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कहानी सफर के आखरी शिखर पर अकेले ,मंजूर नहीं-11

Byuser

May 6, 2021

अभी तक आपने पढ़ा कई दिनों के बाद स्कूल खुलने पर हरी स्कूल जाता है उसकी नजर चारों ओर माधवी को तलाश करती हैं लेकिन माधवी कहीं नजर नहीं आती तो वह उसकी क्लास में जाता है और माधवी से बात करने की कोशिश करता है लेकिन माधवी उससे बात नहीं करती अब इससे आगे –

जैसे ही पहली घंटी बजी क्लास में बैठे सभी बच्चे बाहर निकल जाते हैं माधवी भी बाहर जाने का प्रयास करती है तभी हरी उसका हाथ पकड़कर कहता है रुको माधवी में तुमसे इतनी देर से बात करने की कोशिश कर रहा हूँ लेकिन तुम बोल ही नहीं रही हो मुझसे कोई गलती हुई है तो बताओ |

माधवी रुक जाती है और कहती है देखो हरी तुम्हें मुझसे दोस्ती रखनी है तो दोस्ती के साथ साथ पढ़ना भी होगा एक तो तुम  मुझसे वैसे ही दो साल छोटे हो और ऊपर से तुम इस वर्ष फेल भी हो गए ये ठीक नहीं है में नहीं चाहती कि हमारा ये संबंध कुछ दिनों का हो हम तो जनम जन्मांतर तक इस रिस्ते को निभाना चाहते हैं तुम यदि चाहते हो तो तुम्हें अपनी पढ़ाई पर भी ध्यान देना होगा और इस वर्ष अच्छे नंबर से पास होना होगा तब तक में तुमसे कोई बात नहीं करूंगी ये जितना तुम्हारे लिए मुस्किल है उतना ही मेरे लिए |

हरी चुपचाप  वहाँ से चला  जाता है उसने मन ही मन विचार कर लिया कि अब बह ध्यान लगाकर पढ़ेगा और अच्छे नंबर से पास होने पर बह माधवी से बात करेगा समय बीतता चला  जाता है, हरी मन लगाकर अपनी पढ़ाई कर रहा है लेकिन कभी कभी उसका मन माधवी के ख्यालों में भटकने लगता है जिसे चाहकर भी अपने मन से नहीं निकाल पाता है |

यूं ही दिन बीतते गए इस बीच उसके  पेपर भी हो गए और आज रिजल्ट का दिन है हरी को इस क्लास में दूसरा वर्ष था तो वैसे ही उसे बहुत अच्छे नंबर से  पास होना चाहिए था लेकिन माधवी को  अपने ख्याल से वह कभी अलग नहीं कर पाया था इसलिए उसे डर भी था कहीं इस वर्ष भी वह फेल तो नहीं हो जाएगा इसी डर मेँ बह रिजल्ट देखने भी नहीं गया लेकिन माधवी को उसका रोल नंबर पता था बह सही समय पर अखवार में उसका रिजल्ट देखने से अपने आपको नहीं रोक पाई |हरी इस वर्ष पास तो हो गया था लेकिन उतने अच्छे नंबरों से नहीं  जितना बह मेधावी था |

रिजल्ट आने के बाद किसी ने हरी को घर आकर समाचार दिया कि वह पास हो गया है हरी की मा ने सुना तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा वह आस पास की औरतों को कह रही थी मेरा हरी पास हो गया है |हरी को भी थोड़ा राहत महसूस हुई कि कम से कम अब माधवी उससे मिलने  से तो मना नहीं करेगी और वह उससे मिलने के बाद क्या कहेगा यही सोचे जा रहा था |

रिजल्ट के बाद आज स्कूल खुल रहे थे हरी को बस एक ही ख्याल था कि आज बह माधवी से बात कर सकेगा माधवी ने रिजल्ट आने तक उसे बात करने से मना किया था हाँ वे एक दूसरे को दूर से ही देखकर अपने मन को समझा  लेते थे कि एक दिन वे जरूर साथ होंगे और हमेशा के लिए होंगे |आज माधवी स्कूल के गेट पर ही उसका इंतजार कर रही थी हरी को देखकर माधवी बोली कॉन्ग्रेचुलेशन हरी  अच्छे नंबर से पास होने के लिए |हरी मुस्कराया और बोला माधवी मैंने बहुत कोशिश की लेकिन तुम्हारे मन मुतावीक नंबर ला पाने में कामयाब नहीं हो पाया जब भी पढ़ने बैठता किताब में तुम ही नजर आती |फिर तुम्हारी वही तस्वीर कहती पढ़ लो यदि तुम्हें मेरे साथ रहना है तो इसी तरह कभी पढ़ता कभी तुम्हारी तसबीर से बात करता |माधवी उसको मुस्कराते हुए गहरी नजरों से देखे जा रही थी तभी स्कूल की पहली घंटी बजती है और वे दोनों अंदर प्रवेश करते हैं – इससे आगे अगले भाग में –

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