• Fri. Sep 24th, 2021

GETREALKHABAR

E News/educational stories, poem and life style/only clean content

भाई के मन भाई भाया , बिना बुलाबे जीमण आया

Byuser

Jul 1, 2021

दो भाई थे | उनमें बहुत अधिक प्रेम था लेकिन उनकी स्त्रियों की आपस में नहीं बनती थी, इसलिए अलग-अलग रहते थे | एक बार बड़े भाई ने भगवान की कथा कराई और आस – पास के सभी लोगों को खाने पर बुलाया लेकिन अपनी पत्नी के क्लेश से डरते वह अपने भाई और उसकी पत्नी को खाने पर बुलाबा नहीं दे पा रहा था | उसने अपनी पत्नी से जब इस विषय में बात करनी चाही तो वह बोली ख़बरदार जो उनको पूजा में बुलाया लेकिन भाई ने दुनियादारी की बात समझाई तो पत्नी बोली ठीक है आप न्यौता तो दे दो लेकिन बुलाबा मत भेजना आएंगे तो आ जाएंगे नहीं आये तो कोई बात नहीं | भाई ने अपने भाई न्यौता दे दिया |
निश्चित समय पर भोज के लिए जब बुलाबा नहीं आया तो छोटे भाई ने बड़े भाई की मजबूरी समझते हुए , जीमने चला गया | भोजन में चाबल और मूंग परोसे गए | जब ऊपर से घी डालने की बारी आई तो बड़ा भाई घी का बर्तन लेकर चला | औरों को घी डालते डालते जब वह छोटे भाई के नजदीक पहुँचा तो उसने सोचा, भाई को घी डालने से पत्नी रुष्ट हो जायेगी ,अतः उसने ठोकर लगने का नाटक किया और गिरते गिरते घी का पात्र छोटे भाई की थाली में थोड़ा औंधा दिया ,जिससे काफी घी थाली में परोसे गई मूंग में जा गिरा | तब साथ में खाना खा रहे एक ब्यक्ति ने कहा –
भाई के मन भाई भाया ,बिना बुलाबे जीमण आया |
आखड़ियो पर पड़ियो नाहीं ,घी ढुल्यो तो मूंगा मांही |
भाई का भाई से प्रेम था जो वह बिना बुलाबे भी जीमने आ गया | भाई ठोकर खाने पर भी गिरा नहीं और घी भी दुलका तो मूंगों में ही पड़ा बाहर नहीं गिरा |

Leave a Reply