइम एक जैसा ही है |माधवी भी ऑफिस से आकर अपने घर के कामों को निपटा  रही है उसे आए हुए भी बहुत देर हो चुकी है ,यूं ही समय अपनी चाल से चलता जा रहा है  लेकिन पुर्वी का कहीं पता नहीं है |माधवी रात का खाना रखने उसके कमरे में आई तो उसने माधवी से पुछ  ही लिया -माधवी ,क्या तुम जानती हो तुम्हारी बहन इतना देर से क्यों आने लगी है |माधवी ने सर झुका  लिया मानो कह रही हो ये सवाल तो वह खुद भी जानना चाहती है उसने पुर्वी से ये जानने की कोशिश भी की है लेकिन पुर्वी हमेशा टाल देती है |कई देर तक जबाब नहीं मिला  तो राम ने फिर वही सवाल दोहरा दिया इस वार माधवी ने कहा भैया वो बड़े साहब की सेकेटरी है इस कारण देर हो जाती होगी |माधवी खुद अपने  जवाब से संतुष्ट नहीं थी तो राम उस जबाब से  कितना संतुष्ट हुआ होगा  |

आज तो घड़ी ने रात के ११ भी बजा दिए लेकिन पुर्वी का कंही पता नहीं है|राम की बेचैनी बढ़ती ही जा रही थी | घड़ी ने रात के १२  बजने का संकेत किया उधर गेट पर गाड़ी रुकने की आबाज आई ,कल की तरह आज राम  गेट के पास नहीं गया बल्कि जब पुर्वी बहुत देर तक दरबाजा पीटती  रही तब जाकर उसने दरबाज खोला |पुर्वी के अंदर आनेके बाद उसने धीरे से दरबाजा  बंद किया और बापिस अपने कमरे में आ गया तब तक पुर्वी चेंज करने जा चुकी थी लोटकर आई तो राम ने फिर खाने कीतरफ इशारा करते हुए कहा की मैं और खाना अभी तक तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं और अब तो केलेण्डर की तारीख भी बदली हो गई है ,खाना खाओगी या आज भी खाकर  आई हो |

पुर्वी तो खाना खाकर ही आई थी एक राम था जो दो दिन से भूखा सो जाता है |पुर्वी ने एक जम्हाई ली और बेड की तरफ जाते हुए बोली बहुत जोर की नींद आ रही है कहकर बेड पर करवट लेकर लेटने  लगी तो राम ने कहा पुर्वी में कल से तुमसे कुछ बात करना चाहता हूँ राम अभी आगे और कुछ कहने वाला था लेकिन पुर्वी ने उसे बीच में ही टोक दिया अभी नहीं ,फिर कभी अभी मुझे नींद आ रही है |

उसकी ये बात सुनकर राम का धैर्य जबाब दे गया उसने पुर्वी का हाथ जोर से पकड़ कर झटका और बेड पर ही लगभग घसीटते हुए बैठा दिया इस अचानक हुई घटना से पुर्वी  भौचक्की रह जाती है और सभलते हुए चीखकर कहती है व्हाट इज दिस ?राम उसके सवाल के जबाब में पूछता है ये बताओ आजकल ऑफिस से इतना लेट क्यों आ रही हो ?पुर्वी ने एक लंबी सांस ली और बोली तो ये बात है जनाब को मुझ पर शक हो रहा है |किया तुम जानते हो जितना तुम सब मिलाकर कमाते हो उससे कहीं  ज्यादा मेरी तनख्वा है ,ज्यादा तनख्वा मतलब ज्यादा काम |लेकिन पहले भी तो तुम समय से माधवी के साथ ही घर आ जाया करती थीं तो अब किया हो गया राम ने पूछा |इसी तरह के कई और सवाल ,जवाब पर कोई भी जबाब राम को संतुष्ट नहीं कर पाया एक दूसरे पर चिल्लाने की वजह से श्याम की आँख खुल जाती है और वह राम को आबाज लगाकर कहते है क्या हुआ राम कुछ नहीं पिताजी कहकर दोनों शांत हो जाते है -इससे आगे की कहानी अगले भाग में –

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