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कहानी सफर के आखरी शिखर पर अकेले ,मंजूर नहीं-24

Byuser

Jun 17, 2021

अभी तक आपने पढ़ा माधवी हरी को लेकर उसके घर जाती है |हरी अपनी पत्नी से माधवी का परिचय कराता है हरी की पत्नी बड़े सहज भाव से माधवी से मिलती है अब इससे आगे –

हरी की पत्नी एक ट्रे में चाय के कप और साथ में कुछ बिस्किट ,नमकीन लेकर आती है तीनों साथ बैठकर चाय पीते हैं साथ ही माधवी और हरी की पत्नी एक दूसरे के परिवार के बारे में जानकारी के साथ अन्य सामाजिक मुद्दों पर बातचीत कर एक दूसरे को समझने की कोशिश करते हैं |

चाय की प्याली ट्रे में रखते हुए माधवी हरी की तरफ देखती हुई कहती है अच्छा हरी अब इजाजत दो अभी मैं जाती हूँ |माधवी की पत्नी और कुछ देर बैठने का आग्रह करती है लेकिन  माधवी फिर आऊँगी का कहकर चलने का उपक्रम करती है | हरी की पत्नी उसे दरबाजे पर छोड़ने जाती है |

माधवी के जाने के बाद हरी की पत्नी सीधा रूम में आती है और हरी से शिकायत भरे लहजे में कहती है आप तो रूटीन चेकअप का कहकर गए थे और अस्पताल से आपको आगे भी रेफर कर दिया लेकिन आपने मुनासिब नहीं समझा की आप  किस तकलीफ से गुजर रहे हैं ये घर पर बता दूँ ,जब से आप गए थे तब से घर पर हर कोई बैचेन है | अब जल्दी से सभी को ये बताओ कि आखिर किस चेकअप के लिए बड़े अस्पताल रेफर किया था जबकि यंहा अस्पताल में सभी रोगों के टेस्ट हो जाते हैं |

हरी ने अपनी पत्नी को शांत करते हुए शरारत पूर्ण लहजे में कहा अजी आप इसी तरह बिगड़ती रहीं तो हम बीमारी से पहले तुम्हारी अदाओं से ही मर जाएंगे |हरी जानता था कि उसकी मौत अब धीरे धीरे उसकी तरफ बढ़ रही है इसलिए वह इस टाइम को हँसते हुए सभी के साथ बिताना चाहता था |वह बजाय अपनी बीमारी के वारे में बात करने दूसरी बात कर अपनी पत्नी को उलझा रहा था और इसमें उसको कामयाबी भी हासिल हो गई जब उसकी पत्नी यह कहकर वहाँ से उठने लगी कि तुम्हें तो अब बुढ़ापे  में विनोद सूझ रहा है |हरी पीछे से तेज  आबाज में कहता है अरे भाई अभी तो हम जवान हैं |

हरी को घर आए हुए दो दिन बीत चुके हैं आज उसे खांसी बहुत आ रही है  उसने अपने बड़े बेटे को आबाज लगाई तो वह तुरंत ही हाजिर होते हुए बोला हाँ पापाजी |हरी ने बेटे से कहा बेटे पहले तो एक परात में मिट्टी या राख भरकर लेकर आओ अभी तुम्हारी माँ किचन में होगी उसे डिस्टर्ब मत करना |ठीक है पापाजी कहकर बेटा चला  जाता है और बाहर से एक परात में थोड़ी सी राख भरकर हरी के बिस्तर के साइड में रख देता है |

इसी दरमियान हरी को खांसी का एक तेज दौरा पड़ता है और जब वह थूकता है  तो उसके मुंह से खून की उलटी आती है जीसे देखकर उसका लड़का घबरा जाता है और अपनी माँ को आबाज लगाने की चेष्टा करने को होता तभी इशारे से हरी उसको आबाज लगाने से रोक लेता है |

उलटी होने के बाद हरी की खांसी जब थोड़ी शांत होती है तो  हरी अपने बेटे को कहता है बेटा मेरी बात ध्यान से सुनो और मुझे बचन दो कि जब तक उचित समय ना हो मैं तुम्हें जो बता रहा हूँ उसे तुम किसी के आगे जाहीर नहीं  करोगे |बेटा कहता है आप कहिए पपाजी जैसा आप चाहते हैं मैं वैसा ही करूंगा एक अनजान आशंका से उसका ह्रदय बैठा जा रहा था |

हरी ने कहा अब तुम्हें धीरज रखना होगा और आगे अपनी माँ का ख्याल भी रखना होगा वह बहुत भोली है उसे छल कपट बिल्कुल भी पता नहीं है |मुझे पता है पापाजी आप आगे बताइए मेरा ह्रदय बहुत घबरा रहा है |बेटे तुम मेरे शेर बेटे हो इसलिए धीरज रखो ये जीबन क्षणभंगुर है पर मुसीबत के समय इंसान को धैर्य रखना होता है |अब सुनो मेरे पास ज्यादा बक्त नहीं है मेरे शरीर में केन्सर ने अपनी जड़ें जमा ली है उसके इतना कहने पर ही बेटा सुबकने लगा और लाख प्रयत्न के बाद भी वह अपने आपको शांत नहीं कर पा रहा था |इससे आगे अगले भाग में –

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