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एक अनार तीन बीमार

Byuser

Jul 27, 2021

एक ब्राह्मण के एक लड़की और एक लड़का था | लड़की जब शादी योग्य हुई तो ब्राह्मण ने अपनी पत्नी और बेटे से कहा कि पुत्री के लिए योग्य वर की तलाश करो | ब्राह्मण ने पुत्री योग्य वर तलाश किया और सगाई तय कर दी ,उसकी पत्नी ने भी एक योग्य वर देखा और सगाई तय कर दी इधर लड़के ने भी एक योग्य वर तलाश कर अपनी बहन की सगाई तय कर दी यानी कि एक दुल्हन और तीन दूल्हे | सगाई का दिन ब्राह्मण ने पहले ही मुकर्रर किया हुआ था अत : सभी ने सगाई का दिन भी एक ही रखा |
निश्चित दिन तीनों दूल्हे तैयार होकर ब्राह्मण के घर की तरफ चल दिए लेकिन इत्तफाक से उसी दिन उस लड़की की मृत्यु हो गई और लोग उसका दाह संस्कार करने शमशान में लेकर जा रहे थे | वे तीनों भी उसी के साथ शमशान की तरफ चल दिए | उनमें से एक दूल्हे ने जैसे ही चिता जली उसमें कूदकर अपनी जान दे दी | दूसरे दूल्हे ने वहीँ एक झोंपड़ी डाली और सन्यासी बन वहीँ रहने लगा जबकि तीसरे ने उसके बियोग में सन्यास ले लिया और भिक्षा मांगने लगा |
भिक्षाटन करते करते एक दिन बह सन्यासी उसी ब्राह्मण के घर पहुँच गया जिसकी बेटी के साथ उसका रिश्ता तय हुआ था | घर पंहुचा तो उसने देखा उसका लड़का अपनी माँ को परेशान कर रहा था माँ ने गुस्से में फरसा से उसका सर काट कर मार दिया ये मंजर देखकर वह सन्यासी बिना भिक्षा के बापिस हो लिया रास्ते में वह ब्राह्मण मिल गया तो उसने कहा मैं तुम्हें भिक्षा लिए बिना नहीं जाने दूंगा | सन्यासी ने बताया कि उस घर से मैं भिक्षा नहीं लूंगा जहाँ एक माँ ने अपने पुत्र की गर्दन ही काट दी हो | ब्राह्मण ने कहा उसे मैं अभी जीवित कर दूंगा लेकिन आपको भिक्षा तो लेनी ही होगी सन्यासी ब्राह्मण के साथ उसके घर गया तो ब्राह्मण ने जल पढ़कर लड़के के ऊपर छिड़का और लड़का पुनर्जीवित हो गया | सन्यासी ने ब्राह्मण से कहा कि यदि तुम मुझे कुछ देना ही चाहते हो तो मुझे यह बिद्या सीखा दो | ब्राह्मण ने उसको वह मन्त्र बता दिया और आगाह किया इसका इस्तेमाल वह सिर्फ एक बार कर सकता है |
ब्राह्मण वंहा से सीधा शमशान घाट पहुंचा जंहा उसके साथ शादी करने वाली लड़की की चिता थी | उसने जल लिया और मन्त्र पढ़कर उस चिता पर छिड़क दिया जैसे ही जल छिड़का वैसे ही चिता में से वह लड़की और लड़का जीवित हो गए | अब उस लड़की पर तीनो ही अपना अपना हक़ जताने लगे तभी वहाँ से होकर एक पंडितजी जा रहे थे तीनों ने उनसे सारी बातें बताते हुए कहा अब आप ही निर्णय करें कि यह किसकी पत्नी है | पंडितजी ने कहा जो इसके साथ चिता में भस्म हुआ उसका पुनर्जन्म इस लड़की के साथ हुआ है इसलिए ये उसका धर्म भाई हुआ | जिसने इसको दोवारा जीवन दान दिया वह इसका धर्मपिता हुआ और जो इसकी चिता के पास झोंपड़ी बनाकर रह रहा था वही इसका पति बन सकता है | पंडितजी की बात तीनों ने सहर्ष स्वीकार की और उसके साथ ही उसकी शादी कर दी |

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