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कहानी सफर के आखरी शिखर पर अकेले ,मंजूर नहीं-22

Byuser

Jun 11, 2021

अभी तक आपने पढ़ा हरी को डॉक्टर ने केन्सर विशेषज्ञ के पास रेफर कर दिया है माधवी हरी को लेकर दूसरे अस्पताल में जाती है और हरी को सहारा देकर डॉक्टर के रूम के पास पहुँचती है |अब इससे आगे –

हरी और माधवी डॉक्टर के रूम के पास पँहुचते हैं तो हरी की  नजर डॉक्टर की नेम प्लेट पर जाती है जिसके ऊपर डॉक्टर के नाम के अलावा नीचे की साइड में केन्सर विशेषज्ञ भी लिखा हुआ था अब हरी को समझते देर नहीं लगी कि उसे क्या बीमारी है |

दोनों डॉक्टर के कमरे के अंदर दाखिल होते हैं |माधवी डॉक्टर को हरी  के सारे कागज दिखती है डॉक्टर सारी रिपोर्ट देखने के बाद टेवल पर रखी घंटी दबाता है और बाहर से पीऑन अंदर  आकर खडा  हो जाता है डॉक्टर उससे कहता है कई वह हरी को लेकर सिटी स्कैन रूम में जाए हरी खडा  हुआ तो माधवी भी उसके साथ खड़ी होने लगी तब डॉक्टर ने कहा आप बैठिए स्कैन की रिपोर्ट कुछ ही समय में यहीं आ जाएगी |

हरी जब पीऑन के साथ बाहर चला जाता है तो माधवी डॉक्टर से पूछती है डॉक्टर सहाब हरी की रिपोर्ट क्या कहती हैं डॉक्टर माधवी से कहता है कि आप को हौसला रखना होगा हरी का अब इलाज हो पाना  संभव नहीं रहा फिर भी में अपनी तससली के लिए एक वार फिर से सिटी स्कैन देखना चाहता हूँ |कुछ ही देर में स्कैन की रिपोर्ट उसके सामने आ  चुकी थी रिपोर्ट देखने के बाद डॉक्टर ने कुछ दबाएं लिख कर दीं और माधवी से कहा ये दर्द की दबाएं हैं अब इनका ख्याल घर पर ही रखें इंफेकसन सारे शरीर में फैल चुका है |पेसेन्ट के पास ज्यादा समय नहीं है |

डॉक्टर माधवी को जो कह रहा था ,माधवी उससे आगे कुछ सुन ही नहीं पा  रही थी  उसके कानों में तो डॉक्टर बस एक ही वाक्य गूंज रहा था -पेसेन्ट के पास ज्यादा समय नहीं है |इस हालत में वह कब तक रहती कि डॉक्टर ने उसे चेताया ,माधवी जी पेसेन्ट आ रहा है अपने आपको संभालो और पीऑन के साथ हरी डॉक्टर के रूम में प्रवेश करता है |

थोड़ी देर की खामोशी के बाद हरी डॉक्टर की तरफ मुखातिब होते हुए कहता है डॉक्टर सहाब आप मुझे  मेरी बीमारी को लेकर सब बता सकते हैं मैं एक फौजी हूँ और सब सहने की हिम्मत रखता हूँ |डॉक्टर ने  सवाल का जवाब देने से पहले माधवी की तरफ देखा और माधवी के इशारे को समझते हुए उसने हरी से कहा -हरी सच तो ये है की तुम्हारी बीमारी अब लास्ट स्टेज पर है |हरी ने फिर एक और सवाल  किया डॉक्टर सहाब कितना समय है मेरे पास ताकि उस समय को में खुलकर जी सकूँ |डॉक्टर ने कहा बक्त निर्धारित करने का काम तो भगवान का है जब तक उसका हुक्म नहीं होगा कुछ नहीं होगा |

माधवी जो बड़ी देर से अपनी आँखों के सैलाब को रोके हुई थी अब रोक नहीं पा रही थी और डॉक्टर के रूम में ही फफक – फफक कर रो पड़ी |हरी ने जान बूझकर माधवी को चुप नहीँ कराया वो जानता था कि माधवी के आँसू ही उसके अंदर के दर्द को कम करने में सहायक होंगे |

अस्पताल से निकलते हुए हरी ने मजाक भरे लहजे में कहा माधवी जब भी मैं तुम्हारे साथ कुछ समय बिताना चाहता हूँ तभी भगवान हमें  अलग होने का कोई कारण पैदा कर देते हैं इस वार माधवी ने कहा नहीं हरी भगवान जो कर रहे हैं वो तुम देख नहीं पा रहे हो अब तो हमारे मिलन का समय नजदीक आ रहा है तुम क्या सोचते हो सफर के आखरी शिखर पर अकेले,नहीं ये मंजूर नहीं …….हरगिज मंजूर नहीं |इससे आगे अगले भाग में  |

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