• Fri. Sep 24th, 2021

GETREALKHABAR

E News/educational stories, poem and life style/only clean content

निर्दोष लोगों की जान पर हँसता आतंक|

Byuser

Aug 27, 2021

काबुल में देर रात हुए धमाके में निर्दोष लोगों की जान पर हँसता आतंक उन्हें वहशी बनाता है | भारत में भी दशकों से इसी तरह निर्दोष लोग आतंक की भेंट चढ़ चुके हैं | आखिर कब तक इंसान अपनी सत्ता हासिल करने के लिए उन लोगों की कुर्वानी करता रहेगा जिनका किसी से सरोकार ही नहीं है | मानवता शर्मशार है | वे नेता भी शर्मशार होने चाहिए जो अपने हितों के लिए उस आतंक से आँखे मूंदकर ये सोचते हैं कि इसका असर हम पर नहीं पड़ेगा , हमारे देश पर नहीं पड़ेगा | वैसे तो किसी भी आतंकी का कोई धर्म नहीं होता ,लेकिन अब समय आ गया है कि एक विशेष धर्म के लोंगो को बुद्धिजीवियों को और उनके गुरुओं को ये गहराई से विचार करने की आवश्यकता है कि वे जो अपने बच्चों को तालीम दे रहे हैं वह सही है या नहीं अगर सही है तो वे इतने कट्टर क्यों हैं , वे इतने बेरहम क्यों हैं , वे इतने लालची क्यों हैं और सबसे बड़ी बात वो मानवता में बिस्वास क्यों नहीं करते | एक सवाल आमजन के मन में ये भी है कि जो उन्हें तालीम दे रहे हैं क्या वे भी तो उन्हें वही नहीं सीखा रहे जो वे कर रहे हैं अगर ऐसा है तो इसमें जितनी जल्दी सुधार किया जाए उतना ही अच्छा है | ये सिर्फ दूसरी कम्युनिटी के लिए ही खतरे का अलार्म नहीं है बल्कि इससे उनकी खुद की नस्लें भी आपस में यूं ही खून खरावे में बिस्वास कर एक दूसरे का गला काटती रहेंगी |
आज जिसको देखो वही इस तरह की घटना की कड़े शव्दों में निंदा कर अपना पल्ला झाड़ लेता है क्या शव्दों से किसी की जान को बापिस किया जा सकता है उन बच्चों का क्या दोष है कोई बता सकता है जो इस तरह की परिस्थति बन जाने से दर दर भटक रहे हैं उनके कोमल मन पर क्या बीत रही होगी क्या इसका आकलन कर सकते हैं | वे वच्चे जो अपनी आँखों के सामने अपने माता -पिता को मरते देखते हैं या वे माता पिता जो ऐसी आतंकी घटनाओं में अपने बच्चों को मरते देखते है वे किस तरह अपने आगे की जिंदगी गुजारेंगे ,सोचकर ही ह्रदय कांपने लगता है |
इन सभी घटनाओं की जिम्मेवारी उन देश के शीर्ष पर बैठे नेताओं की है जो ऐसी घटनाओं को अपने फायदे के चश्मे से देखते हैं | ये सही बक्त है जब सभी देश और उन पर शासन कर रहे शीर्ष नेता निर्भय होकर एक स्वर में एक संकल्प से ऐसे तत्वों का समूल बिनाश करने की दिशा में आगे आएं | इस संकल्प को पूरा करते समय न कोई धर्म आड़े आये ना ही कोई कमजोरी तब ही मानवता जिन्दा रह सकेगी यदि आज भी हम मौन रहे तो लोग यूं ही बहशी और दरिंदे बन निर्दोष लोगों का खून बहाते रहेंगे |

Leave a Reply