• Fri. Sep 24th, 2021

GETREALKHABAR

E News/educational stories, poem and life style/only clean content

माँ की आराधना का पर्व चैत्र नवरात्रि

Byuser

Apr 12, 2021 ,

चैत्र मास में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि चैत्र नवरात्रि आरंभ हो जाती हैं। इस बार चैत्र नवरात्रि 13 अप्रैल 2021 दिन मंगलवार से से शुरू हो रही हैं। पूरे देश में नवरात्रि का पर्व बड़ी ही श्रद्धा और भक्तिभाव से मनाया जाता है। लोग नवरात्रि में पूरे 9 दिनों तक व्रत रखकर मां दुर्गा की पूजा और उपासना करते हैं। कुछ लोग नवरात्रि के पहले और आखिरी दिन व्रत करते हैं तो कुछ लोग पूरे नौ दिनों तक व्रत करते हैं। इस दौरान दो तरह व्रत रखने की परंपरा है। लोग पूरे नौ दिनों तक फलाहार करते हुए व्रत करते हैं तो कुछ मनोकामना के अनुसार नौ दिनों तक निर्जला व्रत भी रखते हैं।

इस बार चैत्र नवरात्रि 13 अप्रैल दिन मंगलवार से शुरू हो रही है ।इस दिन गुड़ी पड़वा भी है जिसका अपना विशेष महत्व है ।नवरात्रि का समापन 22 अप्रैल को हो रहा है । इस बार पूरी नौ दिन की नवरात्रि है ।

लोग अपने घर पर कलश की स्थापना करते हैं ।और माता रानी का नौ दिन का उपवास रखते हैं ।जो लोग किसी कारण वश नवरात्रि के पूरे दिन का उपवास रखने में स्वयं को सक्षम नहीं मानते ।उन्हें नवरात्रि के पहले दिन और आखिरी दिन नवरात्रि का उपवास करना चाहिए

नवरात्र में देवी पूजन करने का विधान है। व्रत-उपवास भी इसके ही अंतर्गत आता है। मान्यता है कि नवरात्र रखे जाने से ये  व्रत हमारी आत्मा की शुद्धता के लिए रामबाण  का काम  करते हैं। व्रत करने से मन,तन और आत्मा की शुद्धि होती  है। व्रत पालन करने से शारीरिक, मानसिक और धार्मिक सभी प्रकार से फायदा होता है। नवरात्र के व्रत से शरीर तो स्वस्थ रहता ही है मन भी शांत बना रहता है। इसके अलावा नवरात्रि पर्व में व्रत रखना शरीर को भी लाभ पहुंंचाता है।

नवरात्र पर उपवास करने का महत्व

नवरात्र पर देवी पूजन और नौ दिन के व्रत का बहुत महत्व माना जाता है। नवरात्र के ये पावन दिन स्वयं को शुद्ध, पवित्र, साहसी बनाने की इच्छा शक्ति जाग्रत करने के दिन होते हैं । इस दौरान देवी से आशीर्वाद के साथ उनके चरित्र के गुणों को अपने व्यक्तित्व में शामिल कर सकें ऐसी हमें चेष्टा कान चाहिए और ये सिर्फ इन नौ दिनों में ही नहीं बल्कि हर दिन यही चेष्टा रहे कि हम जो भी कर रहे हैं उससे माँ नाराज तो नहीं हो जाएंगी । नवरात्र ऋतु परिवर्तन के समय आते हैं ,ऐसे समय में बीमार होने की संभावना काफी अधिक होती है। लोगों को कई तरह के संक्रामक रोग भी हो जाते हैं। इसलिए नवरात्र के 9 दिन तक व्रत रखने से खानपान संतुलित होता है। व्रत से शरीर स्वस्थ बना रहता है। पाचन तंत्र सुचारु रहता है।ये सभी तो शारीरिक अबस्था को ठीक करने का एक जरिया माना जा सकता है लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि इस व्रत को रखने से मां की अनुकंपा मिलती है और मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। आध्यात्मिक शक्ति और ज्ञान में बढ़ोत्तरी के साथ ही विचारों में भी पवित्रता आती है।

नवरात्र का उपवास का पुराणों में उल्लेख

नवरात्र के त्योहार और व्रत का अपना महत्व है। पुराणों में उल्लेख मिलता है कि मां आदि शक्ति का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए स्वयं देवताओं ने भी नवरात्र के व्रत किए थे। देवराज इंद्र ने राक्षस वृत्रासुर का वध करने के लिए मां दुर्गा की पूजा अर्चना की और नवरात्रि के व्रत रखे। त्रिपुरासुर दैत्य का वध करने के लिए भगवान शिव ने मां भगवती का पूजन किया। जग के पालनकर्ता भगवान विष्णु ने मधु नाम के असुर का वध करने के लिए नवरात्र का व्रत किया था। रावण का वध करने के लिए भगवान श्रीराम ने आश्विन नवरात्र का व्रत किया था। देवी के व्रत से भगवान राम को वह अमोघ वाण प्राप्त हुआ था जिससे रावण मारा गया। महाभारत में कौरवों पर विजय पाने के लिए पांडवों द्वारा देवी का व्रत करने का उल्लेख मिलता है। देवी भागवत पुराण में राजा सुरथ की कथा मिलती है, जिन्हें नवरात्रि के व्रत रखने से अपना खोया हुआ राज्य और वैभव फिर से प्राप्त हुआ था।

Leave a Reply