• Fri. Sep 24th, 2021

GETREALKHABAR

E News/educational stories, poem and life style/only clean content

पचास के बाद की पछवा हवा भाग -12

Byuser

Mar 21, 2021

 

अभी  तक आपने पढ़ा की राम और हरी को नौकरी मिल जाती है दोनों घर आकर बताते हैं पुर्वी इस खुशी में मिठाई मंगाती है सब बैठकर खाते हैं | अब इससे आगे –

कहते हैं जब खुशी की थोड़ी आहट  होती है तो पीछे से परेशानी भी झांक रही होती है|  सुबह होते ही राम और श्याम फैक्टरी जाने के लिए तैयार होकर आते हैं राम सोचता है कल तो पुर्वी ने बिना नास्ता ही घर से जाने दिया था लेकिन आज तो वह खुश है अच्छा नास्ता मिलेगा यही सोचकर नासते की टेबल पर आ जाता है उसी समय हरी भी नासते की टेबल पर पहुंचता  है | दोनों के लिए पुर्वी नास्ता लेकर आती है | दोनों नास्ता कर चुके हैं और बाहर निकलने की तैयारी कर ही रहे हैं की पुर्वी कहती है की घर में आज शाम को बनाने के लिए कुछ भी नहीं है शाम को लौटते हुए अपने सेठ से कुछ अड्वान्स लेकर आना ताकि मार्केट से समान लाया जा सके |

दोनों घर से बाहर आते हैं राम हरी को कहता है कि भाई सेठ तो अड्वान्स देने से रहा बल्कि वह तो इस महीने की तनखा भी नहीं देगा तो दो महीने का घर का खर्च केसे चलेगा हमें जाते हुए महाजन के घर होकर निकलना चाहिए और उससे कुछ और कर्ज ले लेना चाहिए,जब तनखा मिलेगी तो लौटा देंगे  |

दोनों महाजन के घर की तरफ बढते हैं ,महाजन घर पर ही मिल जाता है दोनों अपनी नौकरी की बात बताते हैं साथ ही कुछ और रुपए उधार लेने का अनुरोध करते हैं |महाजन रकम देने की हामी तो भर देता है लेकिन इसके एवज में कुछ रहन रखने की शर्त भी रखता है, दोनो महाजन को शाम को आएंगे ,कहकर फैक्टरी की तरफ चल देते हैं |

फैक्ट्री में पहले दिन तो दोनों को अपना अपना काम जानने में ही बीत गया छुट्टी के बाद घर आकर महाजन से हुई मुलाकात और उसकी शर्त के वारे में बताते हैं ,सभी ये सोच रहे हैं कि ऐसी क्या चीज रहन रखी  जाए तभी माधवी उसके गहने गिरवीं रखने की बात कहती है |

माधवी की बात सुनकर राम,हरी  और पुर्वी उसकी तरफ देखते हैं और कोई अन्य उपाय ना होने के कारण एक मूक सहमति देते हैं माधवी अंदर  से अपने गहने लेकर आती है और रामकी तरफ बढ़ा देती है |

दोनों गहने लेकर  महाजन की तरफ चल देते हैं| राम को इस समय उस घटना का स्मरण हो जाता है जब उन दोनों की शादी भी नहीं  हुई थी ,हरी बहुत ज्यादा बीमार था उसके इलाज केलिए बड़े अस्पताल में ले जाना था लेकिन पिताजी के  पास इतने रुपये नहीं थे तब माताजी ने अपने गहने उनको देते हुआ कहा था की ये ले जाओ और महाजन से पैसे ले आओ तब पिताजी ने कहा था की रमा ये गहने नहीं हमारी इज्जत हैं में इन्हें कैसे लेकर जाऊँ तब माताजी ने कहा था हमारा सारा संसार इन बच्चों में है तब ना चाहते हुए भी पिताजी को वे गहने लेने पड़े थे उस समय में भी पिताजी के साथ महाजन के घर गया था आज वही घटना जैसे उसके द्वारा दोहराई जा रही है |

महाजन चीज को निरख परखने के बाद एक निर्धारित रकम राम को पकडा देता है | दोनों भाई रकम लेकर घर आ जाते हैं आज शाम का खाना बाहर से मंगाकर खाते हैं और वही वे फिक्री का आलम फिर वही मौज मस्ती  | अगले भाग में अब हम पुर्वी के गाँव में चलेंगे जहां श्याम की फसल पककर तैयार है (तो पढ़ते रहिए और अगले भाग की प्रतीक्षा कीजिए )

Leave a Reply