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कहानी सफर के आखरी शिखर पर अकेले ,मंजूर नहीं-21

Byuser

Jun 7, 2021

अभी तक आपने पढ़ा हरी का पता लगाकर माधवी अस्पताल आ जाती है और हरी से उसकी बीमारी के बारे में पूछती है लेकिन हरी खुद अनजान है कि उसे क्या बीमारी है इसलिए माधवी  डॉक्टर के पास जाती है और डॉक्टर से हरी के बारे में पूछती है अब आगे –

माधवी के एक साथ कई सवालोंको  सुनकर डॉक्टर गंभीर हो जाता है और माधवी को बताता है कि हरी को लास्ट स्टेज का फेफड़ों का केंसर है |माधवी डॉक्टर की  बात सुनकर एक पल के लिए सुन्न हो जाती है लेकिन अगले ही पल अपने आपको सभालते हुए डॉक्टर से कहती है डॉक्टर सहाब क्या ऑपरेशन संभव नहीं है डॉक्टर ने कहा जहां तक मेरा अनुभव बताता है अब ऑपरेशन करना मुमकिन नहीं है फिर भी मैं केन्सर विषेषज्ञ की  राय के लिए आगे रेफर कर रहा हूँ |

माधवी जब चेयर से खड़ी हुई तो उसकी टागे कांप रही थी जैसे किसी ने उसकी सारी शक्ति निचोड़ ली हो थोड़ी देर वह  कुर्सी का सहारा लेकर  खड़ी रही डॉक्टर ने पूछा माधवी जी  आप ठीक तो हैं ना माधवी ने अपनी सारी शक्ति एकत्र की और कहा मैं ठीक हूँ फिर डॉक्टर से इजाजत लेकर हरी के बेड की तरफ आगे बढ़ गई |

माधवी को बापिस आया देखकर हरी ने पूछा डॉक्टर ने क्या बताया माधवी अभी तक अपने आपको काफी सभाल चुकी थी उसने थोड़ा मुस्कराते हुए कहा कोई खास नहीं तुम्हारे फेफड़ों में इन्फेक्शन है जिसकी जांच के लिए आगे अस्पताल रेफर कर रहे हैं |हरी ने माधवी के चेहरे को देखा जो बिल्कुल निशतेज दिखाई दे रहा था वह समझ गया जो माधवी बता रही है वैसा है नहीं अवश्य ही कुछ गंभीर बात है लेकिन प्रत्यक्ष में उसने माधवी पर कुछ जाहीर नहीं होने दिया |

डॉक्टर ने हरी के कागज तैयार कर दिए और माधवी को देते हुए कहा मैंने डॉक्टर से बात कर ली है जब आप वहाँ पँहुचेंगे तो वे तुरंत ही हरी के केस को अटेन्ड कर लेंगे |माधवी ने जाने से पहले अपने घर सूचना दी और बताया कि वह किसी काम से शहर से बाहर जा रही है आने के बाद सब डिटेल में बताएगी |माधवी के घर वालों के लिए ये कोई नई बात नहीं थी माधवी अक्सर अपने सोशल कार्यों से बाहर जाती रहती थी |

वार्ड के आगे अंबुलेन्स लग चुकी थी माधवी ने हरी के कपड़े और कुछ अन्य सामान दबाइयाँ ड्राइवर को देते हुए कहा इन्हें अंबुलेन्स में रख दो इसी बीच हरी अपने घर फोन कर चुका था और अपनी पत्नी  को उसने कहा कि वह एक टेस्ट के लिए बड़े अस्पताल जा रहा है इसलिए कोई यंहा ना आए वह यंहा नहीं मिलेगा उसकी पत्नी उससे कुछ और भी पूछना चाह रही थी लेकिन हरी ने कहा वह आकर सब बताएगा |

हरी को अंबुलेन्स में बैठाया गया माधवी जब उसे सहारा देने आगे बढी तो हरी ने टोकते हुए कहा भई इतनी भी हालत खराब नहीं है जो सहारा ले|कर अंबुलेन्स में बैठाओगी हालांकि उसे काफी कमजोरी महसूस हो रही थी फिर भी वह अंबुलेन्स में बिना सहारे ही चढ गया |

अंबुलेन्स लगभग दो घंटे के सफर के बाद अपने गंतव्य तक पँहुच चुकी थी | माधवी ने हरी को अंबुलेन्स से उतारने से पहले  अंदर जाकर उस डॉक्टर का रूम पूछा जिसके पास हरी को रेफर किया गया था |फिर वह लोटकर अंबुलेन्स के पास बापिस आई  और इस बार हरी के मना करने के वावजूद उसने हरी को सहारा देते हुए अंबुलेन्स से बाहर निकाला और डॉक्टर के रूम तक ले गई |इससे आगे अगले भाग में –

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