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दोस्त ऐसे नहीं ,दोस्त तो ऐसे होते हैं |अंतिम भाग |

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Jun 24, 2021

अभी तक आपने पढ़ा राजा और मंत्री के लड़के की दोस्ती को तुड़वाने की जिम्मेवारी एक दूति को मिलती है वह एक सुंदर रूप बनाकर अपने दोस्त दाने के साथ उनकी राह में बैठ जाती है |राजा का लड़का जब उससे पूछता है तो वह कहती है ये मेरे पिताजी हैं इनका सिर यादि कोई अपनी गोद में रख ले तो ही में तुम्हारे साथ चल सकती हूँ और राजा का लड़का अपने दोस्त को उस लड़की की जगह बैठकर उस लड़की को लेकर चला जाता है आब आगे –
दाने ने जब अपनी आँखें खोली और अपना सिर एक लड़के की जांघों पर रखा पाया तो उसने क्रोध से उसकी तरफ देखा | मंत्री का लड़का उसकी लाल आँख देखकर डर गया उसकी मुंह से अचानक मामाजी नमस्ते निकल गया |दाने ने जब देखा इसने मुझे मामा कहा है तो उसका गुस्सा कुछ कम हुआ उसने लड़के से सारी कहानी सुनी |दाना बोला कैसा दोस्त था तेरा जो तुझे काल के मुंह में देकर चला गया मैं बताता हूँ कि सच्चे दोस्त कैसे होते हैं ध्यान लगाकर सुन –
एक राज्य में चार दोस्त थे एक राजा का लड़का दूसरा ब्राह्मण का तीसरा खाती का और चौथा खोजी का इनकी दोस्ती से सबसे ज्यादा परेशानी राजा को थी वह अपने लड़के को अपने इन दोस्तों से दूर करने के सारे प्रयास कर चुका था अंत में दुखी होकर उसने चारों को देश निकाला दे दिया |
चारों घूमते घूमते काफी दूर निकल गए अंधेरा होने को जा रहा था तभी उन्हें एक खोजी मिला जिसके पास ऐसी सकती थी वह कौन कहाँ है बता देता था उसके इस हुनर को देखकर खोजी के बेटे ने उसे अपना गुरु बना लिया और उसके सह चला गया | फिर आगे बढ़े तो आके खाती मिल जो उड़नखटोला बनाना जानता था कहती के बेटे ने उसे अपना गुरु बना लिया और उसके पास ही रहने लगा | अब ब्राह्मण का लड़का और राजा का लड़का आगे बढ़े तो देखा एक ब्राह्मण शमशान घाट में एक चिता से फूल चुनकर मंत्र द्वारा आदमी को जीवित कर रहा था ब्राह्मण के लड़के ने उसे अपना गुरु बना लिया और उसके साथ ह रहने लगा |
राजा का लड़का अकेला रह गया उसे कोई कार्य करना भी नहीं आता था जब अंधेरा ज्यादा हो गया तो वह एक बाग में एक पेड़ पर चढ़ गया वह रात जागकर कट रहा था जब आधी रात बीती तो उसके सामने एक कुआ था उसमें से एक सुंदर लड़की निकली जिसके पास एक मणि थी उसने मणि कुए के पास रखी और बाग में घूमने फिरने लगी घूमते हुए जब भोर होने को हुई तो वह मणि लेकर कुए के अंदर चली गई | कुछ ही समय बाद उस देश की राजकुमारी सैर करने वहाँ आती है उसकी नजर उस चमकती हुई चप्पल पर पड़ी तो उसने उसे उठवा लिया और अपने राजमहल आ गई उसने राजा यानि अपने पिताजी से जिद की कि वह इस चप्पल के साथ की चप्पल मँगवाकर दें |
राजा ने सब मंत्रियों को आदेश दिया कि वह इस चप्पल के साथ की जोड़ी लेकर आयें जो लेकर आएगा उसे इनाम दिया जाएगा |सभी मंत्रियों ने अपने – अपने आदमी काम पर लगा दिए उनमें से कुछ उसी बाग में पँहुच गए जहां राजा का लड़का था उसने सिपाहियों से पूछा आप क्या ढूंढ रहे हैं एक सिपाही ने उसे सारी बात बताई तो उसने कहा वह इस चप्पल के साथ की चप्पल लाकर दे सकता है लेकिन उन्हें कल तक इंतजार करना पड़ेगा |राजा का लड़का उसी पेड़ पर चढ़ गया और उस लड़की के कुए से निकलने का इंतजार करने लगा आधी रात बीतने के बाद उसने देखा की उस कुए से एक सर्प बाहर निकल रहा जिसके सिर पर एक मणि है उसने मणि कुए के पास छोड़ी और एक सुंदर यूबक बनकर बाग में टहलने लगा | और भोर होने पर फिर सर्प बनकर मणि लेकर बापिस कुए के अंदर चला गया |राजा का लड़का युक्ति लगाने लगा की सबसे पहले उसे मणि हासिल करनी है और उसे एक युक्ति सूझ गई वह मार्केट से एक माँद लेकर उस पर लोहे की किलों का जाल लगवाकर पेड़ पर बैठ गया रात कोजैसे ही सर्प निकला और मणि रखकर आगे बढ़ा राजा के लड़के ने वह माँद रस्सी के सहारे उस मणिके ऊपर रख दी माँद के रखते ही वहाँ अंधेरा हो गया जिससे सर्प को पता चल गया और वह वहाँ लौटकर आया तो मणि को एक माँद के नीचे पाया जैसे ही वह माँद में अपना फन मारता तो उस पर लगी कीलें उसे घायल कर देती इस तरह उस सर्प ने फन मार मारकर अपनी जान दे दी |
सर्प के मरने के बाद उसने माँद हटाकर मणि निकाली और कुए में कूद गया जैसे ही कुए में कूदा मणि के प्रभाव से पनि अलग होता गया और उसके नीचे एक महल निकला जहां सर्प की बेटी रहती थी |सर्प की बेटी ने जब देखा एक अजनबी यंहा आया है तो उसे बड़ी हैरत हुई उसने मणि हासिल करने की सारी घटना की जानकारी ली यहाँ की वे दोनों पति पत्नी की तरह रहने लगे कियोंकि राजा के लड़के के पास मणि थी इसलिए वे दोनों एक साथ बाहर आते और फिर कुए के अंदर चले जाते एक दिन सर्प  की बेटी  वह मणि लेकर अकेले ही बाहर घूमने निकली रात में कुछ सैनिक वहाँ चप्पल की तलाश में घात लगाकर बैठे थे उनमें से किसी की नजर उसके पेरों की चप्पलों पर पड़ी तो वह भी बैसी ही चप्पलें थीं जैसी उन्हें तलाश थी उन्होंने उस लड़की को पकड़ लिया और राजमहल आ गए |राजा ने उसकी चप्पलें अपनी बेटी को दे दीं और उस सर्प की बेटी की सुंदरता देखकर उसे अपनी रानी बनाना चाहा तो लड़की ने 6 महीने का समय मांग लिया और राजा से कहा कि 6 महीने तक कोई भी अजनवी दिखे तो उसे मेरे पास भोजन के लिए भेजा जाए |राजा के लड़के ने अपने दोस्तओ के बारे में उसे सब बता  रखा था |

