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पचास के बाद की पछवा हवा -अंतिम भाग

Byuser

May 24, 2021

अभी तक आपने पढ़ा  पुर्वी अपने किये कार्यों से बहुत दुखी है वह मन ही मन निर्णय लेती है कि आगे से वह पिताजीके बताए रास्ते पर ही चलेगी राम पुर्वी को बताता है कि हरी ने उसकी नौकरी भी बहाल करवा दी है दोनों घर जाने का प्लान बनाते हैं – अब आगे

आज सुबह ही राम और पुर्वी घर जाने के लिए निकल पड़ते हैं पुर्वी राम से कहती है क्या माताजी पिताजी हमें माफ कर देंगे राम कहता है पुर्वी माता पिता चाहे कैसे भी हों अपनी संतान से बीमुख नहीं होते और हमारे माता पिता तो इतने अच्छे हैं कि कुछ कहा ही नहीं जा सकता |

दोनों घर की चौखट पर आकर ठिटक जाते हैं लेकिन हरी की नजर तो सुबह से ही दरवाजे पर लगी हुई थी वो तुरंत दौड़कर उन्हें अंदर लेकर आता है और तीनों सीधे पिताजी के रूम की तरफ बढ़ जाते हैं आते हुए माधवी की नजर भी राम और पुर्वी पर पड़ जाती है वह भी उनके पीछे पिताजी के रूम की तरफ चल देती है |हरी बाहर से ही आबाज लगाता है पिताजी देखो कौन आए हैं और कमरे के अंदर दाखिल हो जाते हैं राम और पुर्वी सीधे पिताजी के पैर पकड़कर माफी मांगने लगते है दोनों की आँखों से झर झर आँसू वह रहे है श्याम भी अपनी आँखों के आंसुओं को रोक नहीं पाया और राम को हाथ पकड़कर उठा लिया और गले से चुपका लिया इतना भाबुक द्रश्य है कि इस द्रश्य को इमेजन कर लिखते हुए मेरी आंखे भी नम हो चली हैं इधर पुर्वी अपनी सास के गले लगकर अपने किये की माफी मांग रही है दोनों ही रो रही हैं ,रमा पुर्वी को चुप करने का भरसक प्रयास कर रही है |

थोड़ी देर में जब राम और पुर्वी शांत होते हैं तो  श्याम अपने परिवार को बैठने  के लिए कहता है और कहता है बच्चों झाड़ू जिसको हम लक्ष्मी भी कहते हैं को जब बाजार से लेकर आते हैं और उसका इस्तेमाल करते हैं तो कभी-कभी झाड़ू सही से ना बंधी होने पर  उसमें से सींक निकलती रहती हैं और धीरे -धीरे वो सारी झाड़ू खत्म हो जाती है लेकिन उसी झाड़ू को जरूरत पड़ने पर कसते रहें ,तो वो खत्म नहीं होती उसी तरह परिवार के मुखिया को जरूरत पड़ने पर सींक रूपी परिवार के सदस्य को कसना पड़ता है जिससे परिवार बिखरे नहीं पर कभी -कभी लाख प्रयत्न के बाद भी हालत बिगड़ जाते हैं उस समय  बच्चों को दिए संस्कार हमेशा काम आते हैं जैसे तुम्हें थोड़ी ठोकर लगते ही अपने परिवार की याद आई , अपनी गलती का अहसास हुआ |पुर्वी बेटा तुम्हारे अंदर बहुत सी अच्छाइयाँ हैं लेकिन सबसे बड़ी कमी आमदनी और खर्च का संतुलन नहीं बना पाना  है खैर आगे से ख्याल रखना माधवी तुमसे छोटी है लेकिन इसके बिचार बहुत ऊंचे हैं मुझे इस पर बहुत गर्व है आगे में चाहता हूँ माधवी की तरह ही में पुर्वी पर भी गर्व कर संकू पुर्वी ने सर झुकते हुए कहा पिताजी अब आगे से में आपको कोई सिकायत का मौका नहीं दूँगी |

आज इस कहानी का अंतिम भाग है श्याम का परिवार हंसी खुशी रह रहा है ये एक काल्पनिक कहानी थी लेकिन इस तरह की कहानियाँ घर घर में हो रही हैं फर्क इतना है कि श्याम के परिवार की तरह सभी का हॅप्पी एन्डिंग नहीं होता इसलिए हर कहानी एक शिक्षा देकर जाती है इस कहानी से भी हमें कुछ शिक्षा मिलती है जो इस प्रकार है |

01- आमदनी और खर्च में संतुलन बनाए रखें |

02- परिवार के खिलाफ कोई सदस्य किसी दूसरे को भड़काता है तो सभी के साथ बैठकर उस पर चर्चा करें |

03- अपने से ज्यादा परिवार के दूसरे सदस्यों का ख्याल करें |

04- बँधा परिवार की अहमियत को समंझे |

कहानी लिखते में कुछ गलतियाँ भी हुई होंगी उन्हें नजरअंदाज करते हुए कुछ अच्छा हो उसका आनंद लें |

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