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कहानी सफर के आखरी शिखर पर अकेले ,मंजूर नहीं-20

Byuser

Jun 6, 2021

अभी तक आपने पढ़ा हरी और माधवी की मुलाकात एक पार्टी में होती है दोनों एक दूसरे को पहचान लेते हैं और फोन द्वारा एक दूसरे से  संपर्क करते रहते हैं इसी बीच हरी की तबीयत अचानक खराब हो जाती है और उसे आर्मी केएक अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है|अब इससे आगे-

हरी को अस्पताल आए आज दूसरा दिन है उसे जो दबाएं दी जा रही हैं उनसे उसको खास असर नहीं हो रहा है डॉक्टर को उसकी रिपोर्ट आने का इंतजार है जो कुछ ही समय में मिलने वाली हैं |लैब अससिस्टेंट रिपोर्ट लेकर सीधा डॉक्टर के कमरे में जाता है और सारी रिपोर्टें डॉक्टर की टेवल पर रख देता है|डॉक्टर जैसे जैसे रिपोर्ट देखता जाता है वैसे वैसे उसके चेहरे पर गंभीरता आती जाती है |

सारी रिपोर्ट देख लेने के बाद डॉक्टर हरी के बेड की तरफ जाता है और हरी से कहता है अब कैसा महसूस कर रहे हो जबाब में हरी कहता है डॉक्टर सहाब चेस्ट पैन में आराम नहीं हो रहा है ,अब तो रिपोर्ट भी आ गईं होंगी रिपोर्ट में क्या आया है कोई बिशेष चिंता की तो बात नहीं है दरअसल जब से उसकी माधवी से मुलाकात हुई है तभी से जीवन के प्रति उसका लगाब बढ़ने लग गया है नहीं तो उससे पहले उसने अपने शरीर की कभी देखभाल ही नहीं की जब उसे पता चल था कि माधवी की शादी हो गई है तभी से उसने माधवी की यादों से पीछा छुड़ाने के लिए शराब का सहारा लेना शुरू कर दिया था जिसके कारण उसका शरीर अंदर से खोकला हो चुका था |

हरी ने डॉक्टर की तरफ देखते हुए अपने सवाल को फिर दोहराया डॉक्टर सहाब कोई चिंता की बात तो नहीं है |डॉक्टर ने कहा नहीं ऐसी तो कोई बात नहीं है तुम जल्दी ही ठीक हो जाओगे लेकिन कुछ विशेष उपचार के लिए तुम्हें दूसरे अस्पताल भेजना पड़ेगा इसलिए तुम अपने परिचित को यंहा बुला लो मैं  उनको कुछ दवाएं लिखूँगा जो बाहर से आएंगी साथ ही आगे रेफर करने से पहले कुछ डिस्कशन भी कर लूँगा |

हरी ने सोचा अगर घर से किसी को बुलाया तो सारे घर बाले चिंता में पड़ जाएंगे इसलिए माधवी को ही बुला लेता हूँ वो इतनी बड़ी अधिकारी रही है सब कुछ अच्छे से हेंडल कर लेगी साथ ही मुझे भी उसके आने से कुछ राहत मिलेगी ऐसा सोचकर उसने अपना मोबाइल उठाया और अभी वह नंबर सर्च कर ही रहा था की  माधवी उसके बिस्तर के पास आकर खड़ी होते हुए बोली कैसे हो हरी?|

हरी ने जैसे ही माधवी की तरफ देखा वह आश्चर्य चकित हुए बिना ना रह सका ,उसने सोच आखिर माधवी को मेरे यहाँ होने का कैसे पता चला अभी वह इस बारे में सोचने की  माथापच्ची कर ही रहा था तभी माधवी ने कहा ज्यादा परेशान होने कई जरूरत नहीं है मैं सब बताती हूँ इस बार फिर हरी चौंका आखिर मैं जो सोच रहा हूँ माधवी कैसे जान जाती है |

माधवी हरी के बेड के पास पड़ी एक चेयर पर बैठती हुई बोली हरी कल रात  मैंने सपने मैं देखा कि तुम किसी मुसीबत में हो और मुझे पुकार रहे हो इसलिए मैंने अपने सोर्स से तुम्हारा पता लगवाया और आज यंहा चली आई ,खैर ये बताओ तुम्हें हुआ क्या है और तुम्हारी अब हालत कैसी है |हरी ने माधवी की  बात का जबाब देते हूए कहा डॉक्टर ने  मुझे बीमारी के वारे में तो कुछ नहीं बताया हाँ ये जरूर कहा है कि आगे इलाज के लिए मुझे बड़े अस्पताल जाना पड़ेगा |माधवी खड़ी होते हुए बोली ठीक है मैं डॉक्टर से मालूम करती हूँ |और माधवी डॉक्टर के रूम की  तरफ बढ़ गई |

माधवी ने डॉक्टर के कमरे को नॉक किया तो अंदर से आवाज आई कम इन माधवी डॉक्टर को अभिवादन करते हुए एक चेयर पर बैठ गई माधवी ने अपना परिचय दिया और हरी की बीमारी के वारे में एक साथ कई सवाल दाग दिए |इससे आगे कई कहानी अगले भाग में –

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