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पचास के बाद की पछवा हवा भाग -15

Byuser

Mar 29, 2021

श्याम अपनी पत्नी रमा के साथ जैसे ही घर के दरबाजे पर पहुंचते हैं |राम की नजर दोनों के ऊपर पड़ती है ,राम आज   गेट  की तरफ ऐसे दौड़ कर जाता है जैसे वह बचपन में पिताजी के बाहर से आने पर दौड़कर जाता था |राम को यूं गेट की तरफ दौड़ता देख हरी,पुर्वी और माधवी भी गेट  की तरफ देखकर खड़े हो जाते हैं इतने में श्याम और रमा घर के अंदर प्रवेश कर जाते हैं  |

सभी बारी -बारी दौनों के पैर छूते हैं ,श्याम और रमा चारों को ढेर सा आशीर्वाद देते हैं |सभी कई देर तक बीते 6 महीनों  के बारे में एक दूसरे से बात करते रहते हैं की इन दिनों उन्होंने क्या-क्या किया  |श्याम बहुत देर तक उनकी सारी बात बड़े ध्यान से सुन रहा था ,लेकिन जो बात वह उनके मूँह से सुनना चाहता था ,यानि महाजन के पास गिरवीं रखे माधवी के गहनों की बात ,पर वो बात  अभी तक किसी ने जाहिर नहीं की थी  हालांकि श्याम को सब पता है लेकिन वह तो  उनके मूँह से सुनना चाहता था,ना तो किसी ने उन्हें  ये बताना था और ना ही बताया गया |

राम अपने मम्मी पापा को  कहता है कि अभी आप आराम कर लो थक गए होंगे |श्याम और रमा खड़े होकर अपने कमरे की तरफ बढते है ,तभी माधवी किचन की तरफ जाती हुई  कहती है कि आप चलो मैं आपके लिए चाय लेकर आती हूँ |

रमा और श्याम के  अपने कमरे के अंदर जाने के बाद माधवी उन्हें चाय देकर आती है साथ ही राम ,पुर्वी की चाय लेकर उनके पास पहुँच जाती है |चारों मिलकर अब इस बात पर बिचार विमर्श  करते हैं की माताजी ,पिताजी को कर्ज लेने की बात बताई जाए या नहीं जहां राम  इस फ़ेवर में है कि सभी बातें  पिताजी से साफ साफ बता दी जानी चाहिए वहीं पुर्वी,हरी और माधवी चाहते हैं कि एक ठीक समय पर ही सारी बातें जाहिर की जाएँ |

दूसरे दिन राम और हरी अपने निर्धारित समय पर फैक्ट्री जाने के लिए निकलते हैं तो पुर्वी राम को कहती है की तुम्हें फैक्ट्री जाते एक महिना बीत चुका है अब अपने सेठ से कुछ पैसे लेकर आओ ,अब तो सामने बाले किराना स्टोर  से उधार मिलना भी बंद हो गया है |राम रोज रोज पैसो की डिमांड से तंग आ चुका है इसीलिए वह अब पुर्वी के पैसे मागने पर खिन्न होकर कहता है यार तुम इतने पैसों का आखिर करती क्या हो? जब देखो पैसा- पैसा चिल्लाती  रहती हो,ऐसा पहली बार था जब राम ने पुर्वी को इस तरह झड़का हो |

राम पुर्वी की बात को नजरअंदाज कर अपने पिताजी के कमरे की तरफ चला जाता है | राम और पुर्वी का ये वार्तालाप श्याम के कमरे तक स्पष्ट सुनाई आ रहा था,जब राम कमरे के अंदर पँहुचा तो श्याम ने इस बावत कुछ बात ना करना ही बेहतर समझा |राम ने अपने माता पिता के चरनस्पर्श कर फैक्टरी जाने की अनुमति मांगी ,श्याम ने राम के सिर पर हाथ फेरकर आशीर्वाद दिया उसी समय हरी भी पीछे से आकर दोनों का आशीर्वाद लेता है और दोनों भाई फैक्ट्री जाने को निकल जाते हैं |(इससे आगे की कहानी अगले भाग में )

 

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