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पचास के बाद की पछवा हवा भाग -20

Byuser

Apr 12, 2021

अभी तक आपने पढ़ा पुर्वी और माधवी की नौकरी लगने की खुशी में उनके घर एक छोटी सी सनेक्स पार्टी  का आयोजन  होता है  अब इससे आगे  |

आज कई दिनों के बाद इस कहानी पर लौट कर आया हूँ  पहले तो मेरा बिचार था कि इस कहानी को बिराम देने का ये सही समय है कियोंकि अब श्याम के घर में  सब अच्छा ही अच्छा है लेकिन जिस मुख्य  मकसद के लिए ये कहानी लिखी जा रही है यानि की फजूल खर्ची  वो मकसद शायद अधूरा ही रह  जाता  क्योंकि आमदनी कितनी भी ज्यादा क्यों ना हो जाए फजूल खर्ची के आगे वो भी कम पड़ने लगती है इसलिए मैंने  कहानी काफी लंबी हो जाने  के वावजूद इसके आगे के कई और भाग लिखने का निर्णय लिया है |हम चाहते हैं की हमारी हर कहानी हमारे पाठकों का मार्गदर्शन तो करें ही साथ ही उनके द्वारा हम अपने बच्चों को भी कहानी के माध्यम से उचित मार्ग दिखा सकें ऐसी  कोशिस करते  रहेंगे |खैर अब आगे की  कहानी –

जब खुशियां  घर के आगन में दस्तक देती  है  तो परेशानियों के काले बादल धीरे धीरे अपना दम तोड़ने लगते है ऐसा ही कुछ श्याम अपने मन में बिचार किये हुए है अब उसके घर में  सभी कमाने बाले हैं और वह भी अब अपनी खेती को संभाल लेगा  उसे  इंतजार है की कब राम और हरी अपनी तनख्वा लेकर आयें और वह यह  कह सके कि उसने अपने खेत महाजन से बापिस कर  लिए हैं इसी तरह राम और हरी की नौकरी लगे कब 2 महीने गुजर गए पता ही नहीं चला |आज दोनों अपनी सेलरी लेकर घर आए हैं पहली सेलरी पर उनकी खुशी का अनुमान सिर्फ वही इंसान लगा सकता है जिसने  नौकरी की  पहली  सेलरी  ली हुई हो |

घर आने पर राम और हरी  सीधे अपने माता पिता के कमरे में जाते हैं और उन्हें खुद की कमाई की पहली सेलरी देते है ,श्याम पिछले कुछ समय की घटनाओं को याद कर इमोशनल हो जाता है |लाख कोशिशों के बावजूद वह अपनी आखों से बहते आसुओं को नहीं रोक पाया तभी राम अपने पिताजी को कहता है पिताजी आप रो रहे हैं तो श्याम उन आसुओं को पोंछते हुए कहता है बेटा  ये तो खुशी के आँसू हैं |

श्याम तनख्वा के रुपये लेकर दूसरे दिन माधवी के गहने माधवी को सुपुर्त करते हुए कहता है बेटी ये गहने सिर्फ गहने नहीं इन गहनों से इस घर की प्रतिष्ठा भी जुड़ी हुई है इसलिए आगे ध्यान रहे इनका इस्तेमाल तभी हो जब किसी के जीवन मरण का सवाल हो |माधवी सिर झुकाते हुए कहती है ठीक है पिताजी अब इसकी नौबत  नहीं आएगी |अब हम सब जो कमाने लग गए हैं ,श्याम  मन ही मन बड़बड़ाता है काश  ऐसा  ही हो |

खुशी के दिन इस तरह जाते हैं जैसे इनके पर निकाल आए हों ,आज उत्सव का दिन डबल होने बाला है घर मे चारों अपने अपने ऑफिस से आते हैं तो जेब में सेलरी है जो खुशी का अहसास एक महीने पहले राम और हरी ने किया था उसी खुशी का अहसास आज पुर्वी  और माधवी को हो रहा है  |राम और हरी के साथ  पुर्वी और माधवी भी अपनी अपनी तनख्वा श्याम के हाथ में रख देते हैं |राम कहता है पिताजी अब आपको कोई काम करने की जरूरत नहीं है हम चारों ही काफी हैं  कमाने के लिए  श्याम कहता है बच्चों जब तक जीवन है तब तक इंसान को अपने कर्म से विमुख नहीं होना चाहिए और फिर  यदि मैं  खेती नहीं करूंगा तो समय से पहले ही बूढ़ा हो जाऊंगा |चारों हंस पड़ते हैं और कहते हैं ठीक है जैसी आपकी मर्जी |( इससे आगे की कहानी अगले भाग में )

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