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कहानी सफर के आखरी शिखर पर अकेले ,मंजूर नहीं-25

Byuser

Jun 18, 2021

अभी तक आपने पढ़ा हरी अपनी बीमारी अपने बेटे  को बता देता है जिसे सुनकर उसका बेटा हरी के समझाने के बावजूद अपना धैर्य खो देता है और सुबक सुबक कर रोना शुरू कर देता है |अब इससे आगे –

बेटा इस तरह रोओगे तो सभी घर बालों तक तुम्हारी आबाज पहुँच जाएगी और समय से पहले ही घर में कोहराम मच जाएगा इसलिए धीरज रखो और बड़े होने का फर्ज निभाओ |अपने पापा की बात सुनकर उसे अहसास हुआ कि उसे अपनी पीड़ा को दबाना ही होगा और हर बक्त पापा का ख्याल अब वही रहेगा |उसने अपने आँसू साफ किये और बाहर आ गया |

इधर माधवी ने अपने घर पहुचने के बाद खाना बिल्कुल बंद कर दिया है वह अपने रसोइया को बुलाकर कहती है कि किसी भी हालत में घर के किसी भी सदस्य को ये पता ना चले |लेकिन पाँच दिन के बाद ही वह चक्कर खाकर गिर जाती है घर के सभी सदस्य तुरंत ही अपने फेमली डॉक्टर को फोन करते हैं |डॉक्टर माधवी के निस्तेज पड़े चेहरे को देखता है और बी पी चेक करता है तो बी पी बहुत लो मिलता है वह कुछ दबाएं लिखकर देता है और माधवी के पति से माधवी का ख्याल रखने और अच्छी डाइट देने को कहता है |

माधवी पूरे परिवार का ख्याल रखती थी और अपने फिटनेश की उसे बहुत परवाह थी इसलिए उसके पति को अब चिंता हो रही थी कि आखिर माधवी को हुआ क्या है |डॉक्टर के जाने के बाद माधवी के पति ने माधवी से कहा -माधवी जब से तुम पिछले टूर से बापिस आई हो तभी से तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं है मैँ पिछले कई दिन से ये महसूस कर रहा था लेकिन कह नहीं पा रहा था यदि कोई परेशानी की  वजह हो तो मुझे बताओ शायद में तुम्हारी कुछ मदद कर सकूँ |

माधवी जानती थी कि वह क्या करने जा रही है साथ ही वह अपने पति को भी परेशान होते नहीं देख सकती थी हर कदम पर वह उसका साथ देते आ रहे थे |इसलिए उसने थोड़ा मुस्कराते हुए कहा तुम यूं ही चिंता आर रहे हो मुझे कुछ भी नहीं हुआ है डॉक्टर ने कहा है ना बी पी लो है दवा खाऊंगी और बिल्कुल ठीक हो जाऊँगी |ठीक है,अब में तुम्हारा ख्याल रखूँगा में अपना दो दिन का बाहर जाने का टूर रद्द कर देता हूँ कहकर उन्होंने अपना मोबाइल निकाला और नंबर मीलाने लगे तभी माधवी ने उनके हाथ से फोन ले लिया और बोली दो दिन की ही तो बात है मैं अपना ख्याल कर लूँगी तुम्हें अपना टूर केंसील करने की जरूरत नहीं है |माधवी ने कुछ इस तरह से अपने पति को कहा कि उन्हें उसकी बात माननी ही पड़ी |

पति के जाने के बाद जो दबाएं डॉक्टर ने लिखकर दी थीं और जाते हुए माधवी के पति ने जोर देकर कहा था माधवी दवाएं समय से ले लेना नहीं तो मैं तुम से कभी बात नहीं करूंगा वही दबाएं माधवी ने डस्टबिन में डाल दी थीं |यूं एक दिन और बीता अब माधवी का बी पी और नीचे गिर रहा था  और माधवी अपनी सारी शक्ति एकत्र करके बाकी घर बालों के ये अहसास नहीं होने दे रही थी जबकि उसकी हालत बहुत बिगड़ रही थी |

इधर हरी की हालत आज बहुत खराब है उसकी बिगड़ी हालत देखकर लड़के ने अपने परिवार को सब कुछ बता दिया |जिसे सुनकर हरी की पत्नी बेहोश हो जाती है काफी प्रयत्न के बाद उसे होश में लाया जाता है |वह हरी के पास जाकर शिकायत भरे लहजे में कहती है कि आपने मुझे इस काबिल भी नहीं समझा कि में आपके दुख में शामिल हो पाती |परिवार के सदस्य उसे शांत रहने को कहते हैं जबकि सभी इतने दुखी हैं कि शब्दों में कह पाना संभव नहीं है | इससे आगे की कहानी अगले भाग में |

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