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कहानी सफर के आखरी शिखर पर अकेले ,मंजूर नहीं-13

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May 21, 2021 ,

अभी तक आपने पढ़ा हरी को माधवी द्वारा जब ये पता चलता है की वह  अपने पिताजी के साथ अन्य राज्य में जा रही है और वहीं रहकर अपने कॉलेज की पढ़ाई पूरी करेगी इससे वह बहुत दुखी हो जाता है अब इससे आगे –

हरी की नजर उसी रास्ते पर जमी हुई है जिस रास्ते से अभी अभी -माधवी  गई है पता नहीं और कितनी देर तक वह यूं ही खडा  रहता यदि उसके पास से एक नील गाय दौड़ती हुई ना जाती जैसे ही उसकी तंद्रा  भंग हुई वह निढाल अपने घर की तरफ लौटने लगा |

अगले दिन हरी अपने निर्धारित समय से स्कूल की तरफ चल दिया आज ना तो उसके अंदर कोई उमंग थी ना ही कोई जोश  बस जैसे- तैसे स्कूल बोझिल कदमों से स्कूल पँहुचा एक दो साथियों ने हरी को टोकते हुए कहा भी हरी यार तुम्हारी तबीयत तो ठीक है ना तुम्हारा चेहरा कुछ बुझा हुआ सा  लग रहा है और हरी बस एक ही जबाब देता नहीं ठीक हूँ |दरअसल हरी रात को ठीक से सो नहीं पाया था रहरहकर वह माधवी के बारे  में ही सोचे  जा रहा था |

माधवी अपने पिताजी के साथ जा चुकी थी लेकिन यंहा हरी की हालत खराब होती जा रही थी वह ना तो ठीक से सो पा रहा था ना ही ठीक से कुछ खा ही रहा था और ना ही उसका पढ़ाई में मन ही लग रहा था उसकी इस हालत से   माँ बहुत दुखी थी वह समझ नहीं पा रही थी आखिर इस लड़के को हुआ क्या है वह हरी से लाख पूछने की कोशिश करती हरी कोई जबाब ना देकर  माँ को और बिचलित कर देता आखिर में उन्होंने  हरी के पिताजी से हरी की हालत के बारे सब कुछ बताते हुए कहा सुनो जी हरी की तबीयत ठीक नहीं है इसे किसी डॉक्टर  को दिखाओ हरी के पिताजी उसे लेकर शहर के डॉक्टर  के पास गए डॉक्टर ने हरी का चेकअप किया तो समझ गया कि इसे शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक बीमारी है उसने कुछ  दबाएं देते हुए हरी के पिताजी से कहा की वह इसे ज्यादा से ज्यादा काम में लगाकर रखें थोड़े दिनों में यह नॉर्मल हो जाएगा |

उधर माधवी का  कॉलेज में एडमिशन हो चुका है उसे रात को सपना आया की हरी की हालत ठीक नहीं है इसलिए उसने आज हरी के स्कूल में फोन लगाकर हरी से बात करने का  बिचार बनाते हुए एक लोकल एसटीडी से फोन मिलाया ,फोन प्रिंसिपल के रूम में था लेकिन प्रिंसिपल ऑफिस में नहीं थे इसलिए घंटी बजने के बाद चपरासी ने  फोन उठाया माधवी ने उससे हरी को बुलाकर बात करने को कहा ,चपरासी भागकर हरी को क्लास से बुला लाया हरी ने जैसे ही हैलो बोला और उधर से जब माधवी की आबाज सुनाई दी वह कुछ कहने की बजाय फफक कर रो पड़ा माधवी ने उसे समझाया तब थोड़ा चुप हुआ और कहने लगा माधवी में तुम्हारे बगैर यंहा नहीं रह सकता माधवी ने उसे बहुत समझाया अंत में अपनी कसम देकर  वादा  लिया कि वह अपना ख्याल रखेगा और अपनी पढ़ाई पर भी ध्यान देगा  तब जाकर फोन डिस्कनेक्ट किया  |

माधवी से बात होने के बाद हरी कुछ हल्का महसूस कर रहा था और उसने अब अपनी पढ़ाई में भी ध्यान लगाना शुरू कर दिया था इसके अलाबा उसके पिताजी भी उसे अपने साथ काम पर लगाए रहते जिससे वह रात में थक कर सो जाता और उसे माधवी के बारे में सोचने का समय ही नहीं मिलता |इससे आगे की कहानी अगले भाग में |

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