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कहानी सफर के आखरी शिखर पर अकेले ,मंजूर नहीं-18

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May 29, 2021 ,

अभी तक आपने पढ़ा हरी के पिताजी ने हरी को फोन करके जल्द से जल्द छुट्टी आने को कहा हरी अपने गाँव छुट्टी आता है| अब इससे आगे –

हरी अपने घर पँहुचा ही था कि उसके रिस्ते वाले आ गए आपस में सहमति होने के बाद हरी के पिताजी बोले बेटा हरी यदि तुमने बहु देखनी हो तो देख लो लेकिन हरी बोला पिताजी आप और माँ जाकर देख लो आपकी पसंद ही मेरी पसंद है |

दूसरे दिन हरी के पिताजी और उसकी माँ  दोनों बहु को देखने जाते हैं उनके गाँव से लड़की बालों का घर ज्यादा दूर नहीं था इसलिए वे दोनों दोपहर से पहले ही वहाँ पहुँच गए | लड़की के घर वाले उनसे बहुत ही प्रेम से मिले और उनकी छोटी से छोटी बात का  ख्याल रखा  जब उनकी होने वाली बहु चाय नास्ता लेकर आई तो रंग रूप और कद काठी से उन्हें लड़की पसंद आ चुकी थी बस वो चाहते थे कि व्यबहार में भी वह उतनी ही अच्छी निकले हरी के पिताजी ने हरी की माँ से कहा बहू से बैठकर थोड़ी देर बात कर लो फिर हम यंहा से चलेंगे |

हरी की माँ ने होने वाली बहु से ढेर सारी बातें कर अंदाज लगा लिया कि यह हर लिहाज से  हमारे घर में खुशी का माहौल बनाए रखेगी उन्होंने उसी समय सगुन का नेक देकर कहा आज से ये हमारे घर की बहू हुई |दोनों उसके बाद घर लौट आए हालांकि लड़की बालों ने काफी जोर डाला था कि वे आज यहाँ रुक जाएँ लेकिन हरी का ख्याल कर वे बापिस आ गए |

घर आने के बाद हरी की माँ ने कहा बेटा बहू बहुत सुंदर और सुशील है तुझे बहुत खुश रखेगी हरी बोला माँ यदि तुम्हें इतनी अच्छी लगी और तुम खुश हो तो वही मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी है |

एक निश्चित मुहूर्त में दोनों की शादी हो जाती है गाँव की औरतें जब बहू को देखने आईं तो बाहर बैठे हरी से विनोद करती कहती हरी दुल्हन तो बड़ी सुंदर लाया है और हरी एक मुस्कराहट के साथ उनकी बातों का जवाब दे रहा था |शादी  के बाद हरी ने अपनी पत्नी का पूरा ख्याल रखा उसने उसे कभी महसूस नहीं होने दिया कि उसके दिल में तो किसी और के लिए जगह बनी हुई है ऐसा ही कुछ वादा उसने माधवी को दिया था |

समय कभी स्थिर नहीं रहता जहां माधवी के दो बच्चे बड़े हो गए हैं वहीं हरी के भी दो बच्चे हैं जो काफी बड़े हो गए हैं उनमें से एक की हरी ने शादी भी कर दी उसी तरह माधवी ने भी अपने एक बच्चे की शादी कर दी मसलन हरी और माधवी को एक  दूसरे से बिछड़े हुए लगभग 35 वर्ष गुजर चुके हैं इस दौरान किसी ने भी एक दूसरे से मिलने की कोशिश भी नहीं की  |

यूं ही समय गुजर रहा था कि  एक दिन एक पार्टी में जो उसके ही एक साथी ने आयोजित कर रखी थी उसमें उसकी नजर एक चेहरे पर पड़ी तो वह सन्न रह गया उसे माधवी को पहचानने में जरा भी देर नहीं लगी कियोंकि माधवी ने अपने आपको मैन्टेन करके रखा हुआ था अब बारी माधवी की थी कि वह हरी को पहचानेगी या नहीं इसलिए हरी जानबूझकर माधवी के सामने पड़ी एक चेयर पर जाकर बैठ गया उसे इंतजार था कि कब माधवी ऊपर नजर उठाए और उसकी तरफ देखे लेकिन माधवी उसके पास बैठी एक महिला से बात करने में व्यस्त थी |काफी समय यूं ही निकल जाने के बाद भी माधवी ने हरी की तरफ नजर उठाकर नहीं देखा था हरी अब व्यग्र होता जा रहा था | इससे आगे अगले भाग में –

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