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लोक कथा -बुद्धि तो अपनी ही काम आती है |

Byuser

Jun 27, 2021

एक राजा था एक दिन राजदरबार में एक मंत्री ने बातों ही बातों में अपने राजा से कह दिया कि बुद्धि तो अपनी ही  काम आती है किसी के देने से नहीं आती |इस बात से नाराज होकर राजा ने उस मंत्री को देश से बाहर निकलवा दिया और नगर के बाहर एक ऊंचे बुर्ज में बंद करवा दिया ,और कहा अब अपनी बुद्धि से ही बाहर निकलना |पहले तो मंत्री ने सोचा जब राजा का गुस्सा शांत होगा तो दो चार दिन बाद निकलवा लेगा लेकिन जब राजा ने कई दिनों तक उसकी सुध नहीं ली तो वह बाहर निकलने का उपाय सोचने लगा |
मंत्री ने बुर्ज के एक झरोखे से झांक कर देखा कि सामने से एक बकरियों का झुंड चला आ रहा है उसने बकरी चराने बाले से कहा कि वह अपने सरदार को बुलाकर लाए उस चरवाहे ने अपने सरदार को आबाज लगाकर बुलाया सरदार ने मंत्री को पहचान लिया | मंत्री ने उससे कहा की तुम एक लंबी और मोटी रस्सी उसके ऊपर पतली रस्सी बांधकर, उस पतली रस्सी के एक छोर पर एक रेशमी कपड़ा बांधकर उस पर चीनी भिगोकर छिड़क दो और उसे नीचे रख दो | उस सरदार ने मंत्री की बात को मानते हुए जैसा बताया था बैसा ही इंतजाम कर दिया और बकरियों के झुंड के साथ वहाँ से चला गया |
कुछ ही देर में मीठे के लालच में  बहुत सारी चीटीयां आकर उस कपड़े पर लग गईं और उस कपड़े को लेकर दीवार पर चढ़ने लगीं कपड़े के साथ पहले पतली रस्सी फिर मोती रस्सी भी खिसकने लगी बुर्ज से मंत्री बड़े कौतूहल के साथ यह सब देख रहा था चिटीयों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही थी और रस्सी ऊपर की ओर निरंतर खिसकती जा रही थी |अंत में रस्सी बुर्ज के सिरे पर जा पहुची मंत्री ने रस्सी पकड़ ली |मोटी रस्सी का एक सिरा बुर्ज के सिरे पर बांध दिया और रस्सी के सहारे बुर्ज से उतर आया और सीधा दरवार में जा पँहुचा | मंत्री को देखकर राजा को बडा  आश्चर्य हुआ उसने मंत्री से बुर्ज से उतरने की तरकीब बताने को कहा तो मंत्री ने अपनी तरकीब राजा को बता दी | मंत्री की  बात सुनकर राजा को भी मानना पडा कि बुद्धि तो अपनी ही काम आती है |
कहानी से शिक्षा :- बिपत्ति के समय किसी अन्य का सहारा ढूंढने की बजाय धैर्य के साथ अपनी बुद्धि का उपयोग कर बड़ी से बड़ी बिपत्ति पर काबू पाया जा सकता है |

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