• Fri. Sep 24th, 2021

GETREALKHABAR

E News/educational stories, poem and life style/only clean content

89 वर्ष की आयु में उप्र के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का निधन

Byuser

Aug 21, 2021

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह का एक लंबी बीमारी के बाद शन‍िवार को न‍िधन हो गया। उन्हें चार जुलाई को लखनऊ PGI में भर्ती कराया गया था जहाँ लंबी बीमारी और शरीर के कई अंगों के काम न करने के कारण आज उन्होंने अंतिम सांस ली। पीजीआइ के डाक्टरों ने कल्याण सिंह की स्थिति बेहद नाजुक होने की जानकारी मुख्यमंत्री समेत उनके परिवार के लोगों को भी दी थी। शनिवार को देर शाम यह सूचना मिलने पर योगी आदित्यानाथ उन्हें देखने एसजीपीजीआइ पहुंचे थे।
भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक कल्याण सिंह का पार्टी के साथ ही भारतीय राजनीति में कद काफी विशाल था। अयोध्या के विवादित ढांचा के विंध्वस के समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह भाजपा के कद्दावर नेताओं में से एक थे। कल्याण सिंह का जन्म 6 जनवरी 1932 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री तेजपाल लोधी और माता का नाम श्रीमती सीता देवी था। कल्याण सिंह दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और अतरौली के विधानसभा के सदस्य थे। वह बुलंदशहर तथा एटा से लोकसभा सदस्य भी रहने के साथ राजस्थान तथा हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रहे। राज्यपाल के रूप में अपना कार्यकाल समाप्त करने के बाद कल्याण सिंह ने लखनऊ में आकर एक बार फिर से भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।
पहली बार कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री वर्ष 1991 में बने और दूसरी बार यह वर्ष 1997 में मुख्यमंत्री बने थे। कल्याण सिंह भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश में सत्ता में आने के बाद जून 1991 में पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद अयोध्या में विवादित ढांचा के विध्वंस के बाद उन्होंने इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुये छह दिसम्बर 1992 को मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया। इसके लिए उन्हें एक दिन की जेल भी जाना पड़ा था | कल्याण सिंह 1993 में अतरौली तथा कासगंज से विधायक निर्वाचित हुये। इन चुनावों में भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में उभरी , लेकिन सरकार न बनने पर कल्याण सिंह विधान सभा में नेता विपक्ष के पद पर बैठे। इसके बाद भाजपा ने बसपा के साथ गठबंधन करके उत्तर प्रदेश में सरकार बनाई। तब कल्याण सिंह सितंबर 1997 से नवंबर 1999 में एक बार फिर मुख्यमंत्री बने। गठबंधन की सरकार में मायावती पहले मुख्यमंत्री बनीं, लेकिन जब भाजपा की बारी आई तो उन्होंने समर्थन वापस ले लिया। बसपा ने 21 अक्टूबर 1997 को कल्याण सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया। बसपा की चाल भांप चुके कल्याण सिंह पहले से ही कांग्रेस विधायक नरेश अग्रवाल के सम्पर्क में थे और उन्होंने नरेश अग्रवाल के साथ आए विधायकों की पार्टी लोकतांत्रिक कांग्रेस का घटन कराया 21 विधायकों का समर्थन दिलाया। नरेश अग्रवाल को सरकार में शामिल करके उन्होंने नरेश अग्रवाल को ऊर्जा विभाग का मंत्री भी बना दिया। वे पिछड़े वर्ग के नेता थे लेकिन जनता से उनका सीधा लगाव रहता था | उनके जाने से भाजपा और प्रदेश को अपूरणीय क्षति हुई है | उनकी तमन्ना थी कि वह राम मंदिर के दर्शन करें यह तमन्ना तो उनकी अधूरी रह गई ,हाँ वह राम मंदिर निर्माण का रास्ता प्रशस्त होते जरूर देख कर गए है |

Leave a Reply