काफी समय बीतने के बाद भी सर्प की बेटी  बापिस नहीं आई तो उसे चिंता होने लगी लेकिन बिना मणि के वह बाहर भी नहियाया सकता था ,उस महल की संरचना इस प्रकार बनाई गई थी कि बिना मणि के भी एक दो दिन कुए का पानी उसके अंदर ना आ पाए |समय आने पर महल के अंदर पनि भरना शुरू हो गया और उसकी मौत हो गई |

निर्धारित समय पर खोजी की ट्रेनिंग पूरी हुई तो उस  अपने ज्ञान से पता लगाया कि उसके दोस्त कान्हा है सबसे पहले उसे खाती का लड़का दिखाई दिया वह उसी तरफ चल दिया और उसे लेकर उसके द्वारा बनाए उड़न खटोले से ब्राह्मण के लड़के के पास पहुचें फिर तीनों राजा के लड़के के पास पहुंचे खोजी ने बताया मेरी बिधा के अनुसार अपना दोस्त  इस कुए के अंदर ही है दोनों ने कहा भला कुए में कोई कैसे रह सकता है |

इसी उलझन में शाम होने ली तो तीनों ने कहा कि कल तलाश करेंगे और नगर की तरफ चल दिए जहां सर्प की बेटी के आदेशानुसार उन्हें भोजन कराने महल ले जय गया |जब भोजन परोसा जाने लगा तो उन्होंने एक थाली और मंगाई और बताया हमारा एक दोस्त साथ नहीं है ये उसके लिए है |सर्प की बेटी ओ समझते देर नहीं लगी की यही उनके दोस्त है ठीक बैसे ही राजा का लड़का भोजन के समय तीन थाली और लगवाता था |

सर्प की बेटी ने भोजन के बाद उन्हें सारी घटना बताई और मणि देते हुए कहा की इसे लेकर उस कुए में कूद जाना पानी  तुम्हारा कुछ  नहीं बिगड़ेगा और वहीं तुम्हें तुम्हारा दोस्त भी मिल जाएगा |

तीनों ने मणि को लेकर उस कुए में छलांग लगा दी अंदर जाकर देखा तो उनका दोस्त की सिर्फ हड्डियाँ का एक ढांचा मात्र था  ब्राह्मण ने अपनी बिधा से उसे जीवित किया और  बापिस उस देश के राजा के महल जहां सर्प की बेटी थी आ गए इधर राजा ने सर्प की बेटी को जो 6 महीने की मोहलत दे राखी थी वह भी पूरी हो चुकी थी अब राजा ने उससे शादी करने की तिथि तय कर दी उससे पहले सर्प की बेटी ने शर्त रखी कि उसे इस देश की सबसे सुंदर अविभाइत दासियाँ चाहिए जो एक ब्राह्मण,एक खाती,एक खोजी की हों राजा ने आदेश किया और तीनों सुंदर लड़कियां उसके पास पँहुच गई सर्प की बेटी ने खाना खिलाने के बहाने उन चारों को बुलवा लिया |उन सभी ने रात के अंधेरे में वहाँ से निकलने का प्लान बनाया  और खाती के उड़न खटोला से चारों वहाँ से अपने राज्य की तरफ चले गए |

इधर राजा ने अपने बेटे को राज्य से बाहर तो कर दिया था लेकिन उसे बाद में इसका बहुत दुख हुआ जब उसे पता चला की चारों दोस्त चार लड़कियों के साथ आए हुए हैँ तो उसने उन्हें सम्मान के साथ बापिस बुला लिया और चारों की शादी धूम धाम से कराई |

दाने ने कहानी का समापन करते हुए आगे कहा दोस्त ऐसे होते हैं वेसे नहीं जैसा तेरा दोस्त है |तूने मुझे मामा कहकर बुलाया है इसलिए में तुझे छोड़ रहा  हूँ तेरी भलाई भी इसी में है कि तू भी उसे भूल जा और किसी अन्य राज्य में चला जा |

कहानी से सिक्षा :- दोस्ती भरोसे की होती है जैसी उन चारों की थी |सच्ची दोस्ती की की पहचान भी मुसीबत में ही होती है |

 

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