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कहानी सफर के आखरी शिखर पर अकेले ,मंजूर नहीं-12

Byuser

May 20, 2021 ,

अभी  तक आपने पढ़ा हरी का रिजल्ट आया है और वह पास हो गया है आज कई दिनों के बाद माधवी उससे मिली है दोनों बात करते हुए स्कूल के अंदर दाखिल होते हैं अब इससे आगे –

माधवी जहां हरी के पास होने से खुश  है वहीं वह मन ही मन इस बात को लेकर परेशान है की दो चार दिनों में उसका भी रिजल्ट आ जाएगा और उसे यह स्कूल छोड़कर कॉलेज में एडमिशन  लेने जाना  पड़ेगा कुछ ही  दिनों में वह फिर  हरी से दूर हो जाएगी उसने  अपनी ये बात हरी को जाहिर नहीं होने दी |

हरी का रिजल्ट आने के बाद से लगातार कई घंटों तक माधवी हरी के साथ समय बीता  रही थी बह मन ही मन भगवान से प्रार्थना कर रही थी कि वह इस साल फ़ेल हो जाए तो  अच्छा है वह हरी को एक  दिन भी नहीं देखती तो  उसे चेन नहीं मिलता था यही हाल हरी का भी था बो तो माधवी के साथ रहने से इतना खुश था कि उसे इस बात का ख्याल ही नहीं था की माधवी का भी रिजल्ट आने वाला है और वह उसे छोड़कर शहर कॉलेज चली जाएगी  |

दोनों के हंसी खुशी दिन बीत रहे थे और आज बो दिन आ ही गया जब माधवी का रिजल्ट आ रहा है माधवी  को अपने रिजल्ट आने की कोई खुशी नहीं थी लेकिन स्कूल मेनजमेंट को उसके रिजल्ट का बेसब्री से इंतजार था माधवी बहुत ही इंटेलिजेंट लड़की थी और इसके लिए उसने स्कूल को निराश भी नहीं किया उसने ना सिर्फ स्कूल में टॉप किया बल्कि जिला में भी वह टॉपर थी उसके रिजल्ट  को देखकर हरी बहुत उत्साहित था उसने माधवी के रिजल्ट आने पर  तोहफे के तौर पर देने केलिए एक पेन खरीद रखा था जिसे देते हुए उसने माधवी से बड़े भावुक अंदाज में कहा था  माधवी तुम एक ना एक दिन बहुत बड़ी अधिकारी  बनोगी उस दिन शायद में याद ना रहूँ पर मेरा ये पेन तुम्हें मेरी याद जरूर कराएगा |माधवी ने इसके जबाब में हरी को बस यही कहा तुम मेरे रोम रोम में बसे हो तुम्हें कैसे भुला सकूँगी |

माधवी का कॉलेज में एडमिशन हुआ लेकिन अपने गृह राज्य से अलग उसके पिताजी भी एक अधिकारी थे और वे उसे अपने साथ लेकर गए थे उन्होंने कहा था माधवी तुम  यंहा रहकर अपनी पढ़ाई अच्छे से नहीं कर पाओगी वहाँ  तुम्हें अच्छी कोचिंग और अच्छा वातावरण मिलेगा माधवी की इच्छा नहीं थी वह हरी से इतनी ज्यादा दूर जाए  मगर चाहकर भी वह अपने पिताजी के साथ जाने से मना नहीं कर पाई थी जाने से पहले वह एक बार हरी से मिल कर सब बताना चाहती थी इसलिए उसने हरी को एक निश्चित स्थान पर मिलने के लिए कहा |

माधवी और हरी निश्चित किये स्थान  पर मिले  दोनों के गले रुँधे हुए थे कई देर  तक दोनों बस एक दूसरे का हाथ में हाथ लिए  मौन निहारते रहे कुछ सभलने के बाद  माधवी ने अपने पिताजी के साथ जाने की बात हरी को बताई हरी सुनकर बहुत उदास हो गया उसने तो सोचा था कि माधवी नजदीक जिला कॉलेज में एडमिशन लेगी तो वह कभी कभी वहाँ जाकर उससे मिल लिया करेगा लेकिन वह तो दूसरे राज्य में जा रही है और इसी से उसका दिल बैठा जा रहा था  उसकी आँखों से झर झर आँसू वह रहे थे उसने रुँधे गले से कहा माधवी  मुझे नहीं पता में तुमसे  मिले बगैर केसे रह पाऊँगा |

माधवी ने उसे समझाते हुए कहा  पागल नहीं बना करते अभी हमारे पढ़ने के दिन हैं खूब मेहनत से पढ़ो जब हम कोई मुकाम हासिल कर लेंगे तो एक दूसरे से दूर रहने की सारी रुकाबटें दूर हो जाएंगी इसलिए मेहनत से पढ़ना और साल के अंत में कॉलेज की छुट्टियों में तो में आ ही जाऊँगी साथ ही कभी कभार तुम्हारे स्कूल के फोन नंबर पर फोन भी कर लूँगी |सभी तरह से समझाकर माधवी ने उठते हुए कहा अब हमें यंहा से चलना चाहिए अपना ख्याल रखना |हरी कोई जबाब देने की स्थति में नहीं था बो एक टक  माधवी को देखे जा रहा था |माधवी जब चलने लगी तो वह बच्चों की तरह उससे लिपट गया माधवी ने बड़े प्यार से उसे अलग करते हुए कहा हरी अपने को संभालो हम फिर मिलेंगे , माधवी उसकी आँखों से ओझल हो चुकी थी फिर भी  वह एकटक उस  रास्ते को ही निहारे जा रहा था |इससे आगे की कहानी अगले भाग में –

 

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