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कहानी सफर के आखरी शिखर पर अकेले ,मंजूर नहीं-26

Byuser

Jun 20, 2021

अभी तक आप पढ़ चुके हैं माधवी ने खाना पीना बंद किया हुआ है जिसकी वजह से उसका बी पी बहुत लो हो गया इसलिए उसके पति दो दिन के बाहर जाने के दौरे को टालना चाहते हैं लेकीन माधवी की जिद के कारण वह इस हिदायत साथ बाहर जाते हैं कि वह अपना पूरा ख्याल रखेगी दूसरी तरफ हरी के घर वालों को भी पता चल चुका है कि हरी को केन्सर है और आज उसकी तबीयत कुछ ज्यादा ही खराब है | अब आगे –
हरी की पत्नी एक कटोरी में जूस और चम्मच लेकर हरी के पास आती है वह पूरी रात हरी के पास ही बैठी रही थी और सुबह होते ही किचन से मौसमी का ताजा जूस निकाला था |उसने चम्मच से जैसे ही हरी को जूस पिलाया जूस अंदर जाने के साथ ही एक हिचकी आई और हरी की गरदन एक तरफ लुढ़क गई |हरी की हालत देखकर उसकी पत्नी बिलाप करने लगती है जिसे सुनकर घर के बाकी सदस्य वहाँ आ जाते हैं अब तक पड़ोसी भी पहुचने लगे हैं और घर में मातम छा जाता है |
इधर माधवी अपने सपने में देखती है की हरी उसे पुकार रहा है वह माधवी माधवी आबाज लगा रहा है और कुछ लोग उसे लेकर जा रहे हैं माधवी जोर लगाकर चीखती है रुको हरी में आ रही हूँ इस वार वह सपने में नहीं बल्कि हकीकत में चीखी थी उसकी चीख सुनकर घर के बाकी सदस्य माधवी के कमरे की तरफ दौड़े ,तब तक माधवी शांत हो चुकी थी ऐसा लग रहा था जैसे गहरी नींद में सोई हुई है लेकिन जब घर बालों ने उसे आबाज दी तब भी कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तब उनकी बहु ने अपनी सास को मम्मी जी उठिए कहकर हाथ लगाया तो उसे अहसास हुआ कि कुछ गड़बड़ है तुरंत ही डॉक्टर को फोन किया गया डॉक्टर ने आकर मुआयना किया तो पाया कि वह इस शंसार को अल्बिदा कह चुकी है | जो हाल हरी के घर में था वही हाल अब माधवी के घर में है |इस स्थति को शब्दों में पिरोना न मुमकिन है इस पीड़ा को वही महसूस कर सकता है जो अपनों से बिछुड़ चुका है |

कहने को तो ये दो घर से अलग अलग निकली अर्थियाँ हैं लेकिन सिर्फ हरी और माधवी ही जानते थे  कि दो शरीर में एक ही रूह थी जो अब उनके शरीर से निकल चुकी थी |इस कहानी अंत बड़ा दर्दनाक है | इस कहानी में माधवी ने जो किया वह किसी भी हालत में ठीक नहीं ठहराया जा सकता है ,इंसान को हर हालत में भगवान द्वारा दिए गए जीवन को किसी भी तरह से समाप्त करने का कोई अधिकार नहीं है ये एक प्रकार से आत्महत्या है जो कानून की नजर से गंभीर अपराध है |फिर भी इसके बावजूद  इस कहानी में कुछ अच्छे पहलू भी हैं जिनसे आज की युबा पीढ़ी कुछ सीख सकती है –

कहानी हमें पवित्रता की सीख देती है हरी और माधवी में प्रेम प्रसंग तो है मगर उनमें वासना कहीं नजर नहीं आई |

इस कहानी से समाज और अपने माता पिता की भावनाओं का ख्याल रखने का हरी और माधवी ने एक अच्छा उदाहरण पेश किया है |वे दोनों शादी होने से पहले अच्छी नौकरी पर लग चुके थे ,यदि चाहते तो परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी कर सकते थे |

वे दोनों वर्षों एक दूसरे से बिना मिले दूर रहे जो ये दर्शाता है कि उन्होंने अपने अपने जीवन साथी को पुरा सम्मान दिया जो ये दर्शाता है कि शारीरिक नजदीकियाँ किसी भी रिश्ते को निभाने के लिए जरूरी नहीं है |

आज इस कहानी का समापन है कहानी कैसी लगी अपने बिचारों से कमेन्ट करके जरूर बताएं |जल्द ही एक नई कहानी के साथ मिलेंगे |राघव –

 

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