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पचास के बाद की पछवा हवा भाग -3

Byuser

Mar 11, 2021

 

अब तक आप पढ़ चुके हैं कि श्याम के दोनों बेटे जमीन बेचे जाने को लेकर श्याम को भला  बुरा कहते हैं लेकिन श्याम मौन रहता है और इधर पुर्बी और माधवी के माता पिता को जानकारी मिलती है कि उनके रिस्तेदार परेशानी में हैं तो वह श्याम से मिलने उसके गाँव  आते हैं अब इससे आगे –
राम और हरी के ससुर केहर सिंह और सास जया गेट के आगे खड़े होते हैं तभी माधवी की नजर अपने पिता पर पड़ती है बो पुर्बी को आबाज़ देकर कहती है पिताजी आए हैं और दरबाजे की तरफ़ आगे बढ़ती है आगे जाती है तो देखती है पिताजी के पीछे माँ भी है बह पिताजी के हाथ से थैला लेकर अंदर आने को कहती है इतने मैं पूर्वी अपने पिताजी और माँ के लिए पानी लेकर आ जाती है |
केहर सिंह चारों तरफ़ नजर घुमाते हुए राम और हरी से कहते हैं की श्याम कहीं नजर नहीं आ रहे हैं राम कुछ कहने बाला ही होता है उससे पूर्ब ही पुर्बी कहती है यूं ही घूमते रहते है थोड़ी देर मैं आ जाएंगे इतने आप अन्दर कमरे मैं चलकर आराम करो थक गए होंगे चारों कमरे के अंदर आते हैं पीछे से राम और श्याम भी अंदर आ जाते हैं |
माधवी चाय बनाने रसोई में आती है तो रमा भी उसके पीछे रसोई में आ जाती है रमा माधवी को कहती है कि बह हरी को बुलाकर दुकान से बिस्किट नमकीन मंगा  ले ,लेकिन माधवी अपनी सास को उल्टा जबाब देती है की घर में कुछ छोड़ा हो तो ही दुकान से कुछ आएगा ,रमा चुप रह जाती है और अपने कमरे मैं चली जाती है |
इधर पुर्बी रोते हुए अपनी माँ से लिपटकर कहती है कि माँ हम यहाँ बहुत दुखी हैं ना तो हमें यहाँ खाने को ही ढ़ंग से मिलता है ना ही पहनने को ,माँ प्रश्न भरी नजरों से राम और श्याम की तरफ़ देखती है तभी चाय लेकर माधवी अंदर आती है और पुर्बी की हाँ में हाँ मिलाते हुए कहती है की माँ इनकी  तरफ़ क्या देखती हो ये सब दिन तो इनके पिताजी की वजह से आए हैं पता नहीं क्या करते हैं सब बर्बाद कर दिया है अब तो जमीन बेचने की नौबत आ गई है पूर्वी के माता पिता सब जानते थे लेकिन वो ये जाहिर नहीं होने देना चाहते थे कि इस बारे में उन्हें कुछ पता है |
केहर सिंह राम और हरी को कहते हैं कि वे अपने पिताजी को बुलाकर लाएं हम यहाँ ज्यादा समय नहीं रुकेंगे  जया चाय पीकर रमा के कमरे की तरफ़ जाती है इधर दोनों बहनें अपने पिताजी से कहती हैं की पिताजी हमें यहाँ से ले चलों आपने हमें कहाँ इन भिकमंगों के घर में शादी करके भेज दिया केहर सिंह जो बहुत देर से चुपचाप दोनों की बात सुने जा रहे थे इस वार चुप ना रह सके और बोले बेटी जब मैंने तुम्हारी शादी इस घर में की थी तब इनकी माली हालत हमसे भी अच्छी थी आज जो हालात हैं मुझे ये तो पता नहीं इसका क्या कारण हैं लेकिन इसका कारण श्याम तो कतई नहीं हो सकता जहां तक सवाल तुम्हें साथ ले चलने का है तो शादी के बाद ससुराल ही अब तुम्हारा अपना घर है |

श्याम को राम और हरी जब बताते हैं की केहर सिंह आए हैं तो वह उनके साथ घर की तरफ़ चल देता है घर पहुचने पर सीधा केहर सिंह के पास जाता है श्याम को आता देख माधवी और पूर्वी कमरे से उठकर चल देती हैं श्याम और केहर सिंह गले मिलते हैं श्याम की दुर्दशा देखकर केहर सिंह बहुत दुखी होतें हैं लेकिन प्रकट में वह मुस्कराते हैं और श्याम से कहते हैं कि वह और उसकी पत्नी रमा को अपने साथ लेने के लिए आए हैं वे कहते हैं की उनकी जमीन जिस पर बह बटाई पर खेती कराते थे उसको अब खुद करने की सोच रहे हैं क्योंकि मुझे खेती करनी नहीं आती है इसलिए आप दोनों कुछ समय मुझे खेती के बारे में वहाँ रहकर मदद करो |
श्याम उनके आग्रह को टाल नहीं पाता है और साथ जाने की हामी भर देता है और रमा को इसकी जानकारी देने अपने कमरे की तरफ़ बढ़ता है ससुर को कमरे से बाहर निकलते देख पुर्बी और माधवी पुन : कमरे मैं आती हैं और अपने पिताजी से श्याम पर हुए कर्जे को उतारने के लिए मदद करने को कहती हैं तब केहर सिंह कहता है की वो इस कर्जे को उतरबा देगा लेकिन फिर कर्ज होगा उसका क्या ?पूर्वी कहती है ये सब ससुर जी की वजह से हुआ है
तब केहर सिंह अपनी बेटी को कहते हैं की अच्छा ठीक है वो श्याम और रमा को अपने साथ ले जाएंगे तब तो तुम दोनों और तुम्हारे पति मिलकर अपना घर संभाल लोगे पिताजी की बात सुनकर दोनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहता और दोनों आने वाली आजादी को महसूस कर बिचारों में उड़ने लगती हैं I
श्याम और रमा केहर सिंह और उनकी पत्नी के साथ घर से चलते हैं आज उन्हें ऐसा लग रहा है मानो वो इस घर के मेहमान थे और आज यहाँ से वो बिदा होकर जा रहे हों उनका मन भारी हो जाता है लेकिन चेहरे पर कठोरता ही दिखाई देती है वे चारों आगे बढते हैं इससे आगे की कहानी आप अगले भाग में पढ़ेंगे

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