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दुलत्ती मारने की आदत नहीं गई -लोक कथा

Byuser

Sep 11, 2021

बात काफी समय पुरानी है| एक नगर में एक भोला कुम्हार रहता था | वैसे तो आज भी हमारे देश में भोले लोगों की कमी नहीं है ,कई बार ऐसे भोले लोगों का पढ़े लिखे लोग फायदा उठाते हैं | इस कहानी में भी भोले कुम्हार को एक मास्टर द्वारा वेवकूफ बनाया गया | लेकिन कभी-कभी किसी को सताना भारी भी पड़ जाता है ऐसा ही एक मास्टर द्वारा कुम्हार को बेवकूफ बनाना उसे ज्यादा ही भारी पड़ा | कहानी इस प्रकार है –
कुम्हार अपने घर में मिटटी के बर्तन बनाने का काम करता है | परिवार में ले देकर वह ,उसकी पत्नी और एक गधा है | कुम्हार के घर के पास उसकी कुछ जमीन थी जिस पर उसी नगर के रहने वाले एक मास्टर ने वच्चों को पढ़ाने के लिए एक झोंपड़ी बना ली इसके एवज में वह कुम्हार को कुछ पैसे दे देता | धीरे -धीरे मास्टर के पास पढ़ने वाले बच्चों की संख्या बढ़ने लगी तो कुम्हार ने मास्टर जी से पूछा मास्टर जी तुम्हारे पास ऐसा क्या जादू है जो इतने बच्चे तुम्हें घेर कर बैठे रहते हैं | मास्टर जी ने उत्तर में जबाब दिया मैं गधों को इंसान बनाता हूँ |
मास्टर की बात सुनकर कुम्हार उस समय तो चला आया लेकिन वह रात भर सोचता रहा कि यदि मेरा गधा भी इंसान बन जाए तो मुझे सहारा मिल जायेगा इसी सोचबिचार में कब रात यूं ही निकल गई | कुम्हार सुबह के नित्य कर्म निपटाकर मास्टर के पास पंहुच गया और साथ में अपने गधे को भी ले गया | उसने मास्टरजी को कहा मास्टरजी मेरे इस गधे को भी इंसान बना दो |

कुम्हार की बात सुनकर मास्टर समझ गया कि कुम्हार बहुत भोला है | उसने इसका फायदा उठाने की सोची और कुम्हार से इसके बदले रुपये ले लिए और कहा कुछ दिनों में, मैं इसे इंसान बना दूंगा | कुम्हार गधे को मास्टर को सुपुर्त कर अपने काम में लग गया | मास्टर ने उस गधे को बेच दिया जब कुछ दिन निकले तो कुम्हार ने मास्टर से पूछा मेरा गधा इन्सान बना या नहीं मास्टर ने कहा उसे इंसान बनने शहर भेजा है कुछ ही दिनों में वह इंसान बन जायेगा | कुम्हार कुछ दिनों बाद फिर मास्टर के पास पहुंचा तो मास्टर ने कहा गधा इंसान बन गया है और वह शहर में तहसीलदार है |

अब कुम्हार को कहाँ चैन था वह अपनी पत्नी को साथ लेकर शहर की तरफ रवाना हो गया | शहर में जिससे भी तहसीलदार का पता मालूम करता वही तहसीलदार के ऑफिस का पता बता देता क्योंकि लगभग सभी को तहसीलदार के ऑफिस की जानकारी रहती है | आखिर पूछते हुए कुम्हार तहसीलदार के ऑफिस पहुँच गया | बाहर चपरासी बैठा था | कुम्हार ने बड़े रौब से पूछा मेरा गधा तहसीलदार कहाँ है | चपरासी ने सोचा शायद ये सर के घर वाले हैं तभी सर को इस तरह संबोधित कर रहे हैं तो चपरासी ने उनको ऑफिस के अंदर भेज दिया | कुम्हार और उसकी पत्नी ने सामने बैठे तहसीलदार को देखा और कुम्हार ने फुसफुसाते हुए अपनी पत्नी से कहा देखा इसके कान कितने लम्बे है यही अपना गधा है पत्नी ने भी सर हिलाकर अपने पति की हाँ में हाँ मिला दी | अब कुम्हार ने चुपचाप थैले से रस्सी निकाली और सीधा तहसीलदार की गर्दन में डाल दी इस तरह की कोई हरकत करेगा तहसीलदार को सपने में भी अनुमान नहीं था ,उन्होंने हड़बड़ाकर रस्सी निकालने की कोशिश की लेकिन जब रस्सी नहीं निकली तो उसने कुम्हार को लात मारकर अलग किया , लात पड़ते ही कुम्हार के मुँह से निकला इंसान बन गया पर दुलत्ती मारने की आदत नहीं गई | उसकी ये बात तहसीलदार ने भी सुनी तो उसे अनुमान लगाने में जरा भी देर नहीं लगी की मामला कुछ अलग है जो ये समझ रहा है |

