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बेरोजगारी ,तनाब और परिवार

Byuser

Sep 1, 2021

दोस्तों जैसा कि आप जानते हैं कि मध्यम वर्ग या निम्न वर्ग दोनों को ही अपनी रोजी – रोटी के लिए प्रतिदिन मशक्कत करनी पड़ती है | कई युवा पढ़-लिखकर भी अपने मन मुताविक रोजगार पाने में असफल रहते हैं | हालत तब और बिगड़ जाते हैं जब परिवार की तरफ से निरन्तर निकम्मा होने का ठप्पा लगाया जाता है | इस लेख में हम उन सभी पहलूओं को आसान शब्दों में आपको बताएँगे जिससे आप एक अच्छा रोजगार पा संकें और अपने परिवार को आर्थिक मदद कर सकें |

बढ़ती बेरोजगारी के कारण

आज बेरोजगारी की समस्या दिन- प्रतिदिन बढ़ती जा रही है | जिस तरह से जनसंख्या बढ़ रही उस तरह से नए रोजगार सृजन नहीं हो पा रहे हैं | सरकारी नौकरियाों की एक सिमित संख्या है वह भी उन लोगों को हासिल है जो एक जूनून के साथ इसे पाने के लिए मेहनत कर प्रतियोगी परीक्षाओं में अब्बल नंबर लाने का प्रयास करते हैं या उन लोगों को हासिल है जो आरक्षित बर्ग से आते हैं | इन सबके वावजूद भी बहुत से युवा टेलेंटिड होने के वावजूद मन मुताविक नौकरी पाने में नाकामयाब रहते हैं | अब यदि प्राइवेट सेक्टर की बात करें तो वहां की स्थति भी अच्छी नहीं है | कुछ जगह ठेकेदारी प्रथा और कुछ नौकरियों में प्रतिस्पर्धा होने के कारण कम्पनीयां इनका लाभ उठाती हैं और अपने कर्मचारियों का शोषण कर काम के मुताबिक सेलरी नहीं देती हैं |

स्किल (हुनर ) की कमी

आज से 20 वर्ष पहले की तुलना करें तो रोजगार की इतनी समस्या नहीं थी | इसका मतलब यह बिलकुल भी नहीं है कि उस समय ज्यादा रोजगार थे और अब कम हो गए हैं दरअसल इसका कारण यदि गहराई से जानने की कोशिस की जाए तो हमारी शिक्षा है जिसका स्तर पिछले कुछ वर्षों में इस तरह गिरा है कि हम क्षात्रों को उच्च शिक्षा के प्रमाण पत्र (वो भी अच्छे मार्क्स के साथ) तो दे पा रहे हैं लेकिन उनमें काबलियत बिकसित नहीं कर पा रहे हैं | हम उन्हें वही पढ़ा रहे हैं जिनसे मार्क्स अच्छे आएं | पहले के समय क्षात्रों के मार्क्स बहुत कम आते थे | स्नातक की पढाई तो कम क्षात्र ही कर पाते थे इसका यह मतलब भी नहीं है कि पहले क्षात्र निष्ठा के साथ पढाई नहीं करते थे | सच तो ये है कि उस समय एग्जाम बहुत सख्त होते थे | जो होनहार क्षात्र थे वे ही अपनी एजुकेशन पूरी कर पाते थे जिसके कारण जॉब पाने में उन्हें कम प्रतिस्पर्धा मिलती थी | जो क्षात्र ज्यादा नहीं पढ़ पाते थे वे अपनी योग्यता अनुसार दूसरे कामों में दक्षता हासिल कर रोजगार पाने में कामयाबी हासिल करते थे | लेकिन आज के समय ज्यादातर क्षात्र स्नातक हैं और उन्हें स्किल वाले कार्य करने में संकोच होता है जिससे समस्या ज्यादा बदतर हो रही है |

