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पचास के बाद की पछवा हवा भाग -17

Byuser

Mar 31, 2021

अब तक आपने पढ़ा पुर्वी पिछले 6 महीने की सभी बातें रमा से कह देती है |रमा और  श्याम पुर्वी की सारी बात सुनकर कहते है कि सब ठीक हो जाएगा इसके बाद श्याम राशन लेने किराने की दुकान पर चला जाता है अब इससे आगे –

श्याम जैसे ही किराने की दुकान पर पहुंचता है किराने वाला देखकरबड़ा  खुश होता है|दुकानदार श्याम से कहता है  चचा इतने दिन के लिए कहाँ चले गए थे | श्याम कहता है बस यूं ही कुछ समय बाहर लगाकर आए हैं| अपनी सुनाओ कैसा चल रहा है काम धंदा ,दुकानदार श्याम से कहता है -ठीक है पर वैसा नहीं जैसा पहले था |दुकानदार श्याम से माफी मांगते है कहता है कि चचा मुझे माफ कर देना ,आज माधवी को मैंने राशन देने से मना कर दिया दरअसल जब से आप गाँव से गए हो तब से अब तक उधार सामान तो लगातार जा रहा है लेकिन एक बार भी पैसों का हिसाब नहीं किया है |

दुकानदार की बात सुनकर श्याम बिना कुछ लिए ही बापिस जाने को मुड़ता है तभी दुकानदार कहता है चचा थैला खाली ही ले जाओगे |श्याम उसकी तरफ हैरानी से देखता है क्योंकि थैला तो उसने छुपाया  हुआ था खैर श्याम को थोड़ी राहत जरूर मिली कि दुकानदार उसे सामान देने को मना नहीं कर रहा है |श्याम उसे जरूरी सामान देने को कहता है और भरोसा दिलाता है कि जल्दी ही वह सारे पैसे चुकता कर देगा |

श्याम राशन का जो भी जरूरी सामान था लेकर घर आता है और रमा को आबाज लगाकर कहता है कि देखो अब खाने का समय तो निकल चुका है बहुओं से कहो वह शाम के खाने की तैयारी करें,राम और हरी आ जाएंगे तो सब मिलकर खाना खाएंगे |पुर्वी  और माधवी भी वहीं हैं इसलिए रमा कहती है कि तुम्हारी बहूएं सुन रही हैं |

अपने निधारित समय पर राम और हरी घर पहुँच जाते हैं दोनों फ्रेश होने सीधे बाथरूम की तरफ चले जाते हैं | माधवी पहले ही सब्जी पका  चुकी है ,ज्यादातर किचन का काम माधवी ही सभालती है लेकिन पुर्वी भी अपनी बहन के साथ कुछ ना कुछ काम में हाथ बटा ही देती है |राम और हरी को आता देख माधवी गैस पर तवा रख देती है और पूर्वी से कहती है ,दीदी बैसे तो रात के खाने में अभी समय है लेकिन आज सुबह से किसी ने कुछ भी नहीं खाया है तो  में रोटी सेकती हूँ और आप सभी को खाना खिला दो |

राम और हरी की शादी के बाद आज पहला मौका है जब श्याम और रमा अपने दोनों बेटों के साथ बैठकर भोजन करने बाले हैं | पुर्वी चार थालियों में खाना परोसकर लाती है और  सभी के आगे एक एक थाली रख देती है सभी खाना  शुरू कर देते हैं खाना खाते हुए सभी मौन हैं बल्कि यह कहने में कोई अतिषयोक्ति नहीं होगी कि एक प्रकार का सन्नाटा है यदि सुई  भी गिरे तो आबाज करेगी|एक दूसरे से कहने को बहुत कुछ है लेकिन कोई भी कुछ बोल नहीं रहा है |

खाना खाने के बाद आखिर श्याम ही राम और हरी की ओर मुखातिब होकर कहता है -राम तुम इस घर के बड़े बेटे हो इसलिए तुम्हारी इस घर के प्रति बड़ी जिम्मेदारी है लेकिन इसका ये मतलब नहीं है की बाकी किसी की कोई जिम्मेदारी नहीं है ,परिवार खुशहाल बनाने में सभी के योगदान की जरूरत होती है |पुर्वी ने हमें सब कुछ बता दिया है इसलिए चौंकने की जरूरत नहीं है |अब हमारी सबसे पहले ये जिम्मेदारी है कि हम महाजन के पास गिरवीं रखे माधवी के गहनों को उसके पैसे देकर बापिस लाएं हालांकि श्याम वो गहने पहले ही महाजन से वापिस ला चुका है पर अभी वो यह जाहिर नहीं होने देना चाहता है |

राम और हरी की पत्नियाँ भी खाना खाने के बाद वहीं आ जाती हैं तब श्याम कहता है की हमारी दोनों बहूएं भी अच्छी पढ़ी लिखी हैं इसलिए इन दोनों में से कोई एक नौकरी कर सकती है अगर तुम्हारी सबकी सहमति हो तो पुर्वी भी नौकरी की तलाश शुरू कर सकती है ,रमा जो काफी देर से सभी की बात सुन रही थी बोली एक कियों ये दोनों ही नौकरी की तलाश कर सकती हैं में अभी इतनी लाचार नहीं हूँ जो घर का काम ना कर सकूँ ,तभी माधवी कहती है माताजी हम यदि काम पर जाएंगे तब भी आपको परेशान नहीं होने देंगे |हम बाहर जाने से पहले ही सारा काम निपटा  कर जाएंगी |अंत में ये सहमति बन जाती है की राम और हरी के साथ पुर्वी और माधवी भी नौकरी पर जाएंगी (इससे आगे की कहानी अगले भाग में )

 

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