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पचास के बाद की पछवा हवा

Byuser

Mar 7, 2021

           रोज की भांति श्याम की पत्नी रमा ने अपने पति को खाना देते हुए कहा सुनो जी अब आप थोड़ा देर से खेतों में जाया करो अंधेरे में कहीं गिर गिरा पड़े तो मुसीबत बढ़ जाएगी अब आपका शरीर पहले जैसा तो रहा नहीं है आँखों से भी कम दिखाई देने लगा है श्याम ने खाने की पोटली और लस्सी की बोटल लेते हुए कहा अभी इतना बूढ़ा भी नहीं हुआ हूँ जो तू इतना परेशान हो रही है इतना कहकर वह खेतों में काम करने चला गया |
सुबह से दोपहर हो चली थी काम करते हुए,शरीर भी थकने लगा था उसने सोचा अब खाना खा लेता हूँ थोड़ा आराम भी मिल जाएगा ये सोचकर वह नीम के पेड़ के नीचे जहां उसकी खाने की पोटली राखी थी आ गया पोटली खोली तो पत्नी ने सूखे आलू की तरकारी के साथ अलग से एक छोटी कटोरी में मखखन भी रखा था ,उसने मन ही मन बड़बड़ाते हुए कहा की रमा मेरा कितना ध्यान करती है अचानक उसे पत्नी की सुबह की बात याद हो आई उसने अपने शरीर पर नजर डालते हुए आगे खेतों पर नजर डाली उसने सोचा ये गेहूं की फसल एक हफ्ते पहले तो हरी भरी इठला रही थी एक हफ्ते की पछवा ने इसे सुखा दिया अबसे पहले वह अपनी पकी फसल को देखकर खुश हो रहा था वो ही क्या कोई भी किसान अपनी पकी फसल को देखकर खुश ही होता है महीनों की मेहनत के वाद घर में दाने आते हैं लेकिन आज उसे उसी फसल को देखकर पीड़ा हो रही थी कि यह इतनी जल्दी क्यों पक गई इस समय उसका मन फसल से अपने शरीर की तुलना कर रहा था इन्ही ख्यालों में वह पिछले 30 वर्षों को याद करने लगा जब उसकी और रमा की शादी हुई तव श्याम के माता पिता जिंदा थे उनका परिवार इतना सम्पन्न नहीं था फिर भी श्याम के पिता ने अपने इकलोते बेटे की शादी बड़ी धूम धाम से की थी श्याम और श्याम की पत्नि रमा दोनों एक दूसरे को पाकर खुश थे श्याम ने मेट्रिक की पढ़ाई पूरी कर ली थी और वह अब गाँव से दूर स्कूल जाने की तैयारी कर रहा था लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था अचानक उसकी माँ का स्वर्गवास हो गया श्याम अपनी माँ से बहुत प्यार करता था वो बहुत दुखी था लेकिन उसकी पत्नी ने ऐसे समय घर की सारी जिम्मेवारी अच्छे से सभालकर श्याम के दुख को कम करने में भरपूर सहयोग दिया लेकिन भरसक प्रयास के वाबजुद वे दोनों पिताजी की पीड़ा को कम नहीं कर पा रहे थे वे अंदर ही अंदर टूटते जा रहे थे जबकि श्याम और उसकी पत्नी उनका बहुत अच्छे से ख्याल रखते थे उसके वाबजुद  भी एक वर्ष के अंदर ही वे  स्वर्गधाम सिधार गए अब सारी जिम्मेवारी श्याम के ऊपर आ गई पता चला श्याम के पिताजी ने गाँव से उसकी शादी के दौरान कुछ कर्जा भी ले लिया था जिसे मागने भी लोग आने लगे श्याम परेशान रहने लगा तब श्याम की पत्नी ने उसे समझाया और पढ़ाई छोड़कर खेती करने की सलाह दी श्याम की मेहनत से फसल अच्छी हुई और एक दो वर्षों में ही सर से कर्ज उतर गया इसी बीच उनके घर में दो बेटों का जन्म हुआ दोनों ने मिलकर बड़े का नाम राम और छोटे का हरी रखा राम और हरी को अच्छे स्कूल में एडमिशन दिलाने के लिए श्याम खूब मेहनत करता समय के साथ बच्चे बड़े होने लगे थे दोनों बच्चे पढ़ने में होशियार थे हमेशा प्रथम आते श्याम की मेहनत से घर के हालत भी बेहतर होने लगे थे इसे देखकर राम और हरी के रिस्ते भी आने लगे , शुभ समय में एक ही घर में दो सगी बहनों के साथ दोनों का रिश्ता तय हो गया कुछ समय बाद दोनों की शादी भी हो गई बस यहीं से उनके परिवार में परेशानी का दौर शुरू हो गया दोनों बच्चों की पत्नियाँ बहुत खर्चीली थी खर्चे बढ़ने से श्याम की माली हालत खराब होने लगी उधर बच्चों की कॉलेज की पढ़ाई का खर्चा दिन दिन बढ़ता जा रहा था श्याम इन खर्चों को पूरा करने के लिए दूसरों के खेतों में भी काम करने लगा परेशान रहने के कारण उसका स्वास्थ्य भी गिरने लगा , फिर भी उसे इस बात की चिंता रहती कि कैसे सभी की जरूरतें पूरी की जाएं जरूरतें पूरी ना होने पर घर में क्लेश होता इसका असर राम और हरी की पढ़ाई पर भी पड़ा और दोनों कॉलेज में पहली वार फेल हो कर घर बैठ चुके थे श्याम अपने बच्चों को रोज समझाता निराशा से निकालने की कोशिश करता लेकिन दोनों का मन ना तो अब पढ़ने में लग रहा था ना ही वह खेती के काम में पिताजी की  मदद ही करते रात – दिन सोते रहते इधर श्याम का शरीर उस फसल की तरह तेजी से सूखता जा रहा था जैसे पच्छवा हवा कुछ ही समय में हरी फसल को भी सुखा देती है कहानी अभी जारी है कहानी का अंत जानने के लिए अगली कहानी का इंतजार करें | कहानी कैसी लगी प्लीज कमेन्ट जरूर करें | ( अनिल राघव )




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