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कहानी चार सार की भाग -3

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Mar 24, 2021

अभी तक आपने पढ़ा ,राजा को डसने आया सर्प राजा के स्वागत से खुश होकर ,बिना डसे बापिस लौट जाता है | अब आगे –

ये सारी घटना देखकर सभी राजदरवारी आश्चर्यचकित रह जाते हैं | सभी जानना चाहते हैं आखिर राजा को ये मालूम कैसे पड़ा की इस तरह की कोई घटना होने वाली है |
कुछ मंत्री राजा के मूँह लग रखे थे ,ये वही मंत्री हैं जो राजा से अपने मन मुताविक कानून बनवाकर प्रजा को परेशान  करते थे | 

उन्ही मूँह लगे मंत्रियों ने राजा से पूछना शुरू कर दिया कि महाराज आपको ये बताना ही पड़ेगा कि यहाँ ये सर्प आज आने वाला है,आप कैसे जानते हैं  ? राजा जानता था कि यदि वह ये बता देगा कि उसे ये बात कहाँ से पता चली तो वह पत्थर का  हो जाएगा | 

राजा आज का दरवार खत्म कर अपने महल चला जाता है |इधर ये सूचना रंगमहल पहुँच जाती है ,रानी भी ये जानने को बेकरार है कि आखिर राजा को ये कैसे पता चला कि कोई सर्प आज उन्हें काटने आने वाला है |  जैसे ही राजा रंगमहल में आता है रानी जिद करती है कि आपको ये बताना ही पड़ेगा कि आज ये घटना होने बाली थी | राजा बार -बार ,रानी को कहता है कि रानी मैँ ये बात किसी को नहीं बता सकता लेकिन रानी जिद पर अडी  रहती है और कहती है की महाराज यदि आपने ये बात नहीं बताई तो वह जान दे देगी |तब राजा उससे कहता है की रानी यदि मैं तुम्हें ये बता दूंगा तो मैं पत्थर का हो जाऊंगा | रानी राजा की बात नजरअंदाज करते हुए राजा से जिद करती रहती है |

रानी की जिद के आगे झुकते हुए राजा ने अगले दिन गंगा के किनारे ,कैसे क्या हुआ सब बताऊँगा ,कहकर वह अपने शयन कक्ष की तरफ चला जाता है |राजा सोचता है सर्प से  तो बच गए लेकिन अब रानी की जिद से कैसे बचा जाएगा तभी उसे बाकी दो सार और बचे हैं उन्हें देखने की जिज्ञासा हुई |

राजा ने तीसरी पर्ची खोली तो उसमें लिखा था चरित्रम पहचानम सार   राजा समझ रहा था -कि किसी का क्या चरित्र है ये जानना और पहचानना भी अति आवश्यक है | राजा बिचार करने लगा कि रानी को पता है कि जब राजा ये बता देगा कि उसे ये सारी बात कहाँ से पता चलीं तो वह पत्थर का हो जाएगा उसके बाद भी वह जिद कर रही है यही त्रीया चरित्र है |

अब राजा की उत्कंठा चौथे सार को जानने की हो रही थी उसने सोचा यदि वह पत्थर का हो गया तो चौथे  सार को  जाने बगैर ही रह जाएगा ऐसा सोचकर उसने चौथी पुड़िया भी खोल कर देखी तो उसमें लिखा था चक्षु द्रश्यम शिक्षा  सार यानि कि किसी अन्य के साथ घट रही घटना को देखकर शिक्षा लेनी चाहिए | 

राजा दोनों सार को पढ़ चुका है और समझ भी गया है |राजा अब इत्मीनान के साथ सोना चाहता है वो नहीं जानता कि सुभह उसके साथ क्या होगा यही सोचते हुए कब राजा को नींद ने अपने आगोश में ले लिया उसे पता ही नहीं चला | (इससे आगे की कहानी अंतिम भाग में )

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