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कहानी चार सार की भाग -2

Byuser

Mar 23, 2021

अब तक आपने पढ़ा कि राजा भेष बदलकर रात को घूमने जाता है| एक बुढ़िया द्वारा पता चलता है की वह कल मरने वाला है |इससे आगे –

राजा अपने महल में लौटकर आता है और सोचता है कि कल उसका आखरी दिन है |राजा  इस बात को किसी को कह भी नहीं सकता ,इसी कशमकश में उसे बाकी के तीन सार का स्मरण हो आता है | वह दूसरे सार को खोलता है तो उसमें लिखा है वैरी आदर सार |

राजा उसे पढ़कर एकदम से खड़ा हो जाता है और उसी बक्त दरवार के मंत्रियों को तुरंत दरवार में आने का संदेश भिजवाता है | राजा खुद भी दरवार में पहुंचता है |सभी यथाशीघ्र दरवार में पहुँच जाते हैं | सभी को ये जानने की उत्सुकता है कि राजा ने इस समय दरवार में क्यों बुलाया है | सभी से मुखातिव होकर राजा अपना आदेश सुनाता है कि  अमुख बाग से लेकर ( ये वही बाग है जहां उस सर्प का विल है जहां से निकलकार वह राजा को डसने आने वाला है इसकी जानकारी भी उसे उसी बुढ़िया से मिली थी ) राजदरवार तक रास्ते को फूलों से सजा दिया जाए और दोनों तरफ थोड़ी थोड़ी दूर पर कटोरों में दूध भरकर रख दिया जाए,साथ ही पूरे रास्ते को इत्र से महका  दिया जाए  | ये सभी काम भोर होने से पहले पूरे कर लिए जाएं |राजा का आदेश था सभी मंत्रियों नेअपनी अपनी जिम्मेदारी निर्धारित कर काम करवाना शुरू कर दिया हालांकि कोई नहीं जानता था की इसे करने का क्या मकसद है |

राजा सुबह सभी राजदरवारियों के साथ अपने राजदरवार में बैठा  है |निर्धारित समय पर सर्प अपने विल से बाहर निकलता है तो देखता है की  उसके विल से फूलों का रास्ता बनाया गया है दोनों तरफ दूध के कटोरे रखे है | सर्प अब मस्ती में लहराता हुआ राजदरवार की तरफ बढ़ता है | जैसे ही वह राजदरवार में प्रवेश करता है सैनिक उसे मारने को आगे बढते हैं | राजा उन्हें रोकता है और स्वयं सर्प की अगवानी करने आगे बढ़ता है | राजा को इस तरह आगे आता देख सर्प बिचार करता है कि जिस राजा को में मारने आया हूँ वो मेरा कितना आदर कर रहा है | सर्प अपना इरादा बदल देता है और अपना फन नीचे झुकाकर बापिस अपने विल की ओर चल देता है | ( इससे आगे की कहानी अगले भाग में )

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