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पचास के बाद की पछवा हवा भाग -10

Byuser

Mar 19, 2021

अब तक आपने पढ़ा पूर्वी और माधवी महाजन से पैसे मिलने के बाद मार्किट जाती हैं दोनों निर्धारित करती हैं की इस बार  वे कोई फिजूलखर्ची नहीं करेंगी लेकिन वे अपने आप पर कंट्रोल नहीं कर  पाती और एक रेस्त्रां में जाती हैं, और काफी पैसे खर्च कर घर आती हैं अब आगे –

राम और हरी का जॉब के लिए तलाशी अभियान –

कैलेंडर में लगी तारीख रोज बदल रही हैं नहीं बदला है तो राम और हरी का प्रतिदिन सुबह नाश्ते के बाद नौकरी की तलाश करना और इनके साथ पूर्वी और माधवी का बाजार में अनावश्यक खरीददारी करना और ये सिलसिला चलते हुए दो महीने बीत चुके हैं महाजन से मिले पैसे भी ठिकाने लगने जा रहे हैं ऐसे में पूर्वी और माधवी निश्चय करती हैं की वह दोनों अपने अपने पति से कड़ाई के साथ काम ढूढ़ने और करने के लिए कहेंगी | प्रतिदिन की तरह राम और हरी मुँह लटकाये घर में प्रवेश करते हैं पूर्वी दोनों पर कटाक्ष करते हुए कहती है कि आइये जनाब काम करके थक गए होंगे  ,माधवी जरा  इनकी सेवा पानी तो करो दोनों के मुंह से एक शब्द नहीं निकल रहा है और भी न जाने कितनी बातें दोनों अपने पतियों से कहती हैं और लास्ट में स्पष्ट तौर पर कहती है की यदि कल कुछ कमा कर नहीं लाये तो न तो खाने को मिलेगा न ही घर में आने की जरुरत है |

राम और हरी को अपने माता पिता की याद आई

शाम की कहा सुनी के बाद दोनों अपने अपने कमरे में चले जाते हैं आज उन्होंने रात  का खाना भी नहीं खाया है | इधर पूर्वी और माधवी भी उन्हें मनाने के मूड में नहीं है दोनों स्वयं खाना खाते हुए कहती हैं की किसी को अगर नहीं खाना है तो मत खाओ हम तो पुरे दिन घर का काम करती हैं, पुरे दिन बाहर सैर सपाटे नहीं करती और रसोई का काम ख़त्म कर अपने अपने कमरे में जाकर सो जाती हैं शादी के बाद ये पहला मौका है जब कोई एक दूसरे से बात किये बगैर चुपचाप सो रहा है |  कुछ समय के बाद ही पूर्वी और माधवी सो जाती हैं लेकिन राम और हरी की आँखों में आज नींद नहीं है दोनों को अपने माता पिता की याद आ रही है ये सोचकर आज उनकी आँखों से आंसू आ रहे हैं की वे कितने कष्ट में थे और हमने उनकी परेशानी समझने की चेष्टा भी नहीं की हमारे लिए कितना प्यार था उनमें और न जाने कितनी बातें याद करते करते कब उनकी आँख लग गई पता ही नहीं चला |

राम और हरी से उनकी पत्नियों का झगड़ा

आज पहली बार घर में इतनी शांति है की यदि सुई भी गिरे तो उसकी भी आबाज आये ,लेकिन ये शांति तूफान से पहले की शांति है राम और हरी प्रतिदिन की तरह सुबह उठते हैं जबकि पूर्वी और माधवी पहले ही उठकर रूटीन के काम निबटा रही हैं उन्हें काम करते देख राम हरी के कमरे की तरफ बढ़ता है दोनों एक दूसरे को देखते हैं दोनों की आँखे बता रही हैं कि दोनों रोये हैं वे एक दूसरे से अपना दुःख जाहिर नहीं होने दे रहे हैं दोनों एक दूसरे से प्यार भी बहुत करते हैं बहुत देर चुप रहने के बाद राम ही अपनी चुप्पी तोड़ते हुए हरी को कहता है कि भाई रात में पूर्वी और माधवी ने गुस्से में जो भी कहा है उसका बुरा मत मानना | आज हम जरूर कोई ना कोई काम अबश्य तलाश कर  लेंगे इस तरह आपस में  बात कर दोनों तैयार होकर नाश्ते की टेबल पर आबाज़ लगाते हैं की जल्दी से नाश्ता लेकर आओ हमें फिर काम की तलाश में जाना है इतना सुनना था की पहले से ही जाली भुनी बैठी दोनों बहनें राम और हरी को अनाप शनाप सुनाती  हुई कहती हैं की जब तक काम करके कमा कर  नहीं लाओगे तब तक खाना  तो क्या पानी भी नहीं मिलेगा | दोनों घर से बाहर निकल जाते हैं | ( इससे आगे की कहानी अगले भाग में )

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