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पचास के बाद की पछवा हवा भाग -16

Byuser

Mar 30, 2021

अभी तक आपने पढ़ा जब रमा सेठ से पैसे लेने के लिए राम को कहती है तो राम उसे झिड़क देता है और दोनों भाई अपने माता पिता का आशीर्वाद लेकर फैक्ट्री को चले जाते हैं  |अब आगे –

पुर्वी, माधवी को कहती है कि माधवी माताजी पिताजी अपने कमरे में आराम कर रहे हैं धीरे- धीरे  दोपहर के खाने का समय भी होता जा रहा है लेकिन घर में बनाने केलिए कुछ भी नहीं है |तुम सामने किराने बाले के पास जाकर कुछ राशन ले आओ |

माधवी घर से एक बैग लेकर किराने की दुकान पर चली जाती है और किराने वाले से कुछ सामान देने को कहती है लेकिन दुकानदार सामान देने से मना कर देता है वह कहता है देखो बहन मैं भी बाल बच्चे वाला हूँ जब से तुमने उधार ले जाना शुरू किया है तब से अभी तक एक वार भी पैसों का हिसाब नहीं किया है |श्याम भाई भी उधार ले जाते थे लेकिन जिस समय देने का कहते उसी दिन चुकता कर जाते थे |माधवी कहती है की इस महीने  इनकी सेलरी आएगी तो सारा हिसाब करवा दूँगी |माधवी के इतना कहने के बाद भी दुकानदार सामान नहीं देता है |

सामान ना मिलने से निराश माधवी बापिस लौट आती है और सारी बात अपनी बहन को आकर कहती है ,उनकी बातें रमा भी सुन लेती है और श्याम से आकर सारा किस्सा बताती है ,श्याम सारी बात सुनकर बडा  हैरान है की 6 महीने के अंदर इन्होंने इतना कर्ज कैसे कर लिया वो भी सिर्फ  घर खर्च में  |अब श्याम की समझ में आने लगा की वह इतना कमाता  था उसके बाद भी घर में बरक्कत  कियों नहीं हो रही थी|

दोपहर के  खाने का जब समय निकल गया लेकिन खाना  नहीं बना तो श्याम ने पुर्वी को आवाज लगाते हुए कहा पुर्वी बेटा दोपहर से शाम होने को जा रही है आज खाना नहीं बनाओगी |पुर्वी श्याम के कमरे के पास आकर चुपचाप खड़ी हो जाती है |जब कई देर तक जबाब नहीं आता है तो रमा कहती है क्या बात है बेटी जो भी कहना है कह दो कोई परेशानी है तो बताओ |हम दोनों तुम्हें और माधवी को राम और हरी से भी ज्यादा प्यार करते हैं |

अपनी सास द्वारा इतने प्यार से बोलने पर पुर्वी ने अपना धैर्य खो दिया और आँखों में आँसू भरकर अपनी सास के गले से लगकर रुँधे हुए गले से बोली माँ हमें माफ कर दो ,जब से आप दोनों यंहा से गए हो तबसे हम एक दिन भी खुशी से नहीं रह पाए हैं |ये वही पुर्वी है जो रमा और श्याम के जाने पर इस तरह खुश थी जैसे किसी पंछी को पिंजरे से आजाद कर दिया हो |

पुर्वी ने पहले दिन से लेकर आज तक की सभी बातें बिस्तार से रमा और श्याम से कह डालीं उसने माधवी के गहने गिरवीं रखे जाने की बात भी कहकर मानो जैसे अपने सिर से एक बोझ हल्का कर लिया हो |श्याम पुर्वी को कहता है कि कोई बात नहीं बेटा अब सब ठीक हो जाएगा ,अब तुम किचन में चलो मैं राशन का इंतजाम करता हूँ |पुर्वी वहाँ से चली जाती है |श्याम रमा से कहता है कि हमारी बहूएं मन की अच्छी हैं लेकिन अभी भी इन्हैं ये अहसास नहीं हुआ है की सारी परेशानी का कारण वो स्वयं हैं जो स्त्री अपने  घर की आमदनी के अनुसार खर्च नहीं करती वहाँ परेशानियाँ अपने आप चली आती हैं खैर जल्द ही इन्हैं ये अहसास भी हो जाएगा |इतना कहकर श्याम राशन लेने चला  जाता है |(इससे आगे की कहानी अगले भाग में )

 

 

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