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पचास के बाद की पछवा हवा भाग -19

Byuser

Apr 7, 2021

अभी तक आपने पढ़ा की पुर्वी को पर्सनल सैकेटरी और माधवी को रिसेपसनिस्ट की जॉब मिल जाती है |दोनों खुशी -खुशी घर बापिस आती हैं | (अब इससे आगे )

पुर्वी और माधवी के चेहरे खुशी से तमतमा रहे हैं ,उन्हें लग रहा है मानो उनके पंख निकल आए हैं |  दोनों के दिमाग में बस यही चल रहा है  की वे   कब अपने घर पहुचें और घर बालों से अपनी खुशी को जाहिर करें |
कहते हैं जब किसी इंसान को कोई खुशी कम  प्रयास से ही हासिल हो जाती है तो खुश होने का मजा दोगुना कर देती है |यही आज पुर्वी और माधवी के साथ होता दिखाई दे  रहा है |जो आज तक थोड़ी दूर भी बिना रिक्शा के दो कदम नहीं रखती थीं वही आज कंपनी से पैदल ही घर जा रही हैं और ये कंपनी उनके घर से कोई इतनी पास भी नहीं है बल्कि तकरीबन 2 किमी.  के फासले पर है |ये फासला कब  उन्होंने तय कर लिया उन्हें खुद ही इसका आभास नहीं रहा |

पुर्वी और माधवी जैसे ही घर में दाखिल होती हैं श्याम और रमा जहां बैठे हैं उनकी ओर ही बढ़ जाती हैं |दोनों अपने सास ससुर के पैर छूकर आशीर्वाद लेती हुई कहती हैं माताजी आपकी बहुओं को बहुत अच्छी नौकरी मिल गई है |वैसे तो पुर्वी और माधवी की खुशी देखकर ही श्याम और रमा समझ गए थे  की जरूर कोई खुशी की बात है लेकिन जब दोनों बहुओं ने नौकरी लगने की बात बताई  तो वे भी बहुत खुश हुए |

अभी दोनों अपने सास ससुर को सारी जानकारी दे ही रही थीं मसलन कैसे वे कंपनी में गई कैसे इंटरव्यू हुआ ,तभी राम और हरी भी अपनी ड्यूटी से वापिस आ जाते है और वे भी पुर्वी और माधवी  की नौकरी की बात सुनकर खुश हो जाते हैं और  दोनों से फिर से सारे घटनाक्रम के वारे में जानकारी लेते हैं | इस दौरान एक विशेष बात ये रही कि पुर्वी ने एक बार भी ये जाहिर नहीं किया की कंपनी का जनरल  मैनेजर  उसका पहचान का था ,ये बात तो वह माधवी से भी छुपा  गई थी जबकि वे एक दूसरे से सारी बात सेयर कर लेती थीं ,अब ये तो इस कहानी के आगे आने बाले भागों में ही पता चलेगा  की उसने ऐसा क्यों  किया  |

खैर  खुशी तो खुशी ही होती है और खुशी मनाने का मौका इस समय कोई गवाना नहीं चाहता था वेशक इस समय  उनकी माली हालत अतिरिक्त खर्च वहन करने की नहीं थी फिर भी बाहर से कुछ सनेक्श ,मिठाई और कोल्ड ड्रिंक्स  मंगाकर खुशियां मनाई गईं |राम और हरी तो चाहते थे की एक छोटी सी पार्टी का आयोजन किया जाए जिसमें उसकी फेक्टरी का सेठ और  पुर्वी /माधवी की कंपनी का बॉस हो उन्होंने इसके लिए अपने पिताजी से अनुमति मांगते हुए कहा था पिताजी अब कुछ ही दिनों में हम दोनों को सैलरी मिलने वाली है तो क्यों ना हम घर में एक छोटी सी पार्टी कर लें |

श्याम और रमा उनसे कम खुश नहीं थे बल्कि उनकी खुशी उन सबसे ज्यादा थी ऐसे कौन माँ ,बाप होंगे  जो अपने बच्चों की कामयावी पर खुश ना हों ये तो हर माँ बाप का सपना होता है की उनके बच्चे अपने पैरों  पर खड़े हों  लेकिन श्याम चाहता था कि कामयवी के साथ वे जिम्मेदार भी बनें इसलिए उसने कोई भी पार्टी के आयोजन के लिए मना कर दिया था हालांकि ये बात पुर्वी को कुछ नागवार गुजरी जो उसके चेहरे पर साफ दिखाई पड़ रही थी |अंत में  घर में ही एक छोटी सनेक्स पार्टी मनाई गई जैसा की आप ऊपर पहले ही पढ़ चुके हैं |अब आगे ये कहानी एक नया मोड  लेने जा रही है तो आगे की कहानी जानने के लिए अगले भाग को पढ़ना ना भूलें |

 

 

 

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