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तालिवान ने बताया चीन को सबसे बड़ा साथी – जरुरत के अनुसार बनते साझीदार

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Sep 3, 2021 ,

नई सरकार के बनने से पहले तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने चीन को अपना सबसे बड़ा साथी बताया है | बर्बादी की कगार पर खड़े अफगानिस्तान को इस समय चीन फिर खड़ा करने में मदद कर सकता है |
अफगानिस्तान में औपचारिक रूप से तालिबान की सरकार बनने जा रही है | दुनिया ने तालिवान की 20 वर्ष पहले की क्रूरता और खौफ देखा है , अब फिर तालिबान की अफगानिस्तान में वापसी हो रही है | अब इस नई सरकार की दुनिया के प्रति क्या रणनीति होगी? इसके दूसरे देशों के साथ रिश्ते कैसे रहेंगे? हर सवाल पर तालिबानी प्रवक्ता ने विस्तार से अपना पक्ष रखा |
चीन को बताया सबसे बड़ा साथी
तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने चीन को अपना सबसे बड़ा साथी बताया है | जब अफगानिस्तान बर्बादी की कगार पर खड़ा है ऐसे में अफगानिस्तान को फिर खड़ा करने की जिम्मेदारी तालिबान, चीन को सौंप सकता है | इस बारे में प्रवक्ता ने एक न्यूज पोर्टल को कहा है कि चीन हमारा सबसे महत्वपूर्ण साथी रहा है | ये हमारे लिए भी एक सुनहरा मौका है | चीन हमारे देश में निवेश कर फिर इसे खड़ा कर देगा | प्रबक्ता ने कहा* कि अफगानिस्तन के पास बड़ी तादाद में कॉपर माइन हैं, ऐसे में चीन अगर उन्हें फिर सक्रिय कर मॉर्डन बना दे, तो ये दे तो ये देश के लिए काफी फायदेमंद रहेगा | वहीं दूसरी तरफ वो चीन के हर उस प्रोजेक्ट का समर्थन कर रहा है जिसका भारत खुलकर विरोध करता है | ऐसे में आने वाले दिनों में चीन और तालिबान की साझेदारी भारत की मुसीबत का सबब बन सकती है |
भारत की बढ़ेंगी मुसीबतें
वन बेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट का भारत ने शुरुआत से ही विरोध किया है , लेकिन अब तालिबान ने उस प्रोजेक्ट को बेहतरीन बताते हुए कहा है कि चीन का ये प्रोजेक्ट अफ्रीका, एशिया और यूरोप को पोर्ट, रेल और सड़क मार्ग से जोड़ने वाला है | ऐसे में तालिबान इसे अफगानिस्तान की तरक्की के तौर पर देख रहा है | चीन की तरफ से भी तालिबान के समर्थन में बयान दिए गए हैं | चीन के मुताबिक उन्हें उम्मीद है कि तालिबान एक ऐसी सरकार देगा जहां पर आतंकियों को पनपने का मौका नहीं मिलेगा, जहां पर सिर्फ अर्थव्यवस्था को सुधारने पर जोर दिया जाएगा और सभी से अच्छे रिश्ते बनाने पर फोकस रहेगा | चीनी विदेश मंत्री ने भी कह दिया है कि वे अफगानिस्तान के निजी मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने वाले हैं | वे सिर्फ अफगान के लोगों के साथ अपनी दोस्ती निभाएंगे | अब अभी जैसी अफगानिस्तान की स्थिति है उसे देखते हुए तालिबान को चीन की जरुरत है | वहीँ उसे चीन पर जरूरत से ज्यादा निर्भर होना पड़ेगा , ऐसे में अफगानिस्तान में चीन की दखलअंदाजी बढ़ना लाजिमी है | चीन का दखल और पकिस्तान की सोच जहाँ अफगानिस्तान को नुकसान पहुँचाएगी वहीँ आने वाले दिन भारत के लिए आतंकवाद बढ़ने और कश्मीर में मुसीबत पैदा करने बाले हो सकते हैं |

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