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कहानी सफर के आखरी शिखर पर अकेले ,मंजूर नहीं-17

Byuser

May 28, 2021

अभी तक आपने पढ़ा हरी माधवी से मिलने उसके ऑफिस पहुंचता है जहां माधवी  के माथे पर लगी बिंदी और सिंदूर देखकर वह बदहवास हो जाता है |माधवी उसे समझाने में लगी है और अपने प्यार का वास्ता देते हुए कहती है कि आज  वह कुछ मांगना चाहती है उसकी इस बात पर पहली वार हरी प्रश्नबाचक नजरों से उसकी तरफ देखता है अब इससे आगे –

जैसे ही प्रश्नबाचक नजरों से हरी माधवी की ओर देखता है वैसे ही माधवी बोलना शुरू करते हुए कहती है कि हरी हम अपने प्यार को सदा एक दूसरे के ख्यालों में जिंदा रखेंगे हमारे प्यार की ये आजमाइश भी होगी कि आज के बाद ना तो हम एक दूसरे से मिलने की कोशिश करेंगे ना ही किसी अन्य माध्यम से मिलने की कोशिश करेंगे हाँ यदि भविष्य में कभी अनजाने में हमारी मुलाकात हो तो जरूर मिलेंगे हमारा ये प्यार अनोखा होगा हाँ सबसे अहम बात जो आज में तुमसे मांगते हुए पहले वादा लेना चाहती हूँ क्या तुम ये वादा करोगे जो मैं  कहूँ क्या तुम उसे पूरा करोगे |अब तक हरी अपने आपको बिल्कुल नॉर्मल कर चुका था उसने कहा बोलो माधवी किस बात का वादा लेना चाहती हो मैं वादा करता हूँ कि उस वादे के लिए मुझे अपने प्राण भी देने पड़ेंगे तो मैं पीछे नहीं हटूँगा |

माधवी बोली हरी तुम्हारे प्राण मेरे प्राण में समाहित हैं यदि तुम्हारे प्राण निकलेंगे तो मेरे भी निकल जाएंगे इसलिए प्राण नहीं ये वादा करो की तुम भी शादी करके अपने माता पिता को सभी सुख दोगे हरी ने कहा माधवी तुमने तो प्राणों से भी बढ़कर वादा ले लिया मुझे तुम्हारे अलावा कोई दिखाई ही नहीं देती फिर भी तुमसे किये वादे के अनुसार मैं तुम्हारी इच्छा जरूर पूरी करूंगा |

हरी उठते हुए बोला अब मैं चलता हूँ अब तो जब भी ईश्वर हमें मिलाएगा तब ही मिलन होगा बडा अनोखा प्यार है ये मुझे पता है हम एक दूसरे से मिले बिना भी इस प्यार को सदा महसूस करते रहेंगे | ऐसा कहकर हरी वहाँ से उठ खडा  होता है उसे पता है यदि वह थोड़ी देर यंहा और रुक गया तो वह कमजोर पड़ जाएगा इसलिए वह उठा ,मुड़ा और तेज कदमों से गेट पर खड़ी अपनी बाईक की तरफ बढ़ चला |

हरी बापिस घर आया तो चेहरे को देखकर उसकी माँ बोली बेटा क्या बात है कुछ उदास सा  लग रहा है हरी बोला नहीं माँ ऐसा तो कुछ नहीं है बस थोड़ा थक गया हूँ मैं अंदर आराम करता हूँ खाना भी अब शाम को ही खाऊँगा इसलिए मुझे उठाना मत ठीक है बेटा आराम कर ले |

हरी को गाँव में रहते 10 दिन हो चले थे लेकिन अब उसका मन यहाँ नहीं लग रहा था इसलिए उसने निश्चय किया कि वह अब अपनी यूनिट में समय से पहले जॉइनिंग कर लेगा और अगले ही दिन उसने अपनी तैयारी कर टिकिट बनवा ली माँ ने कहा बेटा तेरी तो 20 दिन की छुट्टी थीं फिर इतनी जल्दी क्यों चल दिया हरी को  ना चाहते हुए माँ से झूट का सहारा लेना पड़ा उसने कहा माँ वहाँ से खवर आई है इसलिए जाना पड़ेगा |

हरी ट्रेन से अपनी यूनिट पँहुच जाता है और ड्यूटी में इतना व्यस्त हो जाता है कि उसे ज्यादा सोचने का समय नहीं मिलता ठीक एक वर्ष बाद वह फिर 20 दिनों की छुट्टी गया तो माँ को एक मोबाइल लाकर देते हुए कहा ले माँ अब तेरा जब मन करे मुझसे बात कर लेना |इधर अब हरी के रिश्ते वाले आने शुरू हो गए माँ फोन करती बेटा तेरे रिश्ते वाले आ रहे हैं तू जल्दी छुट्टी आ जा अब मुझसे घर का काम ठीक से नही हो पाता तू शादी कर ले तो मुझे कुछ आराम मिले लेकिन हरी कुछ ना कुछ बहाना बनाकर माँ को टाल देता | लेकिन माँ के साथ साथ अब पिताजी ने  जोर बनाना शुरू किया तो उसको छुट्टी लेकर घर जाना ही पड़ा |इससे आगे की कहानी अगले भाग में –

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