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आक चाव कर ल्याया हूँ |

Byuser

Jul 5, 2021

बहुत समय की बात है कि एक नगर में एक सेठ  रहता था कहने को तो वह सेठ था लेकिन दरिद्रता ने उसके घर को घेर रखा था | सेठानी रोज सेठ से कहती कुछ कमा कर लाओ लेकिन सेठ को कोई काम ही नहीं सूझ रहा था लेकिन सेठानी की जिद की वजह से उसने बाहर जाकर कोई काम करने की ठानी | सेठ सेठानी से बोलै कि चुरमा  बनाकर रख देना आज में काम की तलाश में जाउंगा | सेठानी ने पड़ोस से चूरमा की सामग्री मांगी और सेठ को चूरमा बना कर बांध दिया | सेठ चलते चलते एक नगर में पंहुचा तो देखा वहां सभी लोगों की दाढ़ी /बाल बढे हुए हैं | सेठ ने मन ही मन  बिचार बनाया और चूरमा खाकर घर बापिस गया | सेठ को जल्दी घर आया देख सेठानी ने पूछा इतनी जलदी  कैसे बापिस आ गए कुछ काम मिला या नहीं | सेठ ने कहा काम देख आया हूँ अब मुझे तू किसी से १० रूपये उधार लेकर दे दे मैं आऊंगा तो चुकता कर दूंगा | सेठानी पड़ोस से १० रूपये उधार ले आई और सेठ को दे दिए | सेठ ने १० रूपये में नाइ के औजार ख़रीदे और उसी नगर में चला गया | नाइ को देखकर वहां लोगों की लाइन लग गई सेठ को मुंह मांगी रकम मिलने लगी कुछ ही दिनों में सेठ के पास बहुत धन इक्क्ठा हो गया | सेठ उसे लेकर घर लोट आया | सेठ को घर आया देख सेठानी बोली इतनी जल्दी कैसे लौट आये | सेठ ने सेठानी को रूपये देकर कहा कमा कर आया हूँ सेठानी को बड़ा आश्चर्य हुआ इतने कम दिनों ही सेठ इतनी रकम कैसे कमा कर ले आया उसने सेठ से पूछा तो सेठ ने कहा ये छोड़ फिर कभी बताऊंगा आज तो तू  हलवा बना | सेठानी पड़ोस से कढ़ाई मांगने गई तो पड़ोसन ने पूछा आज हलवा कैसे बन रहा है | सेठानी ने सारी बात पड़ोसन को बताईं , पड़ोसन बोली कि सेठ जी से पूछकर बताना सेठ इतने कम समय में इतना रुपया कंहा से कमा कर लाया है | सेठानी बोली ठीक है पूछ कर जरूर बताउंगी | हलवा खाने के बाद सेठानी ने फिर पूछा बताओ ये रूपये कैसे कमा कर लाये | सेठ ने बहुत टालने की कोशिश की लेकिन सेठानी की जिद देखकर उसने झुंझलाते हुए कह दिया -ये रूपये आक चबा कर लाया हूँ | सेठानी यही जाकर अपनी पड़ोसन को बता दिया | पड़ोसन ने अपने पति को तैयार करके जंगल में भेज दिया और बता दिया कि सेठ आक चबाकर पैसे कमा कर लाया है | उसने जंगल में जाकर आक चवाना शुरू कर दिया ,आक चवणे से उसकी आँखों की रौशनी चली गई जैसे तैसे वह अपने घर पंहुचा और सारी  घटना अपनी पत्नी को बताई | 

पड़ोसन को सेठानी पर बहुत गुस्सा आया और वह अपने आदमी को लेकर राजा के दरवार में चली गई और कहने लगी हुजूर हमें इंसाफ चाहिये | राजा ने सिपाही भेजकर सेठ को बुलवा लिया राजा ने पूछा तुमने इससे ऐसा झूट क्यों बोला जिससे इसकी रौशनी चली गई | सेठ ने सारी कहानी राजा को बताई और कहा हुजूर आक चबाणे से मेरा  तात्पर्य ऐसा  काम करने से था जो मेरे लायक था ही  नहीं अगर किसी ने मुझे बाल काटते हुए देख लिया होता  तो मेरा तो वहीँ मरना हो जाता इसलिए मेरी पत्नी के बार – बार पूछने पर मैंने कह दिया कि यह रुपया मैं आक चवा कर लाया हूँ ,इसमें मेरी कोई गलती नहीं है | सारी  गलती इनकी  स्वयं की है बिना बिचार किये लालच में आक के पत्ते चवाये | राजा  सेठ की बात से सहमत होते हुए बोला इसमें इस सेठ की कोई गलती नहीं है | इस कहानी से हमें यही शिक्षा  मिलती है किसी बताई बात पर भरोसा करने से पहले अपने बिवेक  से उसे  तोल कर जरूर देखें | 

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