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हीरे की परख तो जौहरी ही कर सकै है

Byuser

Aug 4, 2021

एक वार एक चित्रकार एक चित्र बनाकर राजा के दरवार में ले गया | राजा ने उसे पचास रूपये दे दिए | चित्रकार ने राजा से पूछा महाराज आपने इस चित्र को देखकर इसकी कीमत दी है या मुझे गरीब देखकर ये रूपये दिए हैं | राजा ने कहा इस चित्र में ऐसा कुछ भी नहीं है हमने तो तुमकों गरीब जानकार ही रूपये दिए हैं | तब चित्रकार ने अपना चित्र लिया और वहां से चल दिया | रास्ते में उसे एक आदमी मिला जो देखने से गरीब नजर आ रहा था | उसकी नजर चित्रकार के चित्र पर पड़ी तो उसे देखता ही रह गया और उसके मुहं से निकला वाह-वाह क्या चित्र बनाया है | उसने कहा इस चित्र के लिए तो 10000 रूपये भी चुकाने पड़ें तो कम हैं | तब चित्रकार ने उस आदमी से पूछा भला ऐसा इस चित्र में क्या है ? उस आदमी ने कहा इस चित्र में एक गुजरी पानी का घड़ा सर पर रखे चली आ रही है | उसके पैर में काँटा लग गया है , जिसकी वजह से दर्द के कारण उसकी नाक में बल पड गया है | वह दांतो से ओठों को दबाये सीत्कार करती चली जा रही है | पीड़ा के कारण उसके रोम रोम में बल पड़ा हुआ है | बस इसी बात पर में इस चित्र पर रीझ गया हूँ | चित्रकार उसकी कद्रदानी पर बहुत खुश हुआ | उस आदमी के पास सिर्फ एक ही रुपया था , चित्रकार ने चित्र की कीमत स्वरूप वही एक रुपया लेकर उस आदमी को चित्र दे दिया | चित्रकार को वह चित्र देते हुए बड़ी आत्मसंतुष्टि हुई और उसके मुहं से अनायास ही निकला हीरे की परख तो जौहरी ही कर सकता है |

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