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कहानी सफर के आखरी शिखर पर अकेले ,मंजूर नहीं-15

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May 26, 2021

अभी तक आपने पढ़ा माधवी अपने पिताजी की खुशी और उनके सम्मान का ख्याल रखते हुए ,उनके ऑफिस के एक अधिकारी के साथ शादी कर लेती है |शादी से पहले वह हरी को फोन करके सारी बात बताना चाहती है लेकिन हरी उस समय फील्ड ट्रेनिंग पर है जहां फोन की सुबिधा नहीं है और हरी को बताए बिना ही वह शादी करके अपनी ससुराल चली जाती है | इधर अब हरी की ट्रेनिंग पूरी होने वाली है और उसे 20 दिन छुट्टी मिलने वाली है जिसे लेकर वह बहुत उत्साहित है – अब इससे आगे –

आज हरी की ट्रेनिग पूरी हुई ,उसे  अगली पोस्टिंग पर जाने से पहले 20 दिन की छुट्टी दी गई है| हरी के ख्यालों में तो सिर्फ माधवी है वह उसको लेकर रोज नई नई योजना बनाता रहता है छुट्टी जाने से पहले वह मार्केट जाता है और माधवी के लिए एक सुंदर सा  तोहफा खरीदकर लाता है |

ट्रेन के पूरे रास्ते हरी के दिमाग में सिर्फ माधवी ही छाई  रही कब सफर पूरा हो कब वो माधवी से मिले सफर अब पूरा होने ही वाला है | हरी ने प्लान बनाया कि वह अगले स्टेशन पर उतरकर घोड़े तांगे से अपने गाँव पँहुचेगा फिर  नहाधोकर, माधवी कहाँ पोस्टिंग पर है मालूम करेगा और उससे मिलने का प्रोग्राम बनाएगा |हरी को एक चिंता ये भी  थी कि पिछले 4 महीने से माधवी ने उसको कोई फोन नहीं किया नहीं तो सर्विस लगने के बाद वह लगातार थोड़े अंतराल पर फोन से बात करती रहती थी |

हरी ने जैसे ही अपना बेग नीचे रखा हरी की माँ ने आबाज सुनकर अंदर से आबाज लगाई  कौन है हरी ने आते समय माँ को खवर नहीं की थी कि वह आ रहा है और माँ की आवाज पर भी जब उसने कोई जवाब नहीं दिया तो वह खुद ही अंदर से निकलकर बाहर आ गई और अपने लाडले पर जब उसकी नजर गई तो उस समय उसके चेहरे की खुशी को शब्दों में पिरोना संभव ही नहीं है हरी ने झुककर अपनी माँ के पैर छूए और अंदर दाखिल हो गया |

घंटों माँ से बात करने के बाद हरी उठते हुए बोल मा अभी में नहा लेता हूँ फिर कुछ दोस्तों से मिलकर आऊँगा माँ ने कहा ठीक है बेटा नहा ले तेरे पिताजी भी बाजार से शाम तक घर लौट आएंगे जब से तू गया है बो भी बैचेन रहते हैं | हरी बोला  माँ मेरे बेग को छिपा दे और बताना मत कि मैं आया हूँ मैं उनकी खुशी को उनके चेहरे पर खुद देखना चाहता हूँ |माँ मुस्कराते हुए बोली ठीक है नहीं बताऊँगी |

हरी नहाधोकर माधवी के घर की तरफ चल देता है उसकी धड़कने तेज धडक रही हैं घर पर ही माधवी मिल जाए तो कितना अच्छा हो फिर दूसरे पल ही सोचा  वह पुलिस महकमे में एक अधिकारी है उसको घर आने की फुरसत कहाँ रहती होगी |यही सोचते हुए उसने माधवी के घर के आगे दस्तक दी  तो उमा की नजर उस पर पड़ गई हेलो हाय के बाद हरी ने माधवी के बारे में पूछा उमा ने सिर्फ ये बताया कि अपने जिले में ही उसकी पोस्टिंग है वह खुद जाकर उससे मिल ले |

हरी बापिस घर आया तो दरवाजे पर ही उसके पिताजी बैठे हुए मिल गए हरी ने झुककर प्रणाम किया ,हरी के पिताजी थोड़े गंभीर स्वभाव के हैं फिर भी अचानक हरी को देखकर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा

और दोनों अंदर आकर ढेरों बातें करते रहे उनका ज्यादातर समय हरी की ट्रेनिंग कैसे हुई इसी पर ही बीत गया हरी की माँ ने कहा बेटा अब थोड़ा कुछ खा ले और उसके बाद आराम कर ले बाकी बातें कल कर लेना ठीक है माँ खाना लगा दो बहुत दिन हो गए तुम्हारे हाथ का बना खाना खाए हुए और कल तो में किसी काम से शहर जाऊंगा कहकर हरी ,अपनी   माँ के पीछे पीछे रसोई की तरफ बढ़ चला|  अब इससे आगे अगले भाग में –

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