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पचास के बाद की पछवा हवा भाग 6

Byuser

Mar 15, 2021

अभी तक आपने पढ़ा श्याम केहर सिंह के खेतों में ट्रैक्टर लेकर जुताई करने जाता है अब आगे –

    खेतों मे ट्रैक्टर से जुताई करने के बाद श्याम निर्धारित समय पर फसल की बूबाई कराता है उसने खेतों को इस तरह से तैयार किया है कि जब बीजों के नन्हें अंकुर निकलते हैं तो ऐसा लग रहा है मानो किसी ने उन्हें कहीं से लाकर एक लाइन में एक अंतराल पर आके रोप दिया हो, श्याम प्रतिदिन मेहनत के साथ अपने कार्य में लगा है उसे पता है कब खेतों को पानी  देना है कब खाद उसको एक धुन लगी है की इलाके में सबसे अच्छी फसल वही लेगा |

      इधर श्याम के बेटे और उनकी पत्नियाँ, रमा और श्याम के जाने के बाद इस तरह खुश हैं जैसे पिंजरे में बंद पंछी को किसी ने आजाद कर दिया हो लेकिन ये आजादी चंद दिन में ही फुर्र होने लगी जब तक श्याम का लाया राशन पानी चला तब तक किसी को ये चिंता ही नहीं थी कि आगे भी जीवन जीने के लिए वो सब कुछ चाहिए जो अभी तक उनको बिन मांगे मिल रहा था |

       आज चारों बैठकर ये बिचार कर रहे हैं की आगे किस प्रकार काम करें ताकि आराम से परिवार का खर्चा भी चल जाए और कोई परेशानी भी ना उठानी पड़े इसी कड़ी में दोनों बहनें पुर्बी और माधवी राम और हरी को कहती हें की वह अब खेती करें और घर की जरूरत पूरी करें यही उनकी जिम्मेदारी है लेकिन राम और हरी जानते थे की वे खेती का काम नहीं कर सकेंगे वो सोचने लगते हैं की पिताजी कितनी वार कहते थे कि राम और हरी बेटा कभी कभार खेतों में मेरे साथ भी चला करो थोड़ी मेरी मदद भी हो जाएगी और तुम्हें भी कुछ सीखने को मिलेगा लेकिन हम दोनों यह कहकर टाल देते थे कि पिताजी हमें कौन सी  खेती करनी है हम तो किसी ऑफिस में ही काम करेंगे आज ना तो उनके पास कोई नौकरी थी ना ही खेती करने का अनुभव इसीलिए दोनों ने बिचार किया की जमीन को ठेके पर उठाया जाए इससे नकद पेसे भी मिल जाएंगे और कुछ काम भी नहीं करना पड़ेगा ऐसा बिचार कर वो उसी महाजन के पास जाते हैं और एक निश्चित रकम लेकर एक फसल के लिए जमीन ठेके पर दे देते हैं |

       राम और हरी सारी रकम लाकर पूर्वी को दे देते हैं और कहते हैं की जब तक वो इसी रकम से घर खर्चा चलाएं जब तक पुन : जमीन उठाने का समय होता है दोनों कहती हैं ठीक है पर अभी तो बाजार जाना पड़ेगा घर में कुछ भी नहीं बचा है दोनों बहनें समान लेने बाहर निकलती हैं बाजार में नई नई चीजें देखती हैं और बिना जरूरत का समान भी खरीदकर घर आ जाती हैं और ये सिलसिला तब तक जारी रहता है जब तक ठेके के लाए पैसे खत्म नहीं हो जाते यानि जो पैसे उन्हें 6 महीने चलाने थे वो अपनी फिजूलखर्ची के कारण दोनों बहनें एक महीने के अंदर खर्च लेती हैं इससे आगे की कहानी जानने के लिए अगले भाग का इंतजार करें ( इस कहानी में आगे और भी कई रोमांचक घटनाक्रम हैं इसके अलावा हम आगे कुछ लोक कहावतों पर आधारित कहानी भी लेकर आएंगे जो रुचिकर तो होगी ही साथ में शिक्षाप्रद भी होंगी )

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