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कंजूस का धन

Byuser

Jul 30, 2021

एक सेठ के पास बहुत धन था लेकिन वह कंजूस इतना था कि अपने पेट को भी भरपेट भोजन नहीं देता था | उसकी कंजूसी से उसके परिवार के सभी सदस्य परेशान थे | उसके एक लड़का था उसकी शादी भी उसने बड़ी कंजूसी के साथ की | बहु ने घर के हालात देखे तो घर में खजाना भरा पड़ा है लेकिन उसका उपभोग कोई नहीं कर पा रहा था क्योंकि सेठ न तो खुद खर्चा करता ना किसी को करने देता था |
एक दिन सेठ किसी काम से बाहर जाने लगा तो उसके बेटे की बहू ने उसे खाना बनाकर दिया और साथ में एक मटकी में जल रख दिया | सेठ पैसों की कंजूसी के कारण अपनी यात्रा भी पैदल ही किया करता था | इसलिए सेठ अपने गंतव्य तक पैदल ही चल पड़ा | चलते चलते जब दोपहर होने लगी तो खेतों में बने एक चबूतरे पर बैठकर वह घर से लाया खाना खाने लगा | सेठ अपनी आदतानुसार खाना भी रुखा सूखा ही खाता था | खाना खाने के बाद जब उसने मटके से पानी पीना चाहा तो उसने देखा उसकी बहु ने पानी की जगह मटके में सरबत भरके रखा हुआ है | उसे अपनी बहु पर बहुत गुस्सा आने लगा की उसने व्यर्थ ही इतनी शक़्कर वर्वाद कर दी | उसने गुस्से में वह शर्वत पीने की बजाय पास में एक बिल था उसमें उंडेल दिया |
उस बिल में एक सर्प रहता था उसने वह मीठा शरबत पिया तो बड़ा प्रसन्न हुआ और बाहर निकलकर कंजूस सेठ से बोला मैं तुम्हारे बनाये शरबत से बहुत प्रसन्न हूँ | बरदान मांगो तुम्हें किया चाहिए | अब सेठ का गुस्सा काफूर हो गया उसने सोचा बहु ने बहुत अच्छा काम किया जो सर्प उसे मुहं माँगा बरदान देना चाह रहा है उसने सोचा बरदान यदि में अपनी बहु से पूछकर मांगू तो ज्यादा अच्छा रहेगा | उसने सर्प से कहा सर्प देबता यदि आप मुझसे प्रसन्न ही हैं तो मुझे कल बरदान देना | सर्प ने कहा ठीक है कल मांग लेना ,कहकर सर्प अपने बिल में बापिस चला गया |
सेठ ने अपने घर पहुँच कर अपनी बहु को सारी बात बताई | सेठ की बहु बहुत होशियार थी उसने सेठ से कहा पिताजी आप उस सर्प से सिर्फ ये माँगना की हमारा धन हमारा ही रहे ,जब सर्प कोई और वर मांगने को कहे तब भी आप यही वर माँगना | सेठ ने उस सर्प के बिल के पास जाकर उससे वही वर माँगा जो उसकी बहु ने बताया था | सर्प ने कहा कुछ और माँगना हो तो बोलो लेकिन सेठ ने कहा मुझे तो वही वर चाहिए | सर्प ने तथास्तु कहा और अपने बिल में बापिस चला गया |
सर्प के दिए बरदान के कारण वह अपने धन का उपभोग करने लगा क्योंकि अब सच्चे अर्थों में वह अपने धन का मालिक बन गया जबकि पहले वह उस धन का सिर्फ रखवाला था ,| इस प्रकार सेठ की बहु ने अपनी होशियारी से सेठ को अपने धन का मालिक होने का अहसास कराया |
शिक्षा :- कहानी से हमें ये शिक्षा मिलती है कि धन इकठ्ठा करते रहने की बजाय सही तरह उसका उपभोग करते रहने से परिवार में सुख समृद्धि बढ़ती रहती है |

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