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एक जैसी दूसरी

Byuser

Jul 17, 2021

बहुत समय पहले की बात है कि एक लड़के की शादी कम उम्र में ही हो गई थी | लेकिन उसका गौना 4 साल बाद तय किया गया था इसलिये वह गौना करने यानी अपनी पत्नी को लेने ससुराल गया | गांव में प्रवेश करते ही उसे एक लड़की मिली उसने उससे पूछा बहन अमुख आदमी (अपने ससुर का नाम लेकर )का घर कहाँ है | लड़की ने उत्तर दिया आप मेरे पीछे पीछे आ जाइये मैं वंही जा रही हूँ | घर पहुंचने पर उसे पता चला जिसे वह बहन कहकर घर का पता पूछ रहा था वो ही उसकी पत्नी थी | अब उसे पछतावा होने लगा कि उसने अपनी पत्नी को  बहन कह कर सम्बोधित किया था |
गौना करके वह अपनी पत्नी को लेकर घर आ गया | रात को उसने अपनी पत्नी से कहा देखो मैंने तुम्हें बहन कहकर सम्बोधित किया था अत : मैं तुम्हेँ अपनी पत्नी के तौर पर ग्रहण नहीं कर सकता | अब उचित यही है कि बेशक लोगों की नजर में हम पति पत्नी रहें लेकिन वास्तव में हम भाई बहन की तरह ही रहेंगे | जब तुम अपने पीहर जाओ तो वहां भी ये बात प्रकट मत होने देना | पत्नी ने उसकी बात मानकर वैसे ही रहना शुरू कर दिया | कुछ दिनों बाद जब वह अपने मायके गई तो वहां सभी ने उसकी ससुराल के बारे में पूछा तो उसने बताया कि वहां सभी बहुत अच्छे हैं और मैं भी वहां बहुत खुश हूँ |
इसी तरह कई वर्ष बीत गए तब उसने अपनी माँ से कहा माँ हमारे घर में उजाला नहीं हुआ यानी कि संतान नहीं हुई अत : तुम मेरी छोटी बहन का बिबाह भी वहीँ (मेरे पति के साथ ) कर दो अच्छा रहे इससे हम दोनों वहनें एक साथ भी रहेंगी और जो संतान होगी उसे भी हम मिलजुलकर पाल लेंगी  | उसकी माँ बोली लड़का बहुत अच्छा है ,लड़की वहां सुख पाएगी और उसने रिश्ते के लिए हाँ कर दी |
लौटकर उसने अपने पति को यह बात बताई तो उसने कहा मेरी किस्मत में यदि पत्नी सुख लिखा होता तो वो तुमसे ही मिल जाता इसलिए शादी का बिचार छोड़ दो लेकिन उसने जिद करके अपने पति को मना लिया निश्चित समय में उसका बिबाह हो गया लेकिन जब बिदाई होने लगी तो उसकी सास ने अपने दामाद से कहा जवाईं जी आप यह प्रतिज्ञा कीजिये कि जिस प्रकार आप मेरी लड़की को रखते है तथा जैसी उसे समझते हैं वैसी ही इसे भी समझेंगे | बेचारे दामाद ने टालने की बहुत कोशिश की ,बहुत बहाने बनाये लेकिन सास के हठ के कारण उसे कहना ही पड़ा कि जैसी उसे समझता हूँ वैसी ही इसे भी समझूंगा |
अब चूँकि वह अपनी पहली पत्नी को बहन मानता था और वैसा ही व्यबहार करता था अत : उसे अपनी नई पत्नी को भी बहन बनाना पड़ा और उससे भी कह दिया कि यह बात ससुराल या पीहर में कहीं भी प्रकट ना करे |
शिक्षा :- रिश्तों की पवित्रता आपकी मानसिक स्थति पर निर्भर करती है ,इसलिए  जिसे जिस सम्बोधन के साथ बुलाते हैं  ,उससे वैसा ही आचरण भी करें |

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