• Fri. Sep 24th, 2021

GETREALKHABAR

E News/educational stories, poem and life style/only clean content

पुण्य कर्म कभी अकारथ नहीं जाते

Byuser

Jul 3, 2021

एक राजा था उसके दो रानियां थीं | पहली रानी बड़े पुण्य कर्म करती थी लेकिन उसके कोई संतान नहीं थी इसलिए राजा ने दूसरी शादी कर ली | दूसरी रानी के संतान पैदा हुई तो राजा उसी से ज्यादा प्रेम करने लगा | धीरे-धीरे दूसरी रानी ने राजा को अपने बश में कर लिया अब राजा वही करता जो दुसरी रानी कहती | इसी तरह एक दिन रानी ने पहली वाली रानी को महल से निकलवा दिया | वह जंगल में एक झोपडी बनाकर रहने लगी रानी को खाने केलिए प्रतिदिन सवा सेर अनाज आ जाया करता | रानी उसमें से कुछ अपने खाने में इस्तेमाल कर लेती और कुछ पंछियों को चुग्गा दे देती | साथ ही वह अपने नजदीक पीपल /नीम /तुलसी को सींचती रहती | एक दिन दूसरी रानी ने महल के ऊपर से देखा तो उसे वह पीपल का पेड़ सींचती नजर आ गई उसने सोचा यह राजा को अपने बश में करने के लिए कोई टोटका कर रही है इसलिए उसने राजा से जिद करके वह पेड़ कटवा दिए | अब रानी दूसरे पेड़ सींचने लगी तब उसने वह भी कटवा दिए | जब सारे पेड़ कट गए तो रानी झाड़ /झाड़ी को पानी देने लगी फिर एक दिन दूसरी रानी महल की छत से देखा तो वह झाड़ ,झाड़ी को सींचती नजर आई अब तो उसने राजा से कहकर जंगल की सब झाड़ियां भी कटवा डालीं तब पहली रानी को  दूर-दूर तक कोई पेड़ झाड़ नहीं मिला तो उसने दूर एक आक की डाली देखी रानी उसे ही सींचने लगी | 

एक दिन राजा घूमते हुए जंगल में अंदर चला गया उसके साथ सैनिक भी थे रानी की जिद के कारण जंगल के  सभी पेड़ काट चुके थे गर्मी के कारण सभी का बुरा हाल होने लगा तभी उनको वही आक  की डाली दिखाई दी  उसके नीचे पहली रानी ने सींचा हुआ पानी भी था | राजा और सैनिक जैसे ही आक की डाली   के नीचे पंहुचे आक की डाली एक पेड़ बन गया और उसके निचे जो थोड़ा पानी था वह तालाब बन गया सभी ने वहां पानी पिया और पेड के नीचे आराम किया तब जाकर उनकी जान में जान आई | उन सभी को यदि जंगल में पानी नहीं मिलता तो  जान  सकती थी | 

महल में आकर राजा ने रानी से पूछा तुम कौन से पुण्य  करती हो जो आज तुम्हारे पुण्य हमारे  आये | रानी बोली महाराज मुझे तो  श्रंगार से  फुर्सत नहीं मिलती मैं भला पुण्य कर्म किया करुँगी | तब राजा अपनी पहली  रानी के पास पहुंचा और बोला  रानी तुम कौन से पुण्य कर्म करती हो ?रानी बोली महाराज मैं क्या पुण्य कर्म करुँगी मुझे सबा सेर अनाज मिलता है कुछ मैं खा लेती हूँ कुछ पंछियों को डाल देती हूँ | एक ाक की डाली है उसे सींच आती हूँ | राजा ने रानी की बात सुनी और कहा तुम्हारे उसी आक की डाली की वजह से हमारे प्राणो की रक्षा हुई है | 

राजा ने आदेश दिया पहली रानी को महल में सम्मान सहित लाया जाए और दूसरी रानी कोउसकी जगह जंगल में छोड़ दिया जाए | दूसरी रानी को उसके कर्म की सजा मिली और पहली रानी को उसके पुण्य कर्मों ने फिर से राजा की चहेती बना दिया | 

Leave a Reply