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कहानी चार सार की ,का अंतिम भाग

Byuser

Mar 25, 2021

अभी तक आपने पढ़ा राजा अंतिम दोनों सार पढ़ और समझ लेता है -अब इससे आगे –

सुभह होते ही राजा,रानी,और मंत्रीगण गंगा किनारे चल देते हैं | राजा वहाँ पहुंचकर रानी से फिर कहता है कि रानी एक बार फिर सोच लो उसके बाद मैं पत्थर का हो जाऊंगा |

राजा की बात का ना तो रानी पर कोई असर हुआ ना ही किसी मंत्री ने राजा को रोकने की कोशिश की | आखिर राजा सभी मंत्रियों और रानी के चरित्र को बखूबी समझ गया कि इन लोगों को  मेरे पत्थर हो जाने का कोई मलाल नहीं है | राजा नहीं चाहता था कि वह उन सभी की बातों में आकर पत्थर बने बल्कि वो चाहता था कि इन मंत्रियों और रानी को इस जिद की सजा दी जाए |

राजा सभी राजदरवारियों एवं रानी के साथ पैदल ही गंगा किनारे की सैर कर रहा है | अचानक उसको  एक बकरियों का झुंड दिखाई देता है | झुंड में सभी बकरियाँ तो आगे बढ़ जाती हैं लेकिन एक बकरी पीछे रह जाती है उसकी नजर गंगा के किनारे बहते जा रहे एक सेब पर है, लेकिन सेब थोड़ा गहरे पानी में है इसलिए बह अंदर नहीं जा रही है |

इस झुंड में एक बकरा है बह देखता है कि झुंड से एक बकरी गायब है | उसे तलाशने वह पीछे की तरफ आता है जहां उसे वह बकरी दिखाई दे जाती है | बकरी ,बकरे से कहती है कि मुझे बह सेब लाकर दो  |बकरा ने अंदाज लगाया की जहां सेब बहता हुआ जा रहा वहाँ पानी काफी गहरा है ,जहां  उसकी जान भी जा सकती है | बकरा ,बकरी की ओर देखकर कहता है कि मुझे तूने इस राजा की तरह मूर्ख समझ रखा है ये तो रानी के कहने में आकर पत्थर का बनने जा रहा है | तुझे सेब चाहिए तो खुद अंदर जाकर मर मैं तो यहाँ से चला इतना सुनकर बकरी भी वहाँ से मुहँ लटकाए उसके साथ चल देती है |

बकरा और बकरी का ये वार्तालाप  राजा सुन लेता है उसे चौथे सार का स्मरण हो आता है जिसमें आँखों से देखकर सिक्षा लेने की बात बताई गई है अब राजा अपना मन कठोर कर रानी और राजदरवार के मंत्रियों से फिर कहता है की तुम सब की जिद मुझे पत्थर का बना देगी |राजा की बात सुनकर रानी कहती है कि बार-बार बहाने बनाने की जरूरत नहीं है ये क्यों नहीं कहते कि बताना ही नहीं चाहते |राजा समझ गया की मेरी बातों का इन पर कोई असर नहीं होगा उसने अपने सेनिकों को बुलाकर रानी और उन मुहँ लगे मंत्रियों को गरफ़्तार करने का आदेश दिया और कहा इन्हें काल कोठरी में  डाल दिया जाए ताकि इन्हें दूसरों की तकलीफ का अहसास हो सके |

अब राजा उन चारों सार के अनुसार ही अपने काम करता है अब स्वयं प्रजा की परेशानी को महसूस करके प्रजा के लिए कानून बनाता है ,प्रजा अब  बहुत खुश है |

इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है कि :-

01 हमें किसी की बातों को अपने विवेक से जांच परखकर ही अमल में लाना चाहिए |

02 किसी भी इंसान के चरित्र को पहचानकर ही उसके साथ रिश्ता बनाना चाहिए |

03 कोई भी इंसान छोटा हो या बड़ा अगर उससे कुछ अच्छा सीखने को मिलता है तो वे हिचक सिख लेना चाहिए |

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