तहसीलदार ने गले से फंदा निकाला और कुम्हार को पत्नी सहित बैठाया | तहसीलदार ने फिर कुम्हार से सारी बात बड़े प्यार से मालूम की | तहसीलदार ने मन में सोचा ये पति,पत्नी हद से ज्यादा भोले है और मास्टर ने इन्हें मुर्ख बनाया है इसलिए तहसीलदार ने मास्टर को सबक सिखाने की सोची | तहसीलदार ने कुम्हार से कहा मैं ही तुम्हारा गधा हूँ आप घर चलो ,मैं घर अपने आप आ जाऊँगा | उनके ऑफिस से बाहर निकलते ही तहसीलदार ने चपरासी को उनके पीछे घर का पता जानने भेज दिया | चपरासी ने आकर कुम्हार के घर का पता बता दिया | तहसीलदार ने अपना हुलिया थोड़ा पागलों जैसा बनाया और कुम्हार के घर आ गया | कुम्हार ने उनका हुलिया कुछ अलग देखा तो बोला ,वहां ऑफिस में तो नहाधोकर बैठा था अब कहाँ लुटलूटी लगाकर आया है | तहसीलदार ने कहा तेरे मास्टर ने मुझे इन्सान तो बना दिया लेकिन कुछ सिखाया नहीं एक मेरी दुलत्ती मारने की आदत वही की वही है | अब तुम मुझे मास्टर के पास लेकर चलो उससे कहना कि तुमने इस गधे को इंसान तो बना दिया लेकिन कुछ सिखाया ही नहीं है इसको कुछ सिखाओ जो पैसे लगेंगे दे दूंगा | कुम्हार ने तहसीलदार की बात मानते हुए उसे मास्टर के पास ले जाकर वही बात कही जो तहसीलदार ने बताई थी | मास्टर ने सोचा अब ये किसी पागल को पकड़ के ले आया है ,चलो कुम्हार से कुछ और पैसे हड़प लेता हूँ | मास्टर ने पैसे लेकर तहसीलदार को अपने पास रख लिया | कुम्हार के जाने के बाद तहसीलदार ने मास्टर को पकड़ा और लात मार-मारकर उसका बुरा हाल कर दिया | मास्टर दौड़ा -दौड़ा कुम्हार के पास गया और बोला कि भाई तुम अपने गधे को ले आओ वो तो लातों से मारता है | कुम्हार ने कहा मास्टर जी दुलत्ती न मारे यही तो सिखाना है | मास्टर बापिस आ गया और सोचा अब उस पागल से दूर रहूँगा लेकिन जैसे ही वह पहुंचा तहसीलदार ने मास्टर को फिर पकड़ा और लातों से धुन दिया | मास्टर रोता हुआ फिर कुम्हार के पास पंहुचा और बोला भाई उस पागल से मुझे बचाओ | कुम्हार ने कहा मास्टरजी मेरा गधा चाहे जैसा हो लेकिन वो पागल नहीं है |

मास्टर ने सोचा इस आफत से पीछा तभी छूट सकता है जब कुम्हार को सब सच बता दिया जाए | मास्टर ने हाथ जोड़कर माफ़ी मांगते हुए सारी बात सच बता दी और कहा मैं तुम्हारे सारे पैसे अभी लौटा देता हूँ | अब उस पागल से मुझे तुम ही बचा सकते हो | कुम्हार मास्टर की बात सुनकर बहुत दुखी हुआ, उसने जिस आदमी को अपना गधा समझा और उसके साथ दुर्व्यवहार किया वह उससे अपने किए की माफ़ी कैसे मांगेगा | उसको असमंजस की स्थति में देखकर तहसीलदार अंदर आ गए उन्होंने पीछे से उनका सारा वार्तालाप सुन लिया था उन्हें संतोष था कि मास्टर को अपने किये पर सर्मिंदगी हुई और वे उसे रास्ते पर लाने में कामयाब हुए हैं | उसके बाद उन्होंने मास्टर को अपना परिचय देते हुए ताकीद की, कि गलती से कभी किसी भोले इंसान की मासूमियत का फायदा न उठाये |

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