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पचास के बाद की पछवा हवा भाग -13

Byuser

Mar 23, 2021

अभी तक आपने पढ़ा की राम और हरी की नौकरी लग चुकी है |दोनों महाजन से बार-बार  कर्जा ले रहे है |पुर्वी और माधवी के खर्च करने के ढंग अभी भी नहीं  बदले हैं | अब इससे आगे –

आज श्याम की फसल कटकर ,निकल चुकी है | उपज को मंडी लाने के लिए केहर सिंह ने ट्रक मँगवा लिए हैं | केहर सिंह हैरान हैं कि इन खेतों में इतनी पैदावार उसने पहले कभी नहीं देखी ये श्याम की मेहनत का ही फल है जो इतनी बम्पर पैदावार हुई है |

केहर सिंह मंडी में उपज को बेचकर आते हैं | श्याम और रमा पास ही बैठे हुए हैं | श्याम रमा से कहता है कि आज मुझे संतोष है कि मेरी मेहनत सफल हो गई ,खेतों में फसल अच्छी हुई है ,केहर सिंह आते हुए बीच में टोकते हैं ,कहते हैं अच्छी नहीं हुई बल्कि बम्पर हुई है या यों कहें पिछले सालों की तुलना में डबल हुई है |

केहर सिंह अपना बैग  खोलते हैं और उसमें रखे रुपयों में से आधे ,दोनों हाथों से श्याम की तरफ बढ़ाकर देने की कोशिश करते हैं लेकिन श्याम हाथ आगे नहीं बढ़ाता ,बल्कि प्रश्नवाचक निघाओं से केहर सिंह की तरफ देखता है |

केहर सिंह श्याम से कहते हैं कि ये रकम मैं तुम्हें दे रहा हूँ ये तुम्हारी मेहनत की है | मैंने गतवर्ष की अपेक्षा इस वर्ष अधिक रकम प्राप्त करने के बाद जो बचे हैं वही दे रहा हूँ | श्याम कहता है की मैं यहाँ सिर्फ तुम्हारी मदद करने आया था इस प्रकार मेरा एक रुपये पर भी हक नहीं बनता लेकिन केहर सिंह कहते हैं कि मैंने तो तभी निश्चय कर लिया था जब तुम्हें अपने साथ यंहा लेकर आया था कि मुझे प्रतिवर्ष जो उपज की रकम मिलती है ,उसे लेकर बाकी जो बचेगी वो तुम्हें दे दूंगा |

आखिर में काफी प्रयत्न के बाद केहर सिंह श्याम को मनाने में सफल हो जाते हैं और बो रकम श्याम को दे देते हैं |श्याम को जितनी रकम मिली है वह उतनी रकम अपने खेतों से चार सालों में भी नहीं कमा पाता था |श्याम अपनी पत्नी को वह पैसे दे देता है | रात को श्याम अपनी पत्नी रमा से कहता है कि रमा हमें घर से आए हुए लगभग 6 महीने हो गए हैं अब गाँव जाने का मन हो रहा है और इस रकम से मैंने जो महाजन से उधारी ली है उसे भी ब्याज समेत चुकता करना है |

सुबह को श्याम जब केहर सिंह से मिलता है तो अपने मन की बात जाहिर करते हुए कहता है कि यदि आप कहें तो अब हम गाँव चले जाएं | केहर सिंह जिस मकसद से उन्हें यंहा लाया था वो मकसद तो पूरा हो गया था लेकिन अभी भी उसे पुर्वी/माधवी की खर्चीली प्रवर्ति पर अंकुश ना लगा पाने की चिंता थी |केहर सिंह सोचते थे की थोड़े दिन ये खुद जिम्मेदारी उठायेंगी तो शायद इन्हैं एहसास हो जाए लेकिन ऐसा हो नहीं रहा था |केहर सिंह को वहाँ की पल पल की खवर मिल रही थी |

केहर सिंह से अनुमति मिलने के बाद श्याम और रमा अपने गाँव जा रहे हैं इस समय श्याम के मन में कई बिचार चल रहे हैं उसका सारा  ध्यान  इस बात पर है की महाजन के रुपये लोटने के बाद जो रुपये बचेंगे उनसे बच्चों के लिए वह क्या कर सकता है इसी उधेड़बुन में कब श्याम  गाँव  की सीमा में दाखिल हो जाता है उसे अहसास ही नहीं होता | रमा के टोके जाने पर उसकी बिचारमुद्रा टूट जाती है | (इससे आगे अगले भाग में )

 

 

 

 

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