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उल्लू के पठ्ठों से उजड़ता है

Byuser

Jul 14, 2021

एक बार एक हंस और हंसनी उड़ते उड़ते एक गांव पहुंचे | शाम होने के कारन दोनों ने वंही रुकने का निश्चय किया | और उन्होंने एक ठिकाना देखकर अपना डेरा जमा लिया | हँसनी  ने गांव का जायजा लिया और हंस से बोली पहले जब हम इस गांव में आये थे तो यह गांव कितना आबाद था हर वक्त इसमें चहल पहल रहती थी लेकिन अब यह उजड़ा हुआ सा लगता है |
हँसनी की बात सुनकर हंस ने चारों तरफ नजर घुमाई तो उसे भी गाँव उजड़ा नजर आया तभी उसे पास में बैठा एक उल्लू दिखाई दिया | हंस ने उल्लू को चिढ़ाते हुए कहा जिस गांव में उल्लू बस्ते हों वह गांव तो उजड़ेगा ही | उल्लू ने हंस की बात सुनी तो मन ही मन हंस को सबक सिखाने की सोची |
सुबह जब हंस और हंसनी जाने की तैयारी कर रहे थे तभी उल्लू ने आकर हंसनी के पंख पकड़ लिए | हंस ने इसका विरोध करते हुए उल्लू से हँसनी  के पंख छोड़ने का आग्रह किया लेकिन उल्लू बोला ये मेरी पत्नी है इसलिए मेरे पास रहेगी | हंस ने कहा कि ये तुम्हारी पत्नी कैसे हो सकती है इसकी शक्ल तो मुझसे मिलती है और ये मेरी ही पत्नी है | जब बात आगे बढी तो तो उल्लू बोला अब इसका फैसला पंचायत में होगा | पक्षियों की पंचायत बुलाई गई उल्लू ने पंचायत के सभी प्रमुखों को कह दिया कि फैसला मेरे खिलाफ गया तो मैं सबको उजाड़ दूंगा उसकी बात सुनकर सभी पंच डर गए |
पंचायत में हंस के बयान लिए गए तो हंस ने कहा कि हँसनी  मेरी पत्नी है ,यह मेरे साथ कल शाम को ही इस गांव में आई थी हम रात बासा लेने के लिए यहाँ ठहर गए थे | हँसनी  का रूप रंग सब मेरे से ही मिलता है ,उल्लू से नहीं ,और निश्चय ही मेरी पत्नी है |
सारे पांच जानते थे कि हँसनी उल्लू की पत्नी कदापि नहीं है ,लेकिन उन्हें भय था कि उल्लू घरों पर बैठ बैठ कर हम सबके घर उजाड़ देगा ,इसलिए उन्होंने उल्लू के पक्ष में फैसला लिया और हँसनी  उल्लू को दिलवा दी | पंचायत समाप्त हो गई |
पंचायत के निर्णय से हंस मन मारकर रह गया | बहुत दुखी होकर जब वह वहां से जाने लगा तो उल्लू ने हंस के पंख पकड़ लिए | हंस ने कहा भाई तूने मेरी पत्नी तो छीन ही ली अब तुम्हारे मन में और बाकी  क्या रह गया है | इस पर उल्लु ने कहा मैं तुम्हारी बात का उत्तर देता हूँ | तुमने हँसनी से कहा था कि गांव उल्लुओं से उजड़ता है लेकिन गांव उल्लुओं से नहीं उल्लुओं के पठ्ठों से उजड़ता है | तुमने देख लिया ये उल्लू के पठ्ठे कैसे पंचायती करते हैं | जिस गाओं में ऐसे उल्लू के पठ्ठे बसेंगे वह तो उजड़ेगा ही | बात हंस की समझ में आ गई | उल्लू ने हंस को उसकी हंसनी लौटा दी और हंस अपनी हंसनी के साथ यह सोचते हुए उड़ चला कि बास्तव में गांव उल्लुओं से नहीं ,उल्लु के पठ्ठों से उजड़ता है | 

शिक्षा :- भय में आकर जहां न्याय प्रभाबित होता हो वहां बिकास हो ही नहीं सकता |

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