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श्री कृष्ण जन्माष्टमी

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Aug 28, 2021

भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को देश और विदेश में बसे भारतियों द्वारा बड़े धूमधाम से मनाया जाता है | कंस के अत्याचारों और कई अन्य राक्षसों से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान् ने स्वयं इस दिन मध्य रात्रि को मथुरा में जन्म लेकर यहाँ के निवासियों का जीवन धन्य किया | इस दिन भगवान स्वयं अवतरित हुए ,इसी कारण इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के तौर पर मनाते हैं | लोग पूरी आस्था व उल्लास के साथ इस पर्व को मनाते हैं इस दिन मथुरा नगरी की छठा भक्ति के रंगों से सराबोर हो उठती है | भगवतगीता में भगवान् श्री कृष्ण द्वारा दिया गया उपदेश मानव कल्याण के लिए आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना महाभारत के समय था |

झाकियां और रासलीला
भारत के बड़े बड़े शहरों में जन्माष्टमी से कई दिन पहले ही बड़े पैमाने पर रासलीलाओं का भव्य आयोजन प्रारम्भ हो जाता है | इस बार कोरोना संकट की गाइड लाइंस की वजह से ऐसे आयोजनों को टाला जा रहा है फिर भी जनमानस के मन में इस पर्व के प्रति पूरा उत्साह है | इस दिन भगवान् लड्डू गोपाल की छवि निहारने के लिए दूर दूर से लोग मथुरा पंहुचते हैं , समस्त मथुरा भगवान श्री कृष्ण जन्मोत्सव पर कृष्ण मय हो जाता है | मंदिरों की सजावट ऐसी की नजरें हटाने का मन ही नहीं करता |


उपवास के साथ जन्माष्टमी
स्कन्द पुराण में कहा गया है कि जो व्यक्ति इस दिन के महत्व को जानने के बाद भी उपवास नहीं करता वह मनुष्य जंगल में रेंगकर चलने वाले कीट के समान होता है | ब्रह्म पुराण के अनुसार द्वापर युग में भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को 28 वें युग में देवकी के पुत्र श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था अत : दिन या रात में यदि नाममात्र को भी रोहिणी ना हो तो इस उपवास को जयंती मानकर ,करना श्रेष्ठ माना गया है | स्कन्द पुराण के अनुसार जो लोग इस लोक में जन्माष्टमी का ब्रत करते हैं वे उत्तम पुरुष होते हैं ऐसे लोगों के पास सदैव लक्ष्मी रहती हैं | इस ब्रत को पूरी आस्था और बिस्वास के साथ करने से सभी कार्य सिद्ध होते हैं | अत : लोगों को इस दिन पूरी आस्था के साथ ब्रत करते हुए भगवत भजन इत्यादि के साथ मध्य रात्रि को चन्द्रमा को अरक देने के बाद उपवास को खोलना चाहिए |

उपवास के दौरान फलाहार
लोग इस दिन उपवास को अलग -अलग प्रकार से रखकर फलाहार करते हैं कुछ लोग तो मध्य रात्रि तक सिर्फ एक बार जल ग्रहण करके इस ब्रत को पूरा करते हैं जबकि कुछ जगह फल खाकर इस ब्रत को करने की परम्परा है | मथुरा बृंदावन और उत्तर प्रदेश में इस दिन घर घर में दूध का खोवा बनाकर पेडे बनाये जाते हैं और फलाहार में उन पेड़ों को खाया जाता है | इस दिन रात के 12 बजने के बाद जब कान्हा का जन्म हो जाता है उसके बाद घर में बनाई गई स्वादिष्ट खीर -पूड़ी और अन्य पकवानों का भोग कान्हा को लगाकर भोजन किया जाता है |

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