परिवार का दायित्व

वे बेरोजगार युवा जिन्होंने अपनी एजुकेशन पूरी कर ली है और रोजगार की तलाश में या बार- बार प्रतियोगी परीक्षाओं में असफल हो रहे हैं उनमें निराशा बढ़ती चली जाती है | कई परिवार ऐसे समय उन्हें प्रोत्साहित करने की बजाय कटाक्ष कर निकम्मा कहने लगते है जिससे उन युबाओ में यह धारणा बिकसित होने लगती है कि बाकई वह किसी काबिल नहीं है | यह समय बड़ा नाजुक होता है , बचपन से लेकर युबा होने तक सभी को परिवार का साथ कामयावी हो या नाकामयाबी दोनों में ही बखूबी मिलता है लेकिन जब उसे बताया जाता है कि अब उसे कोई जॉब हासिल कर परिवार की जिम्मेदारी को पूरा करना है उस समय उसकी बार- बार नाकामयाबी को परिवार झेल नहीं पाता है और न चाहते हुए भी निराशा भरे शब्दों से अलंकृत कर नाकारा का ठप्पा लगा दिया जाता है | परिवार को इस समय भी धैर्य के साथ उसे कामयाब करने के लिए प्रयत्न करना चाहिए | किसी तरह से जॉब पाने में लगातार नाकामयाबी मिल रही हो तो उसे उसकी रूचि अनुसार स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना चाहिए | हर हालत में कामयाब होने तक अपना भरपूर सहयोग देते रहना चाहिये |

कैसे हासिल करें कामयाबी

वे युवा जो अपनी ऐजुकेशन पूरी कर चुके हैं या वे जो प्रयास के वावजूद अपनी एजुकेशन पूरी कर पाने में असफल रहे हों और रोजगार की तलाश में हैं उनके लिए सबसे अहम पहलू ये है कि वे अपनी क्षमता पर पूरा भरोसा रखें |अपने परिवार की आर्थिक स्थति के अनुसार अपनी योजना बनायें | बहुत से ऐसे परिवार हैं जो सब कुछ दाव पर लगाकर और अपनी इच्छाओं का दमन कर अपने बच्चों की एजुकेशन को पूरा कराते हैं और अपेक्षा करते हैं कि ऐजुकेशन के बाद उनका बच्चा कोई अच्छी जॉब प्राप्त कर उनका सहयोग करेगा | कभी- कभी मन मुताबिक जॉब न मिलने पर हम उन जॉब्स को छोड़ते चले जाते हैं जो हमें आसानी से मिल रही होती हैं | कहने का तात्पर्य ये है कि आप जितना समय बेकार गुजारेंगे वह आपके परिवार को उतना ही बैचेन करता जायेगा | आप अपनी एजुकेशन के बाद कोई भी कार्य /जॉब छोटा हो या बड़ा शुरू करें इससे आपका अनुभव बढ़ेगा आपके खर्च का परिवार से बोझ कम होगा | आपके पास आय का साधन बनेगा उससे आप अपनी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी अथवा अपने स्किल को हासिल करने या सुधारने में उपयोग कर मनमुताबिक कामयावी हासिल कर सकते हैं | आज भारत सरकार युवाओं में स्किल डवलपमेंट करने पर बिशेष ध्यान दे रही है , इसका कारण यही है कि हमारे पास जितना हुनर होगा उतने ही ज्यादा बिकल्प होंगे | जिन युवाओं के परिवार की आर्थिक स्थति अच्छी है ,वे स्वरोजगार पर फोकस करें जिससे वे कई और लोगों का भी रोजगार सृजन कर पाएंगे | सबसे अंतिम आप बिफलता के डर से कार्य करने से न डरें ,बल्कि जो सोचा है उसे बिना झिझक शुरू करें | कामयावी जरूर मिलेगी | (नोट : यह लेख- लेखक के अनुभवों पर आधारित है कोई भी कार्य अपने बिवेक से करें )

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