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काला अँधेरा

Byuser

Aug 19, 2021

सहनशीलता हुई ख़त्म बेताबी ज्यादा है
सच्चाई हो रही दफ़न झूठ का बोलवाला है |
चुगली चपटी सुनते सभी नहीं सच की पहचान
सच्चा है पिसता वही झूठे का होता गुणगान |
झूठे का होता गुणगान ,हर कोने में जाला है
निकला बेईमान वही, हाथ में जिसके माला है। …………….

चुप रहना ,दर्द सहना ,ना किसी से कुछ कहना

कर इन्तजार उजालों का निकलेगी जरूर रैना |

निकलेगी जरूर रैना ,रुकेगा अविरल जो बहता नाला है

सच्चाई की होगी जीत धुलेगा दाग जो काला है। ……………..

सुनंने बाले ही बने सुनाने वाले फिर दुखड़ा किसे सुनाएँ

कब तक सहें ,कैसे सहें ,सह सहकर सह ना पाएं |

सह सह कर सह ना पाएं दबाब इतना डाला है

दबे जा रहे आत्मबोझ से ,हुआ अँधेरा काला है। ……………..

देते नसीहत औरों को ,सच्चाई की राह पर चलना है

खुद लिप्त काले धन्दों में सच्चाई तो एक सपना है

सच्चाई तो एक सपना है ,हाथ में उनके भाला है। ………………

मासूमियत का ओढ़ लबादा खंजर पीठ में घोंपेंगे

तू रहना साबधान वे अपने में मिलाने की सोचेंगे |

है धीरज तेरे पास तो कहता राघव एक दिन तेरा आना है। ………………..

मिट जाएंगे संताप सभी, बस सोयों को जगाना है

खुलेंगे फिर पट प्रेम के जिन पर जंगी ताला है |

होगी सच की जीत , बस तुझे नेकी करते जाना है। …………………………………


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