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कहानी सफर के आखरी शिखर पर अकेले ,मंजूर नहीं-23

Byuser

Jun 16, 2021

अभी तक आपने पढ़ा माधवी- हरी को अस्पताल से चेक कराकर बापिस एम्बुलेंस से घर के लिए रवाना होते हैं |माधवी ने अभी तक हरी का घर नहीं देखा है कभी ऐसा मौका ही नहीं मिला जो वो उसके घर तक जा सके | उसके अंदर एक हिचकिचाहट है पता नहीं हरी के घर वाले क्या सोचेंगे वह अपना परिचय किस तरह कराएगी और भी बहुत सी बातें इस वक्त माधवी और हरी के दिमाग में चल रही हैं लेकिन कोई भी अपनी अंदर की कश्मकश को बाहर लाने की कोशिश नहीं कर पा रहा है |
एम्बुलेंस में एक सन्नाटा है यूं ही चलते चलते काफी सफर पार हो चूका है |बहुत देर की ख़ामोशी के बाद हरी ने माहौल को कुछ हल्का करने की कोशिश करते हुए मजाकिया लहजे में माधवी को कहा माधवी इस जन्म में तो तुमने मुझे अपने से दूर रखने में कामयाबी हासिल कर ली मगर अगले जन्म में ऐसा नहीं करने दूंगा बल्कि ऊपर जाकर भगवन से कहूंगा कि वह मुझे माधवी बनाये और तुम्हें हरी ताकि हर बात में मेरी ही चले |हरी कहकर खुद ही ठहाके मरकर हंस पड़ा |माधवी भी मुस्कराये बिना न रह सकी|
अब अमुलेन्स गांव के अंदर प्रवेश कर चुकी थी किन्योकि ड्राइवर को उनके घर का पता नहीं था इसलिए उसने हरी को पूछा सहाब अब अपने घर का रास्ता बता देना | हरी ने जबाब में कहा भाई सीधे चलो जब गली दाहिने मुड़े तभी रोक देना कॉर्नर पर ही अपना घर है |हरी ने फिर माधवी कि तरफ देखते हुए कहा माधवी अभी घर पर किसी को कुछ भी मत बताना मैं मौका देखकर सबको बता दूंगा |
एम्बुलेंस जैसे ही दाहिने मुड़ी ड्राइवर ने साइड में खड़ी करके स्विच बंद कर दिया | गाड़ी का इंजिन बंद होने पर एक बार के लिए वंहा ऐसी शांति हुई कि सुई भी गिरे तो आबाज आये |सबसे पहले माधवी नीचे उतरी उसके बाद वह हरी को उतारने कि कोशिश कर ही रही थी तभी हरी के घर से एक युबक निकला और एम्बुलेंस कि तरफ बढ़ा माधवी ने अंदाजा लगाया कि ये हरी का बेटा होगा उसका अंदाजा उस समय बिलकुल सही बैठा जब उसने हरी को देखकर पापा के सम्बोधन से पुकारा और चरण स्पर्श किये | हरी ने माधवी कि तरफ इशारा करते हुए कहा ये मेरी बचपन कि दोस्त और तुम्हारी आंटी हैं हरी का बाक्य अभी पूरा भी नहीं हुआ था कि उसने माधवी के पैर छूकर नमस्ते की |
हरी को एम्बुलेंस से उतारकर घर के अंदर ले जाया गया और जंहा हरी का कमरा था वंही बेड पर उसे लिटा दिया गया इतने में परिवार के सभी सदस्य कमरे में इकठ्ठा हो गए | सभी जानना चाहते थे कि
आखिर हरी को हुआ क्या है और सभी ने अपने अपने सवालों कि बौछार शुरू कर दी हरी ने कहा कुछ देर बाद सभी के सवालों का जबाब दूंगा फ़िलहाल मेरे साथ एक मेहमान हैं तब सबकी नजर माधवी कि तरफ गई तो सब वहां से अपने अपने रूम में चले गए |हरी कि पत्नी भी उठकर जाने लगी तो हरी ने उसको टोका और कहा यही है मेरे बचपन कि साथी माधवी दरअसल हरी माधवी उसकी दोस्त है ये पहले से ही अपनी पत्नी को बता चूका था | हरी कि पत्नी ने दोनों हाथ जोड़कर माधवी को नमस्ते की और माधवी के लिए चाय बनाने किचन की तरफ चल दी |माधवी ने अब चैन की साँस ली वह रास्ते में क्या क्या सोचती रही थी मगर यंहा सभी उससे सहज ही मिल रहे थे ,उसने अंदर ही अंदर कहा हरी का परिवार भी हरी की तरह सुलझा हुआ है और वैसा ही समझदार भी है | इससे आगे अगले भाग में